जयपुर। राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम लिमिटेड (RRECL) में बड़ा घोटाला सामने आया है। सोलर प्रोजेक्ट के नाम पर गुजरात की एक फर्जी फर्म को करीब ₹456 करोड़ के टेंडर दे दिए गए, साथ ही ₹46 करोड़ से अधिक की अग्रिम राशि भी जारी कर दी गई। बाद में जांच में खुलासा हुआ कि संबंधित कंपनी कागज़ों में ही मौजूद थी और उसकी बैंक गारंटी भी संदिग्ध पाई गई। मामला 100 मेगावाट रूफटॉप सोलर प्रोजेक्ट से जुड़ा है, जिसके लिए RRECL ने दो अलग-अलग टेंडर जारी किए थे। हैरानी की बात यह है कि तय समयसीमा बीत जाने के बावजूद न तो परियोजना पर कोई काम शुरू हुआ और न ही आवश्यक प्रगति रिपोर्ट सौंपी गई।
सीबीआई की जांच में पूरे मामले की परतें खुलीं, जिसके बाद यह साफ हुआ कि टेंडर प्रक्रिया से लेकर भुगतान तक गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। अब इस घोटाले में RRECL के अधिकारियों और जिम्मेदार अफसरों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि फर्जी कंपनी को भुगतान किसकी अनुमति से हुआ और क्या इसमें आंतरिक मिलीभगत थी। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।
