‘वन स्टेप फ्रंटफुट, टू-स्टेप बैकफ़ुट’- ऑपरेशन सिंदूर और मीडिया का विद्रूप चेहरा

                  भौमेंद्र शुक्ल
  • ट्रम्प की चौधराहट से बैकफुट पर पहुंचा हिंदुस्तान, लेकिन पाकिस्तान को घर में घुसकर सिखाया सबक
  • बरसों तक जनता का तंज सहने को मजबूर हो गया मीडिया, खबरें ऐसी चलाईं जैसे बार्डर पर खुद कर रहे थे बमबारी

लेनिन ने अपनी पुस्तक में एक थ्योरी दी है ‘वन स्टेप फारवर्ड और टू-स्टेप बैकवर्ड’। अगर क्रिकेट की भाषा में कहा जाए तो कभी-कभी बैटिंग करने वाला खिलाड़ी फ्रंटफुट पर खेलते-खेलते यकबयक बैकफ़ुट पर आ जाता है और बैकफ़ुट पर बल्ला घुमाते-घुमाते ‘एक-दो’ रन लेने को मजबूर हो जाता है। तीन-चार ओवरों तक जब वह बैकफ़ुट खेलता है तो विरोधी पक्ष के बॉलर को लगता है कि मैंने इसकी हजामत बना दी। लेकिन वही बैकफ़ुट पर बैटिंग करने वाला खिलाड़ी अचानक फ्रंटफुट पर जाकर जब बॉलर की बखिया उधेड़ने लगता है तो गेंदबाज़ गच्चा खा जाता है। तब उसे लगता है कि उसे मृगतृष्णा पर फँसाने के लिए वह बैकफ़ुट पर गया था। यहाँ भी वही हो रहा है। बेशक ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान सीजफायर करना पड़ा, जिसकी वाहवाही डोनॉल्ड ट्रम्प ले रहे हैं, लेकिन निकट भविष्य में ही उन्हें पता लगेगा। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर हिंदुस्तान को बैकफ़ुट पर ले जाने की नीति जल्द ही फ्रंटफुट पर ले आएगी और पाकिस्तान की रही-सही कसर भी निकल जाएगी। लेकिन इस दौरान कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी और कच्छ से लेकर कामरूप तक तमाम मीडिया के चेहरे भी बेनक़ाब हो गए। अपनी TRP बढ़ाने के लिए यूँ कहें -‘मैं आगे-तू आगे’ के चक्कर में मीडिया का विद्रूप चेहरा भी दिखा। ‘मैंने सबसे पहले दिखाया, तुमने बाद में’ के चक्कर में कई उलूल-जुलूल ख़बरें भी चलीं, जिनका दूर-दूर तक वास्तविकता से कोई नाम-ओ-निशान भी नहीं था। निःसंदेह भारत ने पाकिस्तान की पिटाई की, उसके आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया लेकिन मीडिया का यह सच भी उजागर हुआ कि अब विश्वास न बाबा न। और यह कहने में तनिक भी गुरेज़ नहीं है कि मीडिया भी हद से ज़्यादा सरकार को महिमामंडित करने में जुटा हुआ है।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद कैसे शुरू हुई घटना…

शुक्रवार का दिन मुसलमानों के लिए पाक होता है। इसी दिन ये कोई भी शुभ कार्य करते हैं। अब पाकिस्तानी मुसलमान हो तो शुक्रवार से ज़्यादा पाक कौन सा दिन हो सकता है। इसी दिन शाम को अपने नापाक इरादे से आतंकिस्तान (पाकिस्तान को इसी नाम से पुकारे तो ज़्यादा अच्छा है) के ड्रोन भारतीय सीमा पर दिखाई दिए। भारतीय वायुसेना और डिफ़ेंस ने उनके एक-एक ड्रोन को मार गिराया। तभी मीडिया ने ख़बर दिखाना शुरू किया। चिल्ल-पों, चिग्घाड़ के साथ-साथ लड़ाई की दहाड़ भी सुनाई पड़ने लगी।चैनलों को लगा कि अब TRP और रेटिंग तेज़ी से बढ़ाई जा सकती है। उसने अपने एंकरों और रिपोर्टरों को तेज़ी से रिपोर्टिंग करने की सलाह दी। कई चैनलों पर लाइव वो बातें भी सुनाई पड़ रही थीं, जो ‘बैकग्राउंड’ में चलती हैं। वैसे भी बड़ी घटना होने पर रिपोर्टर जल्द से जल्द फ़ील्ड पर पहुँचे तो अच्छा इनपुट मिलता है। लेकिन यहाँ कुछ उल्टा दिखाई दिया। एंकरों की चिग्घाड़ और चिल्ल-पों इतनी मची कि थोड़ी देर में तक़रीबन हर भारतीय टीवी और मोबाइल पर चिपक गया।

धर्मशाला में हो रहा IPL मैच बीच में ही रोक दिया गया। लाइटें क्या बुझीं, खेल प्रेमियों में खलबली मची और वो तेज़ी से मीडिया चैनलों की तरफ़ सच्चाई जानने लपक पड़े। एकाएक बढ़े ‘फुटफॉल’ ने चैनलों को ‘बूस्टर डोज’ दे दिया। यहीं देश का मीडिया गच्चा खा गया। ख़बरों का छिद्रान्वेषण दिखने लगा, वो विद्रूप चेहरा सामने आया कि बरसों तक उसके ताने हम सबको सुनने को मिलेंगे। ख़बर देखने वालों को लगा कि अब भारतीय सेना पाकिस्तान का नामोनिशान मिटाने आगे बढ़ चुकी है। हो भी क्यों नहीं। भारतीय लोग मीडिया पर हद से ज़्यादा भरोसा जो करते हैं।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने दुनिया को दिखाई अपनी मातृशक्ति

मीडिया के लोग चिग्घाड़े- ‘पाकिस्तान को भारत पर आक्रमण पड़ा भारी। कुछ ही देर में मिट सकता है पाकिस्तान। सुबह होते-होते बदल जाएगा पाकिस्तान का नक़्शा। भारतीय वायुसेना ने लाहौर को किया तहस-नहस। एक बड़ी ख़बर और… भारतीय नौसेना के विक्रमादित्य ने कराची पोर्ट पर किया बड़ा हमला। अब तक का सबसे बड़ा हमला। कुछ ही समय में दुनिया में भीख माँगता नज़र आएगा पाकिस्तान।’ सभी चैनलों पर एंकरों की दहाड़ सुनकर पूरा देश दहल गया। लोग घर के लिए ज़रूरी सामान ख़रीदने निकल पड़े। देखते ही देखते देश में युद्ध जैसे हालात नज़र आने लगे। चौक-चौराहों पर भीड़ कम हो गई और सड़कों पर तेज़ी से लोग हांफते-भागते हुए घर पहुँचने की कोशिश में जुट गए। लेकिन सच्चाई क्या थी? ये दुनिया जानती है। आख़िर हम इस तरह क्यों बदल गए? रातों-रात कई रक्षा विशेषज्ञ भी पैदा हो गए, वो अपनी ज्ञान गंगा बहाने लगे। कुछ नवागत विशेषज्ञ अपनी शेखी बघारते हुए भी देखे गए। एक जोक्स तेज़ी से चला- ‘नाम रखा गया- जोक्स ऑफ मिलेनियमः न्यूज़ चैनल कह रहे हैं कि… अफ़वाहें न फैलाएँ…’। मीडिया का यह रोल आम-आदमी के लिए चिंताजनक रहा।

यह बात सही है कि हमने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को बख़ूबी अंजाम दिया। छह-सात मई की दरम्यानी रात पाकिस्तान में घुसकर उसके नौ आतंकी अड्ढों को तहस-नहस कर दिया। 40 से ज़्यादा पाकिस्तानी सैनिक और 100 से ज़्यादा आतंकी ढेर हुए। साथ ही पूरी दुनिया के सामने हमने पाकिस्तान के मुँह से मुखौटा नोच लिया और सबके सामने नंगा कर दिया कि वो आतंकियों की रहनुमाई करता है। हमने ये हमला पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK), पंजाब और सिंध के कुछ हिस्सों में किया। इनमें यूसुफ अजहर, अब्दुल मलिक रऊफ और मुदस्सिर अहमद जैसे हाई वैल्यू टारगेट शामिल थे। ये आतंकी IC-814 हाइजैक और पुलवामा हमले से जुड़े थे।

ताबड़तोड़ वार से घबराए पाकिस्तान को नहीं मिली कहीं से मुकम्मल मदद… सीजफायर को होना पड़ा मजबूर

पाकिस्तान के इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने भारत की कार्रवाई की पुष्टि भी तुरंत की थी। भारत की पाकिस्तान के अंदर आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई के बाद पाकिस्तान ने LoC पर फायरिंग शुरू कर दी, भारतीय सेना ने इसका मुंहतोड़ जवाब भी दिया। लश्कर-ए-तैयबा के हेडक्वार्टर पर भारत की तरफ से चार मिसाइलें दागी गई थीं। भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह एक्टिव किया गया।

ग़ौरतलब है कि पहलगाम हमले में भारत के 26 निर्दोष और एक नेपाली नागरिक शामिल था। घटना इतनी वीभत्स थी कि आतंकियों ने सभी से धर्म पूछा और हिंदू होने पर सीधे सिर में गोली दाग़ दी। कुछ पर्यटकों के पैंट भी उतरवा पर देखे गए। पति के सीने के पास दहाड़ रही एक महिला की फ़ोटो इतनी वायरल हुई कि लोगों के आँखों में पानी का दरिया बस गया था। प्रधानमंत्री इसी घटना का बदला लेने को आतुर थे, जिसे उन्होंने बख़ूबी अंजाम दिया। दुनिया को यह बता दिया कि यदि भारत में किसी भी तरह का आतंकी हमला हुआ तो घर में घुसकर मारेंगे। यह धमकी केवल आतंकिस्तान के लिए ही नहीं है, यह चीन बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान के कानों में गर्म लोहे के घोल की मानिंद भी घुला होगा।
बक़ौल DGMO, 8-9 मई की रात को पाकिस्तान के ड्रोन बॉर्डर पर आए और मिलिट्री ठिकानों को निशाना बनाया पर ज्यादातर फेल हो गए। हमारे एयर डिफेंस सिस्टम ने उन्हें फेल किया। पाकिस्तान की तरफ से हमारे एयर फील्ड को निशाना बनाने की कोशिश की। हमने फेल किए। हमने अपना डिप्लॉयमेंट और मजबूत किया। आर्टिलरी फायर में पाकिस्तान के 35-40 सैनिकों का नुकसान हुआ।

आतंक के खिलाफ घर में घुसकर मारेंगे, वायदे को पूरा कर मोदी ने दुनिया को दिखाई हिंदुस्तान की ताकत

मोदी ने अपना वो वायदा पूरा कर दिखाया, जिसमें उन्होंने कहा था कि देश में कोई आतंकी हमला हुआ, तो घर में घुसकर मारेंगे। एक साथ पाकिस्तान के कई आतंकी ठिकानों पर बमबारी करके कई आतंकी अड्डों को नेस्तनाबूद कर दिया। ऐसा करके उन्होंने भारत की मज़बूती को दुनिया के सामने रखा। उन्होंने इज़रायल की तरह हमास पर हमले किए। ये क़तई नहीं सोचा कि हमें इसका ख़ामियाज़ा भी भुगतना पड़ सकता है। लेकिन कूटनीतिक लड़ाई में हम अमेरिका से गच्चा खा गए। उसने व्यापारिक सम्बन्धों की धमकी दी और बच्चों की तरह कान पकड़कर दोनों को बिठा दिया। पाकिस्तान के साथ-साथ हम भी सीज फायर को राज़ी हो गए।

सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘एक्स’ पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रम्प के पोस्ट के बाद जब तक हमें इसका भान हुआ कि तब तक हम पिछड़ चुके थे। दुनिया के सामने ट्रम्प की चौधराहट दिख चुकी थी। हालाँकि अगले दिन विदेश मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ़्रेंस में जायसवाल ने साफ़ किया कि हमारे बीच में तीसरा कोई नहीं आ सकता। हम किसी तीसरे को बर्दाश्त नहीं कर सकते। दूसरी ओर पाकिस्तान ने अपने देश की अवाम को भी ग़लत-गलत तथ्यों से समझा दिया कि हिंदुस्तान हमारी सेना और हमले से सहम गया और सीजफ़ायर को राज़ी हुआ। हम पीछे नहीं हटते, लेकिन संसाधनों की कमी के चलते हमें भी पीछे हटना पड़ा। पीएम मोदी अपने जीवन में पहली बार गच्चा खाए। अब तक वो हर मोर्चे पर सफल दिखे हैं।

सवाल उठता है, हमने युद्ध की मंशा पाली कब थी? हमने तो उनके आतंकी ठिकाने नष्ट किए। उन्होंने हमारे आर्मी बेस को ठिकाना बनाने की कोशिश की, हमारे जाबांजों ने उसे फेल कर दिया। जब हम लड़े नहीं तो ट्रम्प की धमकी से डरे क्यों? हमारी आपस की लड़ाई में ट्रम्प की बौखलाहट फिर हमारे पीछे हुए कदम ने हमें दुनिया के सामने कमजोर साबित कर दिया। हालाँकि एक दिन बाद ही विदेश मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ़्रेंस में हमने साफ़ किया कि हम अपने मामले में तीसरे की दख़लंदाज़ी बर्दास्त नहीं करेंगे।

भारत-पाकिस्तान मुद्दों के बीच जबरन बीच-बचाव करने उतरे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प

कौन मित्र और कौन नहीं है साथ…

ऑपरेशन सिंदूर’ आतंकिस्तान पर कहर बनकर टूटा और दुनिया को भारत की सैन्य शक्ति का अहसास करा दिया। इस दौरान रूस, फ्रांस और इजराइल एक बार फिर भारत के सच्चे मित्र साबित हुए, जबकि अमेरिका और चीन की खामोशी ने संदेह पैदा किया। इस्लामिक देशों की तटस्थता भी सवालों में रही। वहीं ‘ऑपरेशन दोस्त’ के तहत कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की इमदाद पर बचने वाला तुर्किए एक बार फिर दगा दे गया। वह मज़हब के नाम पर पाकिस्तान के साथ खुलकर खड़ा हो गया। विशेषज्ञों की मानें तो अमेरिका भारत के उभरते वर्चस्व से डरता है और पाकिस्तान को सिर्फ अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करता है। भारतीय थलसेना के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल वीके चतुर्वेदी कहते हैं- “ऑपरेशन सिंदूर की सफलता और उसमें भारतीय फौजों द्वारा पाक की हुई जबरदस्त पिटाई सबने देखी। हिंदुस्तान को यह बताने की जरूरत नहीं है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ किस कदर का कहर बनकर पाकिस्तान की छाती पर टूटा। मैं कहूंगा कि रूस, फ्रांस और इजराइल तो जैसे हमारे पक्के दोस्त थे वह ऑपरेशन सिंदूर जैसी मुसीबत में भी साथ रहे। रही बात इस्लामिक देशों की तो वो मज़हबी लोग हैं, आप ख़ुद समझ सकते हैं।

Analysis Business homeslider Raj Sabha Ran

LPG संकट से खाने-पीने का धंधा चौपट, बेरोजगारी, पलायन बढ़ा

मार्च 2026 का महीना भारत के लाखों रेस्तरां मालिकों, ढाबेदारों और छोटे खाने-पीने के कारोबारियों के लिए एक बुरे सपने जैसा बन गया है। देश के सबसे बड़े सुबह उत्तर प्रदेश के छोटे-बड़े शहरों से लेकर गांव-देहात तक में एलपीजी गैस संकट ने खानपान के धंधे में लगे लोगों की कमर तोड़ दी है। यूपी […]

Read More
Analysis Entertainment homeslider Raj Dharm UP

धुरंधर-दो से कैसे बेनकाब हुई अखिलेश की मुस्लिम परस्त राजनीति

रणवीर सिंह अभिनीत फिल्म ‘धुरंधर द रिवेंज’ इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर जितनी धमाकेदार है, उससे कहीं ज्यादा राजनीति के गलियारों में तूफान मचा रही है। फिल्म में ‘अतीक अहमद’ नामक एक ऐसा किरदार दिखाया गया है, जो असल माफिया अतीक अहमद से मेल खाता है। इस किरदार के पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से कथित […]

Read More
Analysis homeslider National

धर्म बदलते ही खत्म होगा SC दर्जा, सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया सख्त नियम

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक ऐसा फैसला सुनाया जिसने सामाजिक न्याय की पूरी बहस को फिर से गरमा दिया है। अदालत ने साफ कहा कि हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी और धर्म में जाने वाला व्यक्ति अनुसूचित जाति का दर्जा तुरंत खो देता है। यह फैसला आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट […]

Read More