बिहार के सुपौल जिले के एक प्रशिक्षण संस्थान में उस समय तनाव की स्थिति बन गई जब संस्थान के प्रिंसिपल के मोबाइल फोन से महिला शिक्षिकाओं की बड़ी संख्या में तस्वीरें मिलने का मामला सामने आया। घटना 20 फरवरी की दोपहर की बताई जा रही है। आरोप है कि प्रिंसिपल ड्यूटी के दौरान अपने मोबाइल में एक तस्वीर को ज़ूम कर देख रहे थे, तभी पास से गुजर रही एक शिक्षिका की नजर स्क्रीन पर पड़ी। स्क्रीन पर अपनी और अन्य महिला शिक्षिकाओं की तस्वीरें देखकर उन्होंने आपत्ति जताई। इसके बाद मामला तेजी से फैल गया और अन्य कर्मचारी भी मौके पर पहुंच गए। जब मोबाइल की गैलरी की जांच की गई तो कथित तौर पर दो महिला शिक्षिकाओं की अलग-अलग एंगल से ली गई करीब 150 तस्वीरें पाई गईं। इस खुलासे के बाद संस्थान परिसर में आक्रोश का माहौल बन गया।
शिक्षिकाओं ने कार्यस्थल की गरिमा और निजता के उल्लंघन का मुद्दा उठाया। काफी बहस और दबाव के बाद संबंधित तस्वीरें मोबाइल से डिलीट कर दी गईं। हालांकि, कर्मचारियों का कहना है कि केवल तस्वीरें हटाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। आरोपी प्रिंसिपल साजिद इकबाल कैफी ने मोबाइल में तस्वीरें होने की बात स्वीकार की, लेकिन उनका कहना है कि तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम से डाउनलोड की गई थीं। उनके इस स्पष्टीकरण से विवाद और गहरा गया, क्योंकि शिक्षिकाओं का दावा है कि तस्वीरें संस्थान परिसर में ली गई प्रतीत होती हैं।
ये भी पढ़ें
प्रयागराज में संत अविमुक्तेश्वरानंद पर गंभीर आरोप, पॉक्सो एक्ट में FIR दर्ज
नया लुक के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और प्रारंभिक जांच शुरू की। जिला प्रशासन ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। जिलाधिकारी सावन कुमार के निर्देश पर संबंधित अधिकारियों की टीम ने संस्थान पहुंचकर कर्मचारियों और प्रबंधन से पूछताछ की। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह घटना कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और निजता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। कर्मचारी संगठनों ने मांग की है कि जांच पारदर्शी ढंग से हो और यदि आरोप साबित होते हैं तो कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोहराई न जाएं।
