पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात को देखते हुए भारत में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी मुद्दे पर चर्चा के लिए केंद्र सरकार ने नई दिल्ली में सर्वदलीय बैठक बुलाई है। संसद भवन में आयोजित इस बैठक में सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई प्रमुख नेता शामिल हुए, लेकिन तृणमूल कांग्रेस ने इससे दूरी बनाते हुए बैठक का बहिष्कार किया। इस बैठक का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय हालात पर सभी राजनीतिक दलों को जानकारी देना और देश की रणनीति पर चर्चा करना है। बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर जैसे वरिष्ठ नेता मौजूद हैं। इसके अलावा पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी भी बैठक में शामिल हुए।
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सरकार की ओर से विदेश मंत्री, पेट्रोलियम मंत्री और विदेश सचिव ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति, ऊर्जा संकट और उसके भारत पर संभावित असर को लेकर जानकारी दी। दुनिया के कई देशों में ऊर्जा संकट गहराने की आशंका जताई जा रही है, जिसका असर भारत पर भी पड़ सकता है। विपक्ष की ओर से कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी, डीएमके और अन्य दलों के नेता बैठक में पहुंचे। इन नेताओं ने सरकार से स्थिति पर स्पष्ट रणनीति की मांग की। हालांकि टीएमसी ने इस बैठक का विरोध करते हुए इसमें शामिल नहीं होने का फैसला लिया। पार्टी के वरिष्ठ नेता ने कहा कि वे भाजपा के साथ इस मुद्दे पर किसी बैठक में शामिल नहीं होंगे। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक हालात तेजी से बदल रहे हैं और भारत के लिए संतुलित नीति बनाना जरूरी हो गया है।
