भ्रष्टाचार पर डीएम की सख्ती के बाद महराजगंज में डीपीआरओ की बड़ी कार्रवाई

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  • भ्रष्टाचार और गंभीर वित्तीय अनियमितता के आरोप में ग्राम पंचायत सचिव सस्पेंड

उमेश चन्द्र त्रिपाठी

महराजगंज! महराजगंज के ग्राम पंचायत बकैनिया हरैया में वित्तीय अनियमितताओं के मामले में प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। मनरेगा और प्रधानमंत्री आवास योजना में गड़बड़ी के आरोपों में ग्राम पंचायत सचिव को निलंबित किया गया है। जांच में 6.10 लाख रुपये की अनियमितता सामने आई।

महराजगंज जनपद के विकास खण्ड
लक्ष्मीपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत बकैनिया हरैया में वित्तीय अनियमितताओं के मामले में प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है। ग्राम पंचायत के सचिव अश्वनी पटेल को भ्रष्टाचार व गंभीर वित्तीय गड़बड़ी का दोषी पाए जाने पर निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि में उन्हें एडीओ परतावल कार्यालय से अटैच किया गया है।

मिली जानकारी के मुताबिक यह कार्रवाई शिकायतकर्ता जगत प्रसाद पुत्र रामदास, निवासी ग्राम पंचायत बकैनिया हरैया द्वारा 14 अक्टूबर 2025 को की गई शिकायत के आधार पर की गई। शिकायत में ग्राम पंचायत में वित्तीय वर्ष 2021 से अब तक मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण एवं केन्द्रीय वित्त आयोग के अंतर्गत बड़े पैमाने पर धांधली व भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए आदेश संख्या 1/524942/2025 17-10-2025 के तहत परियोजना निदेशक, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण, महराजगंज एवं अधिशासी अभियंता, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, महराजगंज को संयुक्त रूप से स्थलीय एवं अभिलेखीय जांच के निर्देश दिए गए। जांच के उपरांत परियोजना निदेशक द्वारा पत्र संख्या 1069 दिनांक 21-11-2025 के माध्यम से संयुक्त जांच आख्या प्रस्तुत की गई।

जांच आख्या में ग्राम पंचायत बकैनिया हरैया में मनरेगा एवं केन्द्रीय वित्त आयोग के अंतर्गत कुल 6,10,684 रुपये (छह लाख दस हजार छह सौ चौरासी रुपये) की वित्तीय अनियमितता सामने आई। जांच अधिकारियों ने इस अनियमितता के लिए ग्राम प्रधान एवं सचिव को जिम्मेदार ठहराया।

इसके बाद कार्यालय पत्र संख्या 3490 27 नवम्बर 2025 के माध्यम से सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। सचिव द्वारा 17 दिसंबर 2025 को प्रस्तुत स्पष्टीकरण तथा ग्राम प्रधान के जवाब का परीक्षण किया गया, लेकिन जांच अधिकारी की रिपोर्ट के अनुसार प्रस्तुत साक्ष्य संतोषजनक नहीं पाए गए।

प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के अंतर्गत किए गए सत्यापन में 22 आवासों की जांच की गई, जिसमें 03 लाभार्थी अपात्र पाए गए। इनमें से एक प्रकरण में लाभार्थी के पूर्व से पक्के मकान में निवासरत होने के स्पष्ट साक्ष्य मिले, जिससे आरोपों की पुष्टि हुई।

जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा के आदेश पर जिला पंचायत राज अधिकारी श्रेया मिश्रा ने सचिव अश्वनी पटेल को दोषी मानते हुए निलंबन की कार्रवाई की। इस कार्रवाई से ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार के विरुद्ध प्रशासन के सख्त रुख का स्पष्ट संदेश गया है।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, मामले में आगे वसूली एवं विभागीय कार्यवाही भी की जा सकती है।

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