‘प्रगति’ नए भारत की कार्यसंस्कृति का प्रतीक : योगी आदित्यनाथ

Yogi
  • इंटेंट, टेक्नोलॉजी और अकाउंटेबिलिटी के समन्वय से सुनिश्चित हो रहे हैं ठोस परिणाम
  • प्रगति मॉडल से उत्तर प्रदेश बना देश का इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ इंजन: मुख्यमंत्री
  • इंटर-एजेंसी बाधाएँ समाप्त, अनुमतियों और मंजूरियों में आई तेजी
  • बॉटलनेक स्टेट से ब्रेकथ्रू स्टेट बना उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री
  • यूपी में 39% परियोजनाएँ पूरी, 202 परियोजनाएँ समयबद्ध प्रगति पर

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन (प्रगति) केवल बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा का मंच नहीं, बल्कि नए भारत की नई कार्यसंस्कृति का सशक्त उदाहरण है। मंगलवार को आयोजित विशेष प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘प्रगति’ उस प्रशासनिक मॉडल को दर्शाता है, जिसकी नींव आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए रखी और 2014 के बाद इसे राष्ट्रीय स्तर पर सुदृढ़ किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति ने यह सिद्ध किया है कि जब इंटेंट, टेक्नोलॉजी और अकाउंटेबिलिटी एक साथ आती हैं, तो आउटकम अपने आप सुनिश्चित हो जाते हैं। डिजिटल गवर्नेंस और कोऑपरेटिव फेडरलिज्म को मजबूती देते हुए प्रगति एक ऐसा प्लेटफॉर्म बना है, जहां अंतर-मंत्रालयीय और अंतर-विभागीय समन्वय के माध्यम से जटिल समस्याओं का समयबद्ध समाधान संभव हुआ है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रगति मॉडल की अवधारणा वर्ष 2003 में गुजरात में ‘स्वागत’ (स्टेट वाइड अटेंशन ऑन ग्रीवांसेज बाई एप्लिकेशन ऑफ टेक्नोलॉजी) के रूप में प्रारंभ हुई थी, जिसका उद्देश्य नागरिक शिकायतों के निवारण में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना था। यही मॉडल आगे चलकर ‘प्रगति’ के राष्ट्रीय स्वरूप के रूप में विकसित हुआ, जिसने मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं, सामाजिक योजनाओं और सिस्टम रिफॉर्म के क्षेत्र में टीम इंडिया अप्रोच को मजबूती प्रदान की। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति केवल एक रिव्यू मैकेनिज्म नहीं, बल्कि गवर्नेंस रिफॉर्म है। इसने शासन को फाइल-केंद्रित संस्कृति से फील्ड-आधारित परिणामों की दिशा में अग्रसर किया है। इसके माध्यम से निर्णय प्रक्रिया तेज हुई है, समय और लागत की बर्बादी रुकी है तथा केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय के साथ-साथ स्पष्ट जवाबदेही सुनिश्चित हुई है। राष्ट्रीय स्तर पर प्रगति के प्रभाव का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि इसके माध्यम से ₹86 लाख करोड़ से अधिक की परियोजनाओं को गति मिली है। इनमें से 377 प्रमुख परियोजनाओं की प्रत्यक्ष समीक्षा प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है, जबकि 3162 में से 2958 मुद्दों का समाधान किया जा चुका है, जो शासन की विश्वसनीयता को दर्शाता है।

उत्तर प्रदेश के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति मॉडल राज्य के लिए एक गेम-चेंजर सिद्ध हुआ है। उत्तर प्रदेश आज देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ इंजन के रूप में उभरा है। एक्सप्रेस-वे नेटवर्क, देश का सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क, सर्वाधिक शहरों में मेट्रो और एयर कनेक्टिविटी, देश की पहली रैपिड रेल, अंतर्देशीय जलमार्ग और रोपवे जैसे प्रोजेक्ट समयबद्ध ढंग से आगे बढ़े हैं, जिनके पीछे निरंतर समीक्षा और समस्या-समाधान का प्रभावी मंच प्रगति रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश के पास ₹10.48 लाख करोड़ की 330 परियोजनाओं के साथ देश का सबसे बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर पोर्टफोलियो है। इनमें परिवहन, ऊर्जा, शहरी विकास, स्वास्थ्य और औद्योगिक विकास से जुड़े प्रमुख प्रोजेक्ट शामिल हैं। इनमें से ₹2.37 लाख करोड़ की लागत की 128 परियोजनाएं (39%) पहले ही पूर्ण होकर कमीशन हो चुकी हैं, जबकि ₹8.11 लाख करोड़ की 202 परियोजनाएं निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्रगति पर हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की मंशा के अनुरूप गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करते हुए सभी अड़चनों का समाधान कर परियोजनाओं को तेज़ी से आगे बढ़ाया जा रहा है, और इसमें ‘प्रगति’ एक सशक्त आधार बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति मॉडल ने उत्तर प्रदेश को रेलवे, हाईवे और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रतिस्पर्धा के इस दौर में यदि परियोजनाओं, एमओयू और अनुमतियों में देरी होती है तो निवेशक दूसरे राज्यों की ओर रुख करता है। प्रगति ने वर्षों में होने वाली प्रक्रियाओं को महीनों और महीनों की प्रक्रियाओं को दिनों में समेटते हुए परियोजनाओं को तय समय-सीमा में धरातल पर उतारने का सशक्त माध्यम प्रदान किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में ₹4.19 लाख करोड़ की लागत के 65 बड़े प्रोजेक्ट प्रगति के अंतर्गत शामिल हैं। इनमें से 26 परियोजनाएँ पूरी होकर कमीशन हो चुकी हैं, जबकि 39 परियोजनाएँ निर्माण के विभिन्न चरणों में प्रगति पर हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति पोर्टल के माध्यम से प्रदेश में इंटर-एजेंसी बाधाओं का प्रभावी समाधान हुआ है। राजस्व, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, वन, नगर विकास, पंचायती राज सहित सभी संबंधित विभाग एक ही मंच पर बैठकर समयबद्ध समाधान सुनिश्चित कर रहे हैं। इससे हाईवे, रेलवे, पावर और टेलीकॉम जैसी परियोजनाओं में तेज़ प्रगति संभव हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रक्रिया सुशासन का एक प्रभावी मॉडल बनकर उभरी है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 515 मुद्दों में से 494 का समाधान (96%) किया गया है। वहीं, प्रगति के अंतर्गत 287 मुद्दों में से 278 मुद्दों का समाधान (97%) सुनिश्चित किया गया है। यह उच्च समाधान दर प्रशासनिक तत्परता, स्पष्ट जवाबदेही और निर्णायक नेतृत्व की क्षमता को दर्शाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति जैसे तकनीक-आधारित प्लेटफॉर्म के कारण उत्तर प्रदेश आज बॉटलनेक स्टेट से ब्रेकथ्रू स्टेट में परिवर्तित हो चुका है। राज्य सरकार अब केवल फैसिलिटेटर नहीं, बल्कि एक्सेलेरेटर की भूमिका में परियोजनाओं को गति दे रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति ने टीम इंडिया स्पिरिट को और सशक्त किया है। केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वय से अब समस्या पर नहीं, बल्कि समाधान पर चर्चा होती है। वर्ष 2014 से पहले जहां परियोजनाएं स्वीकृत तो होती थीं लेकिन पूरी नहीं हो पाती थीं, आज हर परियोजना के शिलान्यास के साथ उसकी पूर्णता की समय-सीमा तय होती है और उसकी नियमित समीक्षा सुनिश्चित की जाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि समयबद्ध परियोजनाएं रोजगार सृजन के साथ-साथ विकास की गति को भी तेज़ करती हैं और इसके लिए उन्होंने प्रदेशवासियों की ओर से आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी विजन के प्रति आभार व्यक्त किया।

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