नेपाल-भारत के बीच पारवहन संधि के प्रोटोकॉल में संशोधन

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उमेश चन्द्र त्रिपाठी

काठमांडू। नेपाल और भारत के बीच पारवहन संधि के प्रोटोकॉल में संशोधन किया गया है। उद्योग, वाणिज्य तथा आपूर्ति मंत्री अनिल कुमार सिन्हा और भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के बीच द्विपक्षीय बैठक के बाद प्रोटोकॉल संशोधन करते हुए लेटर ऑफ एक्सचेंज का आदान-प्रदान किया गया। इस अवसर पर नेपाल और भारत के बीच संपन्न पारवहन संधि के प्रोटोकॉल में संशोधन कर कोलकाता/विशाखापट्टनम से विराटनगर–जोगबनी और कोलकाता/विशाखापट्टनम से नौतनवां (सोनौली) तक रेलमार्ग, तथा वहां से भैरहवा तक सड़कमार्ग का उपयोग करते हुए सभी प्रकार के कार्गो की ढुलाई की अनुमति दी गई है।

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विद्यमान पारवहन संधि के प्रोटोकॉल में संशोधन हुआ है। उद्योग मंत्रालय के प्रवक्ता जितेन्द्र बस्नेत के अनुसार, पहले इन दोनों नाकों से रेलमार्ग द्वारा केवल चार प्रकार के बल्क सामान ही ढोने की व्यवस्था थी, लेकिन संशोधन के बाद अब सभी प्रकार के कार्गो परिवहन संभव हो सकेगा। इससे नेपाल की पारवहन लागत और समय दोनों में कमी आने तथा व्यापार सुगम बनाने में महत्वपूर्ण योगदान मिलने का विश्वास व्यक्त किया गया है। भारत के विशाखापट्टनम दौरे के दौरान वाणिज्य भवन में उद्योग मंत्री सिन्हा और भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री गोयल के बीच हुई मुलाकात में द्विपक्षीय व्यापार, पारवहन व्यवस्था, व्यापारिक अवसंरचना विकास और निवेश प्रवर्धन सहित कई मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। इस अवसर पर व्यापार एवं पारवहन सुगमीकरण के लिए BIS प्रमाणन प्रक्रिया को सरल बनाने, तथा द्विपक्षीय व्यापार और पारवहन व्यवस्था में और सुधार एवं सहजीकरण के विषयों पर भी चर्चा होने की जानकारी सहसचिव बस्नेत ने दी।

भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने भी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा : प्रोटोकॉल में अपनाई गई उदार नीति दोनों देशों के बीच मल्टीमोडल व्यापार संपर्क को मजबूत करने के साथ-साथ नेपाल और तीसरे देशों के बीच व्यापार को भी सुदृढ़ बनाएगी।

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मंत्री सिन्हा ने भारत सरकार की ‘पड़ोस पहले नीति’ की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस नीति के अनुरूप द्विपक्षीय व्यापार एवं पारवहन व्यवस्था में सुधार तथा निवेश को बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों के बीच समन्वय और सहयोग को और उन्नत करने की आवश्यकता है। इस अवसर पर भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री गोयल ने कहा कि भारत ने नेपाल को विशेष प्राथमिकता दी है। चर्चा के दौरान लंबित और समाधान की प्रतीक्षा कर रहे अन्य विषयों को जल्द से जल्द निष्कर्ष तक पहुंचाने की आवश्यकता पर भी ध्यान आकर्षित किया गया। इसके लिए दोनों तरफ के संबंधित द्विपक्षीय तंत्रों को सक्रिय और गतिशील बनाने का निर्देश भी दिया गया।

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