गांधीवादी सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी की अनसुलझी गांठ

जब ज्वालामुखी फट जाता है और आग का दरिया तांडव मचाने बहने लगती है, तो उसके बाद हाय हाय करते हुए हम लकीर पीटने लगते हैं। जब बादल फटता है, भयंकर नुकसान कर देता है, तो अपनी गलतियों को छिपाने के लिए पर्यावरण पर दोष मढ़ने लगते हैं। लेकिन, ऐसा क्यों? बड़ा ही गंभीर विषय … Continue reading गांधीवादी सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी की अनसुलझी गांठ