- न्यायिक अधिकारियों की नौ घंटे की घेरेबंदी पर सख्त टिप्पणी, केंद्रीय बलों की सुरक्षा के आदेश
नई दिल्ली। भारत का सर्वोच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल के मालदा में न्यायिक अधिकारियों की नौ घंटे तक हुई घेरेबंदी को लेकर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम को “पूर्व नियोजित, सुनियोजित और प्रेरित साजिश” करार देते हुए कहा कि यह चुनावी प्रक्रिया को बाधित करने और अधिकारियों का मनोबल तोड़ने की कोशिश थी। घटना उस समय हुई जब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने तीन महिला अधिकारियों सहित सात न्यायिक अधिकारियों को बीडीओ कार्यालय में बंधक बना लिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय सशस्त्र बलों की तैनाती का आदेश दिया है।
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10 बड़े प्वाइंट्स में समझें कोर्ट की सख्त टिप्पणियां
- कोर्ट ने कहा कि यह घटना न्यायिक अधिकारियों को डराने-धमकाने का घिनौना प्रयास है और अदालत के अधिकार को सीधी चुनौती है।
- यह कोई सामान्य घटना नहीं, बल्कि अधिकारियों का मनोबल गिराने और न्यायिक प्रक्रिया को बाधित करने की सोची-समझी चाल है।
- राज्य सरकार पर कर्तव्य की अवहेलना का आरोप लगाते हुए कोर्ट ने पूछा कि सूचना के बावजूद सुरक्षित निकासी क्यों नहीं हो सकी।
- मुख्य न्यायाधीश ने नाराजगी जताते हुए कहा कि रात 11 बजे तक जिला कलेक्टर मौके पर मौजूद नहीं थे।
- कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि किसी को भी कानून हाथ में लेकर न्यायिक अधिकारियों में भय पैदा करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
- पीठ ने चेतावनी दी कि यह मामला आपराधिक अवमानना के दायरे में आ सकता है और प्रशासन की “आपराधिक विफलता” सामने आई है।
- कोर्ट ने टिप्पणी की कि पश्चिम बंगाल अत्यधिक ध्रुवीकृत राज्य बन गया है, जहां हर कोई राजनीतिक भाषा बोलता है।
- मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उन्हें पूरी घटना की जानकारी थी और वे रात 2 बजे तक स्थिति पर नजर रखे हुए थे।
- कोर्ट ने सभी राजनीतिक दलों से एकजुट होकर इस घटना की निंदा करने की अपील की।
- अदालत ने केंद्रीय बलों की सुरक्षा के निर्देश दिए, राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया और जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो या राष्ट्रीय जाँच एजेंसी से कराने पर विचार करने को कहा।
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इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख बेहद सख्त नजर आ रहा है, जिससे आने वाले दिनों में राज्य प्रशासन की जवाबदेही और जांच प्रक्रिया पर खास असर पड़ सकता है।
