- ट्रंप की डेडलाइन खत्म होने के करीब, अमेरिका-इजरायल ने तेज किए हमले
- ईरान में रातभर गूंजते रहे धमाके
नया लुक डेस्क
तेहरान। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले लगातार तेज होते जा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से दी गई समय-सीमा जैसे-जैसे समाप्ति की ओर बढ़ रही है, वैसे-वैसे सैन्य कार्रवाई और आक्रामक होती दिख रही है। सोमवार सुबह राजधानी तेहरान के दक्षिण-पश्चिम इलाके में एक रिहायशी इमारत पर हुए हवाई हमले में कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई। ईरानी मीडिया के अनुसार, इस हमले में कई लोग घायल भी हुए हैं। वहीं, राजधानी में रातभर जोरदार धमाकों की आवाजें गूंजती रहीं और कम ऊंचाई पर उड़ते लड़ाकू विमानों की आवाज कई घंटों तक सुनाई देती रही।
शरीफ यूनिवर्सिटी को बनाया गया निशाना
तेहरान की प्रतिष्ठित शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी पर भी एयर स्ट्राइक की गई। हमलों में यूनिवर्सिटी की कई इमारतों को नुकसान पहुंचा है, साथ ही पास स्थित प्राकृतिक गैस वितरण केंद्र भी प्रभावित हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस यूनिवर्सिटी को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि यहां ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम से जुड़े शोध कार्य होते रहे हैं, जो अर्धसैनिक बल रिवोल्यूशनरी गार्ड के नियंत्रण में है। सरकारी समाचार पत्र ‘ईरान’ की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण तेहरान में स्थित कोम शहर के एक रिहायशी इलाके में हुए हवाई हमले में कम से कम 5 लोगों की मौत हो गई। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि हमले का मुख्य निशाना क्या था।
गाजा में जारी हिंसा, 700 से ज्यादा मौतें
गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अक्टूबर में हुए युद्धविराम के बाद से गाजा पट्टी में लगातार हमले जारी हैं। इस दौरान 700 से अधिक फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं। मंत्रालय के आंकड़ों को संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों और स्वतंत्र विशेषज्ञ आम तौर पर विश्वसनीय मानते हैं, हालांकि इसमें नागरिक और लड़ाकों का अलग-अलग विवरण नहीं दिया गया है।
45 दिन के सीज़फायर प्लान पर चर्चा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ इस युद्ध को रोकने के लिए दो चरणों वाली डील पर काम कर रहे हैं। पहले चरण में 45 दिन के सीज़फायर का प्रस्ताव है, जिसके दौरान स्थायी शांति समझौते पर बातचीत होगी। अगर वार्ता में प्रगति होती है तो सीज़फायर की अवधि बढ़ाई जा सकती है। हमलों के चलते ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड और अन्य सुरक्षा बल अपने ठिकानों को लगातार बदल रहे हैं और वैकल्पिक स्थानों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे सैन्य रणनीति और भी जटिल होती जा रही है।
