प्रह्लाद जोशी ने उपभोक्ता सुरक्षा बढ़ाने के लिए अगरबत्ती के लिए नया BIS स्टैंडर्ड किया जारी

नई दिल्‍ली। केंद्रीय उपभोक्ता, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी ने उपभोक्ता सुरक्षा और उत्पाद गुणवत्ता बढ़ाने को अगरबत्तियों के लिए भारतीय मानक ब्यूरो का नया मानक जारी किया। उपभोक्‍ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी एक बयान में बताया कि प्रल्हाद जोशी ने अगरबत्ती के लिए एक नया इंडियन स्टैंडर्ड नई दिल्‍ली के भारत मंडपम में नेशनल कंज्यूमर डे-2025 के मौके पर भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) का भारतीय मानक आईएस 19412:2025 जारी किया। मंत्रालय ने कहा कि अगरबत्ती के लिए जारी आईएस 19412:2025 स्पेसिफिकेशन नाम का यह स्टैंडर्ड भारतीय मानक ब्यूरो ने विकसित किया है, जिसका मकसद कंज्यूमर सेफ्टी, घर के अंदर की हवा की क्वालिटी और प्रोडक्ट की क्वालिटी को बेहतर बनाना है।

उपभोक्‍ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के मुताबिक नए अधिसूचित मानक में अगरबत्तियों में कुछ कीटनाशक रसायनों और कृत्रिम सुगंधित पदार्थों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है, जो मानव स्वास्थ्य, घर के अंदर की वायु गुणवत्ता और पर्यावरण के लिए हानिकारक हो सकते हैं। इसके लिए भारतीय मानक आईएस 19412:2025 में अगरबत्तियों में उपयोग के लिए प्रतिबंधित पदार्थों की सूची दी गई है। इसमें एलेथ्रिन, परमेथ्रिन, साइपरमेथ्रिन, डेल्टामेथ्रिन और फिप्रोनिल जैसे कुछ कीटनाशक रसायन , साथ ही बेंजाइल साइनाइड, एथिल एक्रिलेट और डाइफेनिलामाइन जैसे कृत्रिम सुगंधित पदार्थ शामिल हैं। इनमें से कई पदार्थ मानव स्वास्थ्य, घर के अंदर की वायु गुणवत्ता और पारिस्थितिकी की सुरक्षा पर संभावित प्रभाव के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित हैं।

इस मानक के अनुरूप उत्पाद BIS मानक चिह्न प्राप्त करने के पात्र होंगे, जिससे उपभोक्ता सोच-समझकर निर्णय ले सकेंगे। अगरबंती के लिए जारी आईएस 19412:2025 की अधिसूचना से उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ने, नैतिक और टिकाऊ विनिर्माण प्रक्रियाओं को बढ़ावा मिलने, पारंपरिक आजीविका की रक्षा होने और भारतीय अगरबत्ती उत्पादों की वैश्विक बाजार तक पहुंच बढ़ने की उम्मीद है। यह मानक BIS की सुगंध एवं स्वाद अनुभागीय समिति (पीसीडी 18) द्वारा हितधारक परामर्श के माध्यम से तैयार किया गया है। उल्‍लेखनीय है कि भारत विश्व में अगरबत्ती का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक है। इस उद्योग का वार्षिक अनुमानित मूल्य करीब 8,000 करोड़ रुपये है। इसमें लगभग 1,200 करोड़ रुपये का निर्यात 150 से अधिक देशों को किया जाता है। यह क्षेत्र कारीगरों, लघु एवं मध्यम उद्यमों और सूक्ष्म उद्यमियों के एक बड़े समूह विशेष रूप से महिलाओं के लिए ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में, रोजगार के महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।(हिन्दुस्थान समाचार)

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