महाराष्ट्र: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा और चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया है। डिप्टी सीएम अजित पवार के निधन के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार आज ही उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रही हैं। इतनी जल्दी शपथ ग्रहण कराने का फैसला क्यों लिया गया, इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं।
असल में यह फैसला भावनात्मक से ज्यादा रणनीतिक माना जा रहा है। जब अजित पवार ने एनसीपी में बगावत कर अलग राह चुनी थी, तब वह पवार परिवार में लगभग अकेले पड़ गए थे। शरद पवार गुट और परिवार का कोई भी सदस्य खुलकर उनके साथ नहीं था। अजित पवार की राजनीति पूरी तरह उनके व्यक्तिगत नेतृत्व और समर्थकों पर टिकी हुई थी।
उनके अचानक निधन के बाद सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया कि अजित पवार गुट वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की कमान किसके हाथ में जाएगी। अगर नेतृत्व में देरी होती, तो पार्टी टूटने या दूसरे गुट में विलय का खतरा बढ़ सकता था। इसी आशंका ने सुनेत्रा पवार के नाम को आगे बढ़ाया।
सूत्रों के मुताबिक शुरुआत में सुनेत्रा पवार इस भूमिका के लिए तैयार नहीं थीं। लेकिन पार्टी विधायकों और करीबी नेताओं का दबाव लगातार बढ़ता गया। अजित पवार द्वारा बनाई गई राजनीतिक ताकत को एकजुट रखने के लिए परिवार को तुरंत फैसला लेना पड़ा। यही वजह है कि बिना समय गंवाए आज ही शपथ ग्रहण कराने का निर्णय लिया गया। इस रणनीति के पीछे एक और अहम कारण भी है। पहले पार्टी को स्थिर करना, विधायकों को भरोसे में लेना और संगठन को एकजुट रखना—इसके बाद ही भविष्य में किसी भी तरह के विलय या राजनीतिक समझौते पर बात की जा सकेगी। अगर नेतृत्व खाली रहता, तो पार्टी के भीतर टूट-फूट तय मानी जा रही थी।
आज होने वाले शपथ ग्रहण से पहले सुनेत्रा पवार राज्यसभा सांसद पद से इस्तीफा देंगी। यह इस्तीफा राज्यसभा के सभापति को सौंपा जाएगा। इसके बाद उन्हें विधायक दल का नेता चुना जाएगा और फिर एक संक्षिप्त लेकिन औपचारिक शपथ ग्रहण समारोह होगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम महाराष्ट्र की सत्ता राजनीति में स्थिरता बनाए रखने के साथ-साथ अजित पवार की विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश भी है।
