नया लुक डेस्क
भारत सरकार ने वैश्विक हालात के बीच आम लोगों को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीज़ल पर एक्साइज़ ड्यूटी में बड़ी कटौती की है। भारत में यह फैसला ईरान से जुड़े युद्ध जैसे हालात और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को देखते हुए लिया गया है, ताकि उपभोक्ताओं पर कीमतों का सीधा असर न पड़े। केंद्र सरकार ने विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (Special Additional Excise Duty) में कटौती करते हुए पेट्रोल पर एक्साइज़ ड्यूटी 13 रुपये से घटाकर 3 रुपये कर दी है, जबकि डीज़ल पर यह 10 रुपये से घटाकर शून्य कर दी गई है। यह आदेश तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है, जिससे पेट्रोल पंपों पर ईंधन पुराने रेट पर ही मिलता रहेगा। हालांकि, उद्योग सूत्रों के मुताबिक इस कटौती का पूरा लाभ सीधे उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचेगा। तेल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) अपने घाटे की भरपाई के लिए इस राहत का बड़ा हिस्सा खुद वहन करेंगी, जिससे रिटेल कीमतों में बड़ी गिरावट की संभावना कम है। सरकार ने केंद्रीय उत्पाद शुल्क नियमों में संशोधन कर यह अधिसूचना जारी की है। नई दरों के तहत पेट्रोल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क कम किया गया है, जबकि हाई-स्पीड डीज़ल पर कुछ श्रेणियों में शुल्क संरचना यथावत रखी गई है। एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) पर भी विशेष शुल्क निर्धारित किया गया है।
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वैश्विक तनाव का असर
होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं ने दुनिया भर में तेल की कीमतों को प्रभावित किया है। यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है, जहां से रोजाना लाखों बैरल कच्चा तेल और गैस गुजरती है। भारत के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 40-50 प्रतिशत इसी रास्ते से आता है, इसलिए इसका असर सीधे देश पर पड़ता है।
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देश में पर्याप्त तेल भंडार
सरकार ने साफ किया है कि देश में लगभग 60 दिनों का पर्याप्त तेल भंडार मौजूद है और किसी तरह की कमी नहीं है। इसके बावजूद, कुछ राज्यों खासतौर पर उत्तर प्रदेश में पैनिक बाइंग की खबरें सामने आई हैं, जिसके चलते पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का यह कदम महंगाई को नियंत्रित रखने और परिवहन व कृषि जैसे क्षेत्रों पर बढ़ते बोझ को कम करने की दिशा में अहम है। हालांकि अंतिम कीमतों पर राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए वैट (VAT) और अन्य स्थानीय करों का भी प्रभाव बना रहेगा।
