
New Delhi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में देश के युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। युवाओं को राष्ट्र की प्रगति से जोड़ना, समाज में एकता की भावना मजबूत करना और आत्मनिर्भरता के प्रति जागरूकता बढ़ाना समय की जरूरत है। उन्होंने चिन्मय मिशन से भी आह्वान किया कि वह युवाओं को प्रेरित कर विकसित भारत के निर्माण में अपना योगदान दे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को चिन्मय अमृत महोत्सव के तहत आयोजित वैश्विक सम्मेलन के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने स्वामी चिन्मयानंद के विचारों और उनके राष्ट्र निर्माण के संकल्प को याद किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वामी चिन्मयानंद का उद्देश्य युवाओं को जागरूक बनाकर एक मजबूत और आत्मविश्वासी भारत का निर्माण करना था। उनके विचार आज भी देश के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

स्वामी चिन्मयानंद
युवाओं को राष्ट्र की प्रगति से जोड़ना जरूरी
PM मोदी ने कहा कि देश के युवाओं की ऊर्जा और क्षमताओं का उपयोग सकारात्मक दिशा में होना चाहिए। युवा जब राष्ट्र के विकास को अपना लक्ष्य बनाते हैं, तो देश की प्रगति को नई गति मिलती है। उन्होंने समाज को बांटने वाली ताकतों से सतर्क रहने और आपसी एकता, सहयोग तथा राष्ट्रीय जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने चिन्मय मिशन के युवा कार्यकर्ताओं के प्रयासों की सराहना करते हुए बताया कि मिशन से जुड़े युवाओं ने करीब 300 दिनों में 40 हजार किलोमीटर की यात्रा की और एक लाख से अधिक युवाओं तक पहुंच बनाई। उन्होंने कहा कि इस तरह के अभियान युवाओं को समाज और देश के प्रति अपने कर्तव्यों को समझने का अवसर देते हैं।

2047 के विकसित भारत के लक्ष्य पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 में भारत अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा। इसी दौर में चिन्मय मिशन भी अपनी स्थापना के शताब्दी वर्ष की ओर बढ़ेगा। ऐसे में देश और समाज के सामने एक विकसित, आत्मनिर्भर और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध भारत बनाने का महत्वपूर्ण लक्ष्य है।
उन्होंने कहा कि इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए सरकार, सामाजिक संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों और आम नागरिकों को मिलकर प्रयास करने होंगे। युवाओं को शिक्षा, नवाचार, तकनीक और सामाजिक सेवा के माध्यम से देश के विकास में सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए।
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आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय मूल्यों पर भी ध्यान
मोदी ने चिन्मय मिशन की ओर से संचालित सौ से अधिक शैक्षणिक संस्थानों का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति और परंपराओं का ज्ञान भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति का जिक्र करते हुए मातृभाषा में शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान एवं तकनीक के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता बताई।
प्रधानमंत्री ने काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या में राम मंदिर और उज्जैन के महाकाल लोक जैसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि पिछले 12 वर्षों में विदेशों से चोरी करके ले जाई गई 650 से अधिक प्राचीन मूर्तियां भारत वापस लाई गई हैं।
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