
देवी उपासना में विधि और दिशा का विशेष महत्व बताया गया है। देवी पुराण के अनुसार, देवी की स्थापना कभी भी उत्तर दिशा की ओर मुख करके नहीं करनी चाहिए। श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया पूजन मनोकामनाओं की पूर्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। कामना के अनुसार पूजन सामग्री का चयन भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। वाहन की इच्छा रखने वाले श्रद्धालु देवी का पूजन गुलाब के पुष्पों से करें। विद्या की कामना करने वालों को सफेद पुष्प एवं श्वेत वस्तुओं से पूजा करनी चाहिए। विशेष रूप से मूल नक्षत्र में किया गया यह पूजन अत्यंत फलदार माना गया है।

धन-संपत्ति की प्राप्ति के लिए लाल पुष्प, विशेषकर गुड़हल और कमल से देवी का अर्चन करना लाभकारी है। जो साधक समस्त सुखों की कामना रखते हैं, उन्हें कमल पुष्प से देवी का पूजन करना चाहिए। वहीं विजय प्राप्ति हेतु अपराजिता के पुष्पों से आराधना करना श्रेष्ठ माना गया है।
ये भी पढ़ें
इसके अतिरिक्त, अपनी राशि के अनुसार देवी पूजन करने से भी विशेष फल की प्राप्ति होती है…
मेष: पूर्वमुखी देवी की स्थापना कर लाल वस्त्र धारण करें और गुड़हल पुष्प से पूजन करें।
वृष: पूर्वमुखी देवी की स्थापना कर गुलाबी वस्त्र पहनें और गुलाब पुष्प अर्पित करें।
मिथुन: पश्चिममुखी देवी की स्थापना कर विविध रंगों के वस्त्र धारण करें और केसर पुष्प से पूजन करें।
कर्क: पूर्वमुखी देवी का पूजन श्वेत वस्त्र एवं सफेद पुष्पों से करें, साथ ही दूध से बने पायस का भोग लगाएं।
सिंह: सिंदूरी वस्त्र धारण कर पूर्व दिशा की ओर मुख करके लाल पुष्पों से पूजन करें।
कन्या: पश्चिममुखी देवी की साधना करें और विभिन्न पुष्पों से पूजन करना श्रेष्ठ है।
तुला: दक्षिणमुखी देवी का पूजन गुलाबी वस्त्र धारण कर करें।
वृश्चिक: दक्षिणमुखी देवी की पूजा करें, आकाशी रंग के वस्त्र पहनें और गुलाब पुष्प अर्पित करें।
धनु: विविध रंगों के वस्त्र धारण कर दक्षिणमुखी देवी का पूजन करें।
मकर: पश्चिममुखी देवी की स्थापना कर द्विरंगी वस्त्र पहनें और शमी पत्र-पुष्प से पूजन करें।
कुंभ: पश्चिममुखी देवी का पूजन करें, श्याम वस्त्र धारण करें तथा कमल और शमी पत्र अर्पित करें।
मीन: पीले वस्त्र धारण कर दक्षिणमुखी देवी का पूजन पीले पुष्पों से करें।
श्रद्धा, नियम और आस्था के साथ किया गया यह पूजन न केवल जीवन में सुख-समृद्धि लाता है, बल्कि आध्यात्मिक शांति भी प्रदान करता है।
