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बेहद बदतमीज मूर्ख और कुछ भी बोलने और टीवी पर ही लड़ने वाले प्रवक्ताओं ने RJD यानी तेजस्वी को हराया है। अखिलेश यादव को हरवाया है और पूरी कांग्रेस पार्टी को हरवाने में इन जैसे मूर्ख का बहुत बड़ा हाथ है। तेजस्वी यादव की हार में इन दोनों महिलाओं का योगदान सबसे ज्यादा है। पार्टी का प्रवक्ता पार्टी का प्रतिबिंब होता है। उसके पास तथ्य होने चाहिए। उसके पास तर्क होने चाहिए। उसके पास फैक्ट होने चाहिए।
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उसके पास अपनी बात रखने का एक सौम्य शालीन और सुशील तरीका होना चाहिए। सिर्फ चीखने चिल्लाने से, लड़ाई करने से, हाथ हिलाने से, कमर मटकाने से, मुंह चोन्हियाने से आपको ये भले लगे कि मैंने सामने वाले को बोलने नहीं दिया तो यह आपकी भूल है। पार्टी प्रवक्ता का काम यह नहीं है। पार्टी प्रवक्ता का काम यह होता है कि वह जनता के मन में अपनी पार्टी की शानदार इमेज बनाएं। लेकिन इन दोनों महिलाओं के पास ना कोई तथ्य होते हैं ना कोई तर्क ना कोई जानकारी। यह सिर्फ चिखती है चिल्लाती है लड़ती हैं हल्ला करती हैं या तो एंकर से लड़ेंगी या दूसरे पार्टी के प्रवक्ताओं से लड़ाई करेंगी।
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लेकिन इन दोनों प्रवक्ताओं ने राष्ट्रीय जनता दल पार्टी की छवि जंगल राज वाली एक छिछोरे पार्टी की ही बनाई। ऐसा ही हाल कांग्रेस की सुप्रिया श्रीनेत, रागिनी नायक पवन खेड़ा का है। RJD यानी तेजस्वी यादव की दुर्दशा इन दो महिलाओं ने की है यही दुर्दशा यूपी के चुनाव में हरियाली तोता भदोरिया ने की थी ओर अखिलेश की जबरदस्त हार हुई थी। यही काम कांग्रेस के लिए सुप्रिया श्रीनेत पवन खेड़ा करते आए हैं।
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याद करिए आम आदमी पार्टी की हार में उनके प्रवक्ताओं का कितना बड़ा रोल रहा है जो टीवी पर लगातार बेशर्मी से झूठ बोल रहे थे। उद्धव ठाकरे की हार में सबसे बड़ा हाथ संजय राउत का था। तेजस्वी यादव ने अपने अच्छे प्रवक्ताओं को हटाकर जेएनयू के बदतमीज देशद्रोही और गद्दार प्रवक्ताओं को जब से टीवी पर बैठाना शुरू किया था, उनकी जंगल राज की याद लोगों के मन में जीवंत हो उठी थी। विपक्ष की हार में प्रवक्ताओं का बड़ा हाथ है। जनसुराज का सुपड़ा खुद पीके के बड़बोलेपन ने साफ किया।
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