मत्स्य द्वादशी आज है जानिए पूजा विधि और शुभ तिथि व महत्व

राजेन्द्र गुप्ता

मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष के द्वादशी को मनाया जाने वाला यह मत्स्य द्वादशी का पर्व अत्यंत पावन माना जाता है इस दिन श्रद्धापूर्वक पूजा करने से घर परिवार में सुख शांति आती है और संकट दूर होते हैंकहा जाता है कि भगवान विष्णु मत्स्य का रूप धारण करके दैत्य हयग्रीव से चारों वेदो को वापस लिया था। इस दिन भगवान विष्णु के मत्स्य रूप की पूजा करने से उनकी कृपा भक्ति पर बनी रहती है और सुख-समृद्धि, पुण्य की प्राप्ति होती है, कहां जाता है की धरती पर जब भी पाप बढ़ेगा तो भगवान विष्णु समस्त मानव जाति के कल्याण के लिए अवतार लेते रहेंगे।

मत्स्य द्वादशी पर्व कब है?

इस साल मत्स्य द्वादशी पर्व मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष के द्वादशी तिथि यानी की दो दिसंबर 2025 को मंगलवार के दिन मनाई जाएगी, मत्स्य द्वादशी की पूजा एक दिसंबर 2025 के 7:01PM से शुरू होकर दो दिसंबर 2025 को 3:57 p.m में समाप्त यानी कि पारण होगी।

मत्स्य द्वादशी पूजा विधि

मत्स्य द्वादशी की रस्में भोर में शुद्धि स्नान से शुरू होती हैं। स्वयं को शुद्ध करने के बाद, भक्त भगवान विष्णु के मत्स्य रूप की पूजा के लिए एक वेदी स्थापित करते हैं। पूजा की चरण-दर-चरण विधि इस प्रकार है।

  • एक साफ मंच पर पीला कपड़ा बिछाएं।
  • वेदी पर भगवान मत्स्य की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
  • पीले फूल, फल, धूपबत्ती, दीप, चंदन, सिंदूर और पवित्र भोजन (प्रसाद) चढ़ाएं।
  • भगवान विष्णु को समर्पित मंत्रों का पाठ करें और आशीर्वाद के लिए मत्स्य अवतार स्तुति मंत्र का जाप करें।
  • भगवान विष्णु का ध्यान करें और उनकी दिव्य सुरक्षा और ज्ञान की कामना करें।
  • मत्स्य द्वादशी का व्रत भी अत्यंत शुभ माना जाता है, जो भगवान विष्णु के प्रति भक्ति और समर्पण का प्रतीक है।

मत्स्य द्वादशी: महत्व

मत्स्य द्वादशी पर दान का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन दान करने से कष्टों से मुक्ति मिलती है और कर्म संतुलन में सुधार होता है। मत्स्य अवतार भगवान विष्णु के सबसे प्रारंभिक और सबसे महत्वपूर्ण अवतारों में से एक है। प्राचीन पौराणिक कथाओं के अनुसार, हयग्रीव नामक एक राक्षस ने ब्रह्मा से पवित्र वेदों को चुराकर उन्हें समुद्र की गहराइयों में छिपा दिया था, जिससे संसार अंधकार और अज्ञान में डूब गया था। ब्रह्मांड के संतुलन को बहाल करने के लिए, भगवान विष्णु ने एक शक्तिशाली मत्स्य का रूप धारण किया और समुद्र में अवतरित हुए। इस अवतार में, उन्होंने हयग्रीव का वध किया, वेदों को पुनः प्राप्त किया और उन्हें ब्रह्मा को लौटा दिया। यह कार्य ज्ञान के संरक्षण, धर्म की पुनर्स्थापना और सृष्टि की रक्षा का प्रतीक है। मत्स्य अवतार की कथा भगवद् गीता, महाभारत और विष्णु पुराण सहित कई हिंदू धर्मग्रंथों में विस्तार से वर्णित है। यह अज्ञानता पर विजय पाने और विश्व में व्यवस्था बहाल करने में ईश्वरीय हस्तक्षेप के महत्व पर बल देती है। मत्स्य द्वादशी न केवल भगवान विष्णु के प्रथम अवतार के सम्मान का दिन है, बल्कि ज्ञान और अज्ञान के बीच शाश्वत संघर्ष की याद भी दिलाता है। उपवास, पूजा और दान-पुण्य के माध्यम से, भक्त ईश्वर से जुड़ सकते हैं और आध्यात्मिक विकास की प्राप्ति कर सकते हैं।

Purvanchal Religion

भागवत कथा: श्रवण से पापों का नाश, जीवन में जागृत होता है भक्ति और वैराग्य

सेखुआनी बाज़ार में श्रीमदभागवत कथा हुई पूर्ण, 10 दिनों तक बही ज्ञान की गंगा महराजगंज। जिले के सेखुआनी बाज़ार में लगातार 10 दिनों तक श्रीमद्भागवत महापुराण की कथा हुई। कथा वाचक पं. आनंद भारद्वाज के सुमधुर कंठ से निकली ज्ञान गंगा में भक्तों ने जमकर डुबकी लगाई और भगवदकथा का आनंद लिया। पं. गंगाराम दुबे […]

Read More
Health homeslider

फैटी लिवर से बचना है तो आज ही शुरू करें ये 3 सब्जियां, एक्सपर्ट की सलाह

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और खराब खान-पान के चलते लिवर से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में सही डाइट अपनाना बेहद जरूरी हो जाता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, कुछ खास सब्जियां लिवर को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाती हैं। AIIMS के डॉक्टर डॉ. सौरभ सेठी ने हाल ही में एक […]

Read More
Crime News homeslider Uttar Pradesh

कानपुर गैंगरेप केस: आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद वायरल फोटो से सियासत तेज

कानपुर।  शहर में 16 साल की नाबालिग के साथ गेस्ट हाउस में हुए गैंगरेप के मामले ने तूल पकड़ लिया है। पुलिस ने इस जघन्य अपराध में शामिल तीनों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन अब मामला सियासी रंग लेता दिख रहा है। दरअसल, सोशल मीडिया पर आरोपियों की कुछ तस्वीरें वायरल हो […]

Read More