दो अप्रैल 2026 की सुबह भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद नकारात्मक रही। वैश्विक अस्थिरता और अमेरिका से आए एक बड़े बयान ने बाजार में भारी गिरावट ला दी। जैसे ही ट्रेडिंग शुरू हुई, निवेशकों के बीच घबराहट फैल गई और बिकवाली का ऐसा दबाव बना कि प्रमुख सूचकांक तेजी से नीचे गिर गए। सेंसेक्स में करीब 1,414 अंकों की गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह 71,720 के स्तर पर आ गया। वहीं निफ्टी भी 449 अंकों से अधिक टूटकर 22,230 के आसपास पहुंच गया। यह गिरावट केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रही, बल्कि बाजार की व्यापक स्थिति भी कमजोर नजर आई। कुल मिलाकर अधिकतर शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए, जिससे यह स्पष्ट है कि गिरावट लगभग हर सेक्टर में फैली हुई थी।
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बाजार ब्रेड्थ की बात करें तो गिरावट का असर काफी व्यापक रहा। जहां कुछ ही शेयरों में मामूली बढ़त देखने को मिली, वहीं बड़ी संख्या में शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। इससे यह संकेत मिलता है कि निवेशकों का भरोसा फिलहाल कमजोर पड़ा है। इस गिरावट में कई दिग्गज कंपनियों के शेयरों में भी भारी नुकसान हुआ। फार्मा सेक्टर की प्रमुख कंपनी सन फार्मा में बिकवाली देखी गई, जबकि एविएशन सेक्टर की इंडिगो भी दबाव में रही। इसके अलावा वित्तीय सेक्टर के शेयर जैसे श्रीराम फाइनेंस भी गिरावट से अछूते नहीं रहे।
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विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट का प्रमुख कारण अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का हालिया बयान है। उन्होंने संकेत दिए हैं कि अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है। इस बयान के बाद वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है और निवेशकों ने जोखिम से दूरी बनानी शुरू कर दी है। इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ा है, जो तेजी से बढ़ रही हैं। तेल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था और कंपनियों के मुनाफे पर पड़ सकता है, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ सकता है। विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि फिलहाल बाजार में सतर्कता बरतें। जब तक स्थिति स्थिर नहीं होती, तब तक नई खरीदारी से बचना बेहतर हो सकता है।
