वर्तमान समय में चांदी ने निवेशकों का ध्यान तेजी से अपनी ओर खींचा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता, कमजोर डॉलर और बढ़ती औद्योगिक मांग के चलते चांदी की कीमतें लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। MCX पर चांदी का रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचना इस बात का संकेत है कि निवेशक इसे सुरक्षित और लाभदायक विकल्प के रूप में देख रहे हैं।
ग्लोबल मार्केट में चांदी करीब 115 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रही है। वहीं, भारत में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर मार्च 2026 एक्सपायरी वाली चांदी वायदा कीमतें 3.83 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गईं। यह तेजी केवल तकनीकी कारणों से नहीं, बल्कि मजबूत बुनियादी कारकों से प्रेरित है। इस रैली का सबसे अहम कारण चीन की बढ़ती मांग मानी जा रही है। चीन में खुदरा निवेशकों के बीच चांदी में निवेश का क्रेज बढ़ा है। स्थिति यह रही कि एक सिल्वर फंड को अत्यधिक मांग के चलते कुछ समय के लिए ट्रेडिंग रोकनी पड़ी। फंड का प्रीमियम NAV से काफी ऊपर चला गया था, जो असामान्य मांग को दर्शाता है।
इसके साथ ही चीन के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। ज्वेलरी की तुलना में अब 1 किलो के सिल्वर बार की मांग ज्यादा बढ़ रही है। यह दर्शाता है कि निवेश के उद्देश्य से चांदी की खरीदारी मजबूत हो रही है और यह ट्रेंड आगे भी जारी रह सकता है। डॉलर की कमजोरी ने भी इस तेजी को मजबूती दी है। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स करीब चार साल के निचले स्तर पर है। आमतौर पर डॉलर कमजोर होने पर कीमती धातुओं की कीमतें बढ़ती हैं, क्योंकि निवेशक मुद्रा जोखिम से बचने के लिए धातुओं का रुख करते हैं।
इसके अलावा, औद्योगिक मांग भी चांदी की कीमतों को सपोर्ट कर रही है। सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और मेडिकल उपकरणों में चांदी का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। औद्योगिक खपत के कारण चांदी अब सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि रणनीतिक धातु बनती जा रही है। MCX पर कारोबारी दिन के दौरान चांदी ने 3,64,821 रुपये से शुरुआत कर 3,83,100 रुपये का उच्च स्तर छुआ। यह उछाल दर्शाता है कि बाजार में मजबूत खरीदारी बनी हुई है।
विश्लेषकों का मानना है कि अगर वैश्विक अनिश्चितता और डॉलर पर दबाव बना रहता है, तो चांदी की कीमतों में आगे भी मजबूती देखने को मिल सकती है। हालांकि, निवेशकों को ऊंचे स्तर पर सावधानी के साथ रणनीति बनाने की सलाह दी जाती है।
