मियावाकी पद्धति से झाँसी में बढ़ रही हरियाली, रेलवे के साथ वन विभाग ने भी बढ़ाया कदम

मियावाकी पद्धति से हरित क्रांति की ओर झाँसी मंडल, उत्तर मध्य रेलवे की अनूठी पहल-

North Central : बदलते पर्यावरणीय परिवेश और तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच हरित क्षेत्र बढ़ाना आज समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बन गया है। इसी दिशा में मियावाकी पद्धति कम स्थान में अधिक घना वन विकसित करने का एक प्रभावी माध्यम बन रही है। मियावाकी पद्धति से विकसित किये गये वन पारंपरिक वनों की तुलना में 30 गुना अधिक घने व 10 गुना अधिक तेजी से बढ़ते हैं। झाँसी में भारतीय रेलवे द्वारा इस तकनीक को अपनाकर हरित क्षेत्र विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं।

क्या है मियावाकी पद्धति?

मियावाकी पद्धति जापान के प्रसिद्ध वनस्पति वैज्ञानिक प्रो. अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित की गई वनीकरण तकनीक है। इसमें कम क्षेत्र में स्थानीय और देशी प्रजातियों के पौधों को पास-पास लगाया जाता है, जिससे कम समय में घना एवं विविधतापूर्ण वन विकसित किया जा सके। मियावाकी पद्धति में 01 वर्ग मीटर में 3-5 पौधे लगाये जाते हैं। पौधरोपण से पहले मिट्टी को पौधों के अनुकूल तैयार किया जाता है और शुरुआती वर्षों में सिंचाई एवं देखभाल की जाती है।

इस पद्धति से विकसित वन क्षेत्र वायु को स्वच्छ रखने, धूल एवं प्रदूषण को कम करने, कार्बन अवशोषित करने तथा पक्षियों और अन्य छोटे जीव-जंतुओं के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने में सहायक होते हैं। सीमित भूमि में अधिक हरियाली विकसित करने के कारण शहरी क्षेत्रों में इस पद्धति का महत्व और बढ़ जाता है।

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मियावाकी पद्धति से हरित क्रांति की ओर झाँसी मंडल, 

झाँसी में मियावाकी पद्धति से हरित क्षेत्र विकसित करने की दिशा में उत्तर मध्य रेलवे के झाँसी मंडल की पहल उल्लेखनीय है। झाँसी मंडल द्वारा उत्तर प्रदेश वन विभाग के सहयोग से रेलवे भूमि पर सघन वन विकसित करने की योजना के तहत 28 जनवरी 2026 को झाँसी रेल मंडल एवं उत्तर प्रदेश वन विभाग के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) किया गया। इसके अंतर्गत रेलवे भूमि पर दो स्थानों पर सघन मियावाकी पौधरोपण एवं हरित विकास का कार्य किया जा रहा है। आरपीएफ टीए कैम्प, झाँसी में लगभग 1.30 हेक्टेयर रेलवे भूमि पर 32,000 पौधों का रोपण किया गया है, जबकि इलेक्ट्रिक लोको शेड, झाँसी के निकट लगभग 2.09 हेक्टेयर भूमि पर 83,000 पौधे लगाए गए हैं। इस प्रकार दोनों स्थलों पर कुल लगभग 3.39 हेक्टेयर रेलवे भूमि में 1,15,000 पौधों का सघन पौधरोपण किया गया है। इस पहल में स्थानीय एवं देशी प्रजातियों को प्राथमिकता दी गई है। मियावाकी वन में पीपल, जामुन, अर्जुन, नीम, महुआ, कचनार, शीशम, अशोक, बरगद, आम, अमरूद, बेलपत्र, तुलसी, अश्वगंधा एवं लेमन ग्रास सहित कुल 35 देशी, औषधीय एवं पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण प्रजातियाँ शामिल हैं। वन विभाग द्वारा इन पौधों की देखभाल आगामी चार वर्षों तक की जाएगी। यह संयुक्त पहल रेलवे की उपलब्ध भूमि को सघन हरित क्षेत्र में परिवर्तित करने के साथ-साथ जैव-विविधता संरक्षण एवं स्थानीय पर्यावरण को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

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झाँसी मंडल के रेलवे परिसरों को हरित क्षेत्र में बदलने की पहल

झाँसी मंडल के रेलवे परिसरों को हरित क्षेत्र में बदलने की पहल के तहत विभिन्न स्टेशनों, कार्यालय परिसरों, रेलवे कॉलोनियों एवं अन्य रेलवे परिसरों में पौधरोपण तथा हरित क्षेत्र विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि रेलवे की उपलब्ध भूमि का पर्यावरणीय दृष्टि से बेहतर एवं योजनाबद्ध उपयोग करते हुए ऐसे सतत और दीर्घकालिक हरित क्षेत्र विकसित करना है, जो आने वाले वर्षों में शहर की हरियाली, जैव-विविधता और पर्यावरण संतुलन को मजबूत आधार प्रदान करें

मियावाकी पद्धति से विकसित किए जा रहे सघन वन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हैं, जो वर्तमान में हरियाली बढ़ाने के साथ-साथ भविष्य की पीढ़ियों के लिए स्वच्छ हवा, बेहतर पर्यावरण और समृद्ध जैव-विविधता का आधार तैयार कर सकते हैं। झाँसी मंडल द्वारा किए जा रहे ये प्रयास रेलवे परिसरों को अधिक हरित एवं पर्यावरण-अनुकूल बनाने के साथ-साथ झाँसी के हरित विकास को नई गति देने की दिशा में एक सार्थक कदम हैं।

मियावाकी पद्धति से सघन वन विकसित करने में मिली सफलता से प्रेरित होकर रेलवे एवं वन विभाग द्वारा झाँसी सहित उत्तर मध्य रेलवे के झाँसी मंडल के अन्य उपयुक्त स्थलों पर भी ऐसे सघन वन क्षेत्र विकसित करने की व्यापक योजना तैयार की जा रही है। इस पहल का उद्देश्य रेलवे परिसरों को अधिक हरित एवं पर्यावरण-अनुकूल बनाते हुए आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करना है।

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