- बाजार में मिलेंगी सिर्फ मांई जी की आकर्षित तस्वीरें
- मिट्टी और लकड़ी की प्रतिमाएं बनाने से बचते हैं कलाकार
हेमन्त कश्यप
जगदलपुर। आप देवी-देवताओं की विभिन्न प्रतिमाएं बाजार से खरीद सकते हैं, किंतु हजारों रूपये लेकर भी दंतेवाड़ा वाली माँ दंतेश्वरी की मूर्ति कहीं भी नहीं मिलेगी और न ही कोई कलाकार माता की प्रतिमा बनाकर आप को देगा। माँ दंतेश्वरी बस्तर की आराध्या के साथ साक्षात और जागृत माना जाता है, इसलिए यहां का कोई भी कारीगर मिट्टी, सीमेंट या लकड़ी से मांईजी की प्रतिमा बनाने की हिम्मत नहीं जुटा पाया है। पौराणिक मान्यता है कि माता सती का अधोदांत (नीचे का दांत) डंकनी और शंखनी नदी के संगम पर गिरा था, इसलिए हजारों वर्षों से यह स्थल मांई दंतेश्वरी शक्तिपीठ के नाम से चर्चित है।
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सुरक्षित है पुरानी मूर्ति
713 साल पहले जब पांडव अर्जुन कुल के वारंगल नरेश अन्नम देव अपनी जान बचाने वहां में भागे थे। तब उनके सलाहकारों ने उन्हें सुझाव दिया था कि बस्तर के वनांचल में डंकनी और शंखनी नदी के संगम में हजारों साल पुराना मां दंतेश्वरी का मंदिर है और मां दंतेश्वरी आप की कुलदेवी भी है इसलिए आप को वहीं जाना चाहिए। अन्नम देव ने ऐसा ही किया। वे बीजापुर होते हुए दंतेवला (दंतेवाड़ा) पहुंचे और इस जर्जर मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था। यह बात दंतेवाड़ा मंदिर में स्थापित शिलालेख में भी उल्लेखित है। अन्नम देव वर्ष 1313 में अपनी कुलदेवी की अष्टधातु की जो प्रतिमा लेकर बस्तर आये थे। यह मूर्ति आज भी राजबाड़ा स्थित मां दंतेश्वरी मंदिर में सुरक्षित है। तब से आज तक मांई दंतेश्वरी को पूरा बस्तर जागृत मानता है।
जागृत देवी की प्रतिमा बनाना कठिन
बाजार में माँ दुर्गा, सरस्वती, लक्ष्मी, गणेश, हनुमान, राम, कृष्ण आदि देवी-देवताओं की मूर्तियां धातु से लेकर लकड़ी में उकेरी हुई मिल जाएंगी, किंतु दंतेवाड़ा वाली माँ दंतेश्वरी की प्रतिमा की प्रतिमूर्ति यहां कोई नहीं बनाता। देऊरगांव के काष्ठ कारीगर रतिराम और घाटलोहंगा के शिल्पी गणेशराम बताते हैं कि माँ दंतेश्वरी की प्रतिमा बनाना मतलब जान जोखिम में डालना है। माँ दंतेश्वरी जागृत हैं, और जागृत देवी-देवताओं की प्रतिमा कैसे बनाई जा सकती है? इसलिए कहीं भी आपको दंतेवाड़ा वाली माँ दंतेश्वरी की प्रतिमा की प्रतिमूर्ति नहीं मिलेंगी और न ही कोई मूर्तिकार मिलेगा।
