लखनऊ: उत्तर प्रदेश में सड़कों और शहरी इलाकों में बढ़ती आवारा पशुओं और आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। आमजन की सुरक्षा, सड़क दुर्घटनाओं में कमी और पशु कल्याण को ध्यान में रखते हुए नगर विकास विभाग ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि यदि आवारा पशुओं और कुत्तों के प्रबंधन में किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों और प्रमुख सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए एनएचएआई और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को 24 घंटे निगरानी व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत राजमार्गों पर गश्ती दल तैनात किए जाएंगे, जो लगातार निरीक्षण करेंगे और आवारा पशुओं की मौजूदगी पर तत्काल कार्रवाई करेंगे। साथ ही, दुर्घटना या आवारा पशुओं की सूचना देने के लिए प्रमुख स्थानों पर हेल्पलाइन नंबर प्रदर्शित करना अनिवार्य किया गया है।
निर्देशों में यह भी कहा गया है कि किसी दुर्घटना या गंभीर चूक की स्थिति में संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जाएगी। इस संबंध में मुख्य सचिव और एनएचएआई के अध्यक्ष द्वारा सीधे निगरानी की जाएगी, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि आदेशों का कड़ाई से पालन हो।
आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। सभी स्थानीय निकायों को सरकारी व निजी शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, खेल परिसरों, बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों जैसे संस्थागत क्षेत्रों की पहचान करने को कहा गया है। इन क्षेत्रों में हर तीन महीने में कम से कम एक बार निरीक्षण अनिवार्य होगा, ताकि वहां आवारा कुत्तों का स्थायी ठिकाना न बन सके।
यदि किसी संस्थागत परिसर में आवारा कुत्ते पाए जाते हैं, तो उन्हें तुरंत वहां से हटाकर नसबंदी और टीकाकरण कराया जाएगा। इसके बाद ऐसे कुत्तों को पशु आश्रय स्थलों में भेजा जाएगा और दोबारा उसी परिसर में छोड़ने की अनुमति नहीं होगी। सरकार का मानना है कि इससे काटने की घटनाओं और संक्रमण के मामलों में कमी आएगी।
इसके अलावा भारतीय पशु कल्याण बोर्ड को निर्देश दिए गए हैं कि वह संस्थागत परिसरों में कुत्तों के काटने की घटनाओं की रोकथाम और प्रबंधन के लिए विस्तृत गाइडलाइन जारी करे। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया है कि सभी सरकारी अस्पतालों में एंटी-रेबीज वैक्सीन और इम्यूनोग्लोबिन की पर्याप्त उपलब्धता रहे, ताकि पीड़ितों को समय पर इलाज मिल सके।
