भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के बाद 9 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मतदाता सूचियों में बड़ा बदलाव सामने आया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अंतिम प्रकाशन के बाद कुल 1.70 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं।
SIR प्रक्रिया 27 अक्टूबर से शुरू हुई थी। उस समय संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 21.45 करोड़ पंजीकृत मतदाता थे। संशोधित और सत्यापित सूची जारी होने के बाद यह संख्या घटकर 19.75 करोड़ रह गई है। निर्वाचन आयोग का कहना है कि यह ‘नेट चेंज’ है, जिसमें अपात्र मतदाताओं के नाम हटाने के साथ-साथ नए पात्र मतदाताओं को जोड़ने की प्रक्रिया भी शामिल है।
आंकड़ों के अनुसार, गुजरात में सबसे अधिक कटौती दर्ज की गई है। यहां 68 लाख से अधिक नाम सूची से हटे, जिससे कुल मतदाता संख्या में लगभग 13 प्रतिशत से ज्यादा की कमी आई। इसके बाद Madhya Pradesh में 34 लाख से अधिक, Rajasthan में करीब 31 लाख और Chhattisgarh में लगभग 25 लाख नाम कम हुए हैं।
दक्षिण भारत में Kerala में लगभग 9 लाख और Goa में 1 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए। वहीं केंद्र शासित प्रदेशों में भारत और निकोबार द्वीप समूह, पुडुचेरी और लक्षद्वीप में भी संशोधन दर्ज किया गया है।
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निर्वाचन अधिकारियों का कहना है कि पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाना है। इसमें मृत, स्थानांतरित या अन्य कारणों से अपात्र व्यक्तियों के नाम हटाए जाते हैं। साथ ही, नए पात्र नागरिकों को जोड़ने की प्रक्रिया निरंतर जारी रहती है।
आयोग ने बताया कि SIR अभियान अभी 12 अन्य राज्यों में भी चल रहा है। आने वाले महीनों में अन्य राज्यों के आंकड़े भी जारी किए जाएंगे। आयोग ने नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी का नाम गलती से हट गया हो या सुधार की आवश्यकता हो, तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन किया जा सकता है।
यह व्यापक संशोधन चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाए रखने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।
