- पार्टी के मेनिफेस्टो में दीदी ने जनता को फिर दिलाया दिलासा, कहा- जीते तो ये वायदे होंगे पूरे
नई दिल्ली। देश के पांच राज्यों में चल रहे चुनाव की गहमागहमी अब तेज होनी शुरू हो गई है। सबसे ज्यादा तैयारी और सरगर्मी पश्चिम बंगाल में देखने को मिल रही है। अभी कुछ दिनों पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल गए थे। उनके दौरे के बाद ‘दीदी’ के ‘भाइयों’ ने जमकर बवाल काटा और प्रधानमंत्री समेत बीजेपी के झंडे-पोस्टर और बैनर चिंदी-चिंदी कर दिए। इसका वीडयो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। खबरों के मुताबिक पश्चिम बंगाल में चुनावी पारा हाई है और तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अपना घोषणा पत्र जारी कर दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ‘दीदी’ ने जनता से 10 बड़ी प्रतिज्ञाएं की हैं, जिनमें लक्ष्मी भंडार की राशि बढ़ाने से लेकर, हर परिवार को पक्का घर, युवाओं को भत्ता और किसानों के लिए 30 हजार करोड़ के कृषि बजट जैसी बड़ी घोषणाएं शामिल हैं।
घोषणा पत्र में लक्ष्मी भंडार योजना की राशि बढ़ाने, हर परिवार को पक्का घर देने, युवाओं को भत्ता उपलब्ध कराने और किसानों के लिए 30 हजार करोड़ रुपये के कृषि बजट जैसी बड़ी घोषणाएं शामिल हैं। बंगाल में एक तरफ जहां राजनीतिक टकराव तेज हो रहा है, वहीं दूसरी ओर दलों के बीच वादों और योजनाओं की होड़ भी देखने को मिल रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में चुनावी मुकाबला और दिलचस्प होने के आसार हैं। जिसका मुख्य आधार “दीदी के 10 संकल्प” हैं। सीएम ममता बनर्जी ने इन संकल्पों के जरिए कल्याण और विकास का बड़ा रोडमैप पेश किया है।
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घोषणापत्र में लक्ष्मी भंडार योजना के तहत सहायता राशि में 500 रुपये की बढ़ोतरी का वादा किया गया है। इसके बाद सामान्य वर्ग की महिलाओं को 15 सौ रुपये और अनुसूचित जाति/जनजाति की महिलाओं को 17 सौ रुपये मासिक सहायता मिलेगी। युवाओं के लिए पार्टी ने ‘बांग्लार युवा साथी’ योजना के तहत 1,500 रुपये मासिक भत्ता जारी रखने का ऐलान किया है। वहीं किसानों और भूमिहीन कृषकों के समर्थन के लिए 30,000 करोड़ रुपये का कृषि बजट प्रस्तावित किया गया है। घोषणापत्र में हर परिवार को पक्का घर देने और सभी घरों तक पाइप से पेयजल पहुंचाने का वादा भी शामिल है। स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए हर साल ‘दुआरे चिकित्सा’ शिविर आयोजित कर घर-घर इलाज पहुंचाने की योजना भी पेश की गई है।
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शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और बंगाल को पूर्वी भारत के बड़े व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही वृद्धावस्था पेंशन योजना के विस्तार और सात नए जिलों के गठन जैसे प्रशासनिक बदलावों का भी प्रस्ताव दिया गया है। बीजेपी को घेरने में पीछे नहीं हटी ममता एक कार्यक्रम के दौरान ममता बनर्जी ने बीजेपी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि नागरिकों को मताधिकार से वंचित करने और राज्य को कमजोर करने की साजिश की जा रही है। साथ ही चिंता जताते हुए कहा कि इससे राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि जनता भाजपा सरकार से संतुष्ट नहीं है और वह केंद्र में वापसी नहीं कर पाएगी।
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बकौल ममता, बनर्जी ने केंद्र सरकार पर सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों को कमजोर करने और चुनिंदा उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने का भी आरोप लगाया। वहीं भारतीय निर्वाचन आयोग पर निशाना साधते हुए उन्होंने चुनाव से पहले बड़े पैमाने पर अधिकारियों के तबादलों पर सवाल उठाए और कहा कि इससे प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। अपने बयान को और आक्रामक बनाते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में “अघोषित राष्ट्रपति शासन” जैसा माहौल बनाया जा रहा है। अंत में उन्होंने मतदाताओं से एकजुट होकर चुनाव लड़ने की अपील करते हुए इसे “देश को बचाने की बड़ी लड़ाई” बताया और भरोसा जताया कि बंगाल की जनता इसका मुंहतोड़ जवाब देंगी।
