बात तो चुभेगी : बिहार में गड़बड़ चौथ है

               नरेश मिश्र

एक शेर याद आ गया मुलाहिजा फरमाइए। शेख ने मस्जिद बना, मिसमार बुतखाना किया। पहले इक सूरत भी थी अब साफ वीराना  किया। बिहार के विधानसभा चुनाव में दो बांके की जंग देखिए। एक मुंबई गया था सचिन तेंदुलकर बनने। दूसरा गया था अमिताभ बच्चन बनने। दोनों बैरंग वापस लौटे और पॉलिटिक्स में खप गए। महागठबंधन का घोषणापत्र देखिए। जो मांगोगे वही मिलेगा। बिहार की जनता मांग, क्या मांगती है। नौकरी मांगोगे तो दस लाख देंगे। किसानों का कर्ज माफ कर देंगे।

बिहार विधानसभा चुनाव जीतने के बाद मंत्रिमंडल का पहला फैसला यही होगा। कांग्रेस ने राजस्थान, मध्यप्रदेश और कर्नाटक में किसानों का कर्ज माफ करने का वादा किया था। यह वादा ढपोरशंखी निकला। राजस्थान में सचिन पायलट इसी मुद्दे पर अशोक गहलौत से नाराज थे। अब उन्होंने मुंह पर दही जमा ली है। वादा तो पूरा नहीं हुआ सचिन पायलट खामोश हो गए। कांग्रेस कश्मीर को चीन और पाकिस्तान के हवाले करना चाहती है। बिहार को कांग्रेस के इस कदम से क्या लेना देना। हमारी चुनाव आयोग से एक दरख्वास्त है।

घोषणा पत्र में वादा करने वाले चुनावी महारथियों से यह पूछना चाहिए कि वे इसे कैसे निभाएंगे। पहले बही खाता दिखाएं फिर घोषणा करें। घर में नहीं दाने, अम्मा चलीं भुनाने। अब कोरोना के कहर से केंद्र सरकार के खजाने का भी मुंह सिकुड़ गया है। तेजस्वी मुंह फैलाएंगे तो केंद्र सरकार क्या देगी। बिहार में बहार है। वादों की बौछार है। सभी पार्टियों ने भात फैला दिया है। राहुल गांधी आएंगे। अपने भाषण से गदर मचाएंगे। बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार सब गड़बड़ चौथ है। एक कर्मकांडी पंडित का बेटा अनपढ़ और नालायक था। उन्होंने बेटे को मुहूरत और तिथि बताने के लिए एक उपाय सोचा।

उन्होंने बेटे को 15 कंकड़ दिए। उन्हें एक कटोरे में डालने के लिए कहा। एक कंकड़ पर परीवां, दूसरे पर दूज, तीसरे पर तीज, इसी तरह अमावस और पूर्णिमा की गिनती सिखा दी। बेटा कंकड़ गिनकर तिथि बताने लगा। एक दिन किसी शरारती लड़के ने कटोरे में सारे कंकड़ डाल दिए। कोई यजमान तिथि पूछने आया तो ज्योतिषी का लड़का परेशान हुआ। उसने कहा आज गड़बड़ चौथ है।

तो बिहार के वोटरों सावधान हो जाइए। एक फिल्मी गाना याद आ गया। कस्मे वादे प्यार वफा सब, बाते हैं बातों का क्या। कोई किसी का नहीं ये झूठे नाते हैं नातों का क्या। वफादारों और ठगों में फर्क कर लीजिए। फिर वोट दीजिए।