सेना दिवस: 15 जनवरी को मनाए जाने वाले भारतीय सेना दिवस ने एक बार फिर देश को अपने वीर जवानों के बलिदान और साहस की याद दिलाई। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित देश के शीर्ष नेतृत्व ने भारतीय सेना की भूमिका को राष्ट्र की सुरक्षा की मजबूत दीवार बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय सेना न केवल सीमाओं की रक्षा करती है, बल्कि कठिन हालात में देश की आत्मा को भी मजबूत बनाए रखती है। सैनिकों की निस्वार्थ सेवा और कर्तव्यनिष्ठा हर नागरिक के मन में सुरक्षा और विश्वास का भाव भरती है। उन्होंने शहीदों को स्मरण करते हुए कहा कि उनका बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि भारतीय सेना का “राष्ट्र प्रथम” का सिद्धांत ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि चाहे सीमा पर तनाव हो या प्राकृतिक आपदा, सेना हर स्थिति में देशवासियों के साथ खड़ी रहती है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सेना को वैश्विक स्तर पर सम्मान दिलाने वाली शक्ति बताया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, अनुशासन और मानवीय दृष्टिकोण के साथ भारतीय सेना आज दुनिया की सर्वश्रेष्ठ सेनाओं में शामिल है।
उपराष्ट्रपति, गृह मंत्री और अन्य नेताओं ने भी सेना के शौर्य को देश की अमूल्य धरोहर बताया। विपक्षी दलों ने भी राजनीति से ऊपर उठकर सैनिकों के प्रति सम्मान व्यक्त किया, जिससे यह संदेश गया कि सेना देश की साझा आस्था है।
सेना दिवस का ऐतिहासिक महत्व भी उतना ही बड़ा है। 15 जनवरी 1949 को के.एम. करियाप्पा के सेना प्रमुख बनने के साथ ही भारतीय सेना को स्वदेशी नेतृत्व मिला, जिसने सेना को नई दिशा दी।
आज सेना दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि संकल्प का दिन है—देश की सुरक्षा, सम्मान और एकता को बनाए रखने का संकल्प।
