मार्केट कैप यानी मार्केट कैपिटलाइजेशन किसी भी कंपनी के कुल बाजार मूल्य को दर्शाता है। इसे समझने का आसान तरीका यह है कि कंपनी के कुल जारी शेयरों की संख्या को उसके मौजूदा शेयर मूल्य से गुणा कर दिया जाए। जो आंकड़ा सामने आता है, वही उस कंपनी की मार्केट कैप कहलाता है। निवेशकों के लिए यह एक अहम पैमाना होता है, क्योंकि इससे कंपनी के आकार, मजबूती और जोखिम के स्तर का अंदाजा लगाया जा सकता है।
आमतौर पर बड़ी मार्केट कैप वाली कंपनियां अपेक्षाकृत स्थिर मानी जाती हैं। इनमें उतार-चढ़ाव कम होता है और लंबे समय के निवेशकों के लिए ये सुरक्षित विकल्प समझी जाती हैं। वहीं, छोटी मार्केट कैप वाली कंपनियों में तेजी से मुनाफा कमाने की संभावना तो होती है, लेकिन जोखिम भी ज्यादा रहता है।
पिछले सप्ताह शेयर बाजार में हल्की तेजी देखने को मिली। BSE Sensex में करीब 0.22% यानी 187.95 अंकों की बढ़त दर्ज की गई। इस दौरान देश की टॉप 10 वैल्यूएबल कंपनियों में से छह की कुल मार्केट कैप में ₹63,478.46 करोड़ का इजाफा हुआ।
प्रोटीन से भरपूर स्प्राउट्स सलाद: वेट लॉस के लिए सुपर हेल्दी और सिर्फ 2 मिनट में बनाएं
सबसे ज्यादा बढ़त Larsen & Toubro को मिली, जिसकी मार्केट कैप ₹28,523.31 करोड़ बढ़कर ₹6,02,552.24 करोड़ हो गई। इसके अलावा State Bank of India ने ₹16,015.12 करोड़ की बढ़त दर्ज की और उसकी कुल वैल्यू ₹11,22,581.56 करोड़ तक पहुंच गई।
HDFC Bank की मार्केट कैप ₹9,617.56 करोड़ बढ़कर ₹14,03,239.48 करोड़ हो गई। Life Insurance Corporation of India ने ₹5,977.12 करोड़ का इजाफा किया और उसकी वैल्यू ₹5,52,203.92 करोड़ हो गई। Bajaj Finance की मार्केट कैप ₹3,142.36 करोड़ बढ़कर ₹6,40,387 करोड़ हो गई, जबकि Reliance Industries ने ₹202.99 करोड़ की बढ़त के साथ ₹19,21,678.78 करोड़ का आंकड़ा छू लिया।
दूसरी ओर, कुछ दिग्गज कंपनियों को नुकसान भी झेलना पड़ा। Bharti Airtel की मार्केट कैप ₹15,338.66 करोड़ घटकर ₹11,27,705.37 करोड़ रह गई। ICICI Bank की वैल्यू ₹14,632.10 करोड़ घटकर ₹9,97,346.67 करोड़ पर आ गई। Infosys और Tata Consultancy Services में भी गिरावट दर्ज की गई।
मार्केट वैल्यू के आधार पर शीर्ष 10 कंपनियों की रैंकिंग में रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले स्थान पर रही, उसके बाद एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, एसबीआई और आईसीआईसीआई बैंक का स्थान रहा।
इन आंकड़ों से साफ है कि बाजार में मामूली तेजी के बावजूद सेक्टर आधारित उतार-चढ़ाव जारी है। निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे सिर्फ मार्केट कैप नहीं, बल्कि कंपनी के फंडामेंटल, ग्रोथ और जोखिम को भी ध्यान में रखें।
