राजधानी लखनऊ में शनिवार को यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ सवर्ण समाज के बैनर तले बड़ा प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित नियम भेदभावपूर्ण हैं और समाज के एक वर्ग को संस्थागत सुरक्षा से बाहर कर सकते हैं। परिवर्तन चौक से शुरू हुए इस विरोध मार्च में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और “काला कानून वापस लो” जैसे नारे लगाए गए।
स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ अतिरिक्त बल और आरएएफ की तैनाती की गई। प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग और ट्रैफिक डायवर्जन लागू रहा, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।
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विवादित प्रावधानों को लेकर मामला पहले ही सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। शीर्ष अदालत ने प्रारंभिक सुनवाई में नियम के कुछ हिस्सों पर अंतरिम रोक लगाते हुए केंद्र सरकार और यूजीसी से जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया नियमों की परिभाषा सीमित और अस्पष्ट प्रतीत होती है, जिसके व्यापक प्रभाव हो सकते हैं।
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि नए नियमों में जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा केवल एससी, एसटी और ओबीसी समुदाय तक सीमित कर दी गई है, जिससे अन्य वर्गों को संस्थागत संरक्षण से वंचित किया जा सकता है। अदालत ने फिलहाल 2012 के पूर्ववर्ती विनियमों को बहाल रखने का निर्देश दिया है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक नियम पूरी तरह वापस नहीं लिए जाते, आंदोलन जारी रहेगा। वहीं प्रशासन का दावा है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और शहर में शांति बनी हुई है।
