बात तो चुभेगी : मुगल खानदान का कच्चा चिट्ठा

नरेश मिश्र
नरेश मिश्र

हमारे मुल्क में मुगल वंश का आगाज करने वाले बाबर की व्यथा कथा सुनाते हैं। बाबर के अधेड़ वालिद ने कमसिन सुन्दरी से निकाह किया था। एक दिन वह सबेरे नशे में उठा और महल के नीचे खंदक में गिर गया। उसकी मृत्यु बाबर के लिए परेशानी का सबब बन गई। बाबर के चाचा ने उसे फरजाना रियासत में जंग के दौरान कई बार हराया। बाबर अपनी जान बचाकर फौज की छोटी टुकड़ी के साथ फरजना छोड़ दिया। मध्य एशिया के बहादुर सुल्तान ने बाबर की बहन से जबरन निकाह कर लिया। बाबर उस सुल्तान के आगे लाचार था। बाद में ईरान के शहंशाह ने मध्य एशिया के उस सुल्तान पर धावा बोलकर उसका सिर काट दिया। उसकी खोपड़ी को शराब का प्याला बनाकर उसमें जाम छलकाता था।

बाबर अपनी बेवा बहन के साथ अफगानिस्तान पहुंचा। तकदीर ने भी उसका साथ दिया। उसने काबुल पर कब्जा कर लिया। बाबर के हिन्दुस्तान पर हमले की वजह इब्राहिम लोदी के कुछ बागी सूबेदार थे। उन्होंने बाबर को बुलावा भेजा। बाबर ने तोपखाने के बल पर पानीपत की पहली लड़ाई जीत ली। उसके सिपहसालार मीर बांकी ने अयोध्या में राम मंदिर को जमींदोज कर दिया। बाबर ने इस मुल्क को कभी प्यार नहीं किया। वह इस मुल्क के हर फूलों और अन्न उपज की निंदा करता था। उसे हिंदुस्तान की सभ्यता भी फूटी आंख नहीं सुहाती थी।

हुमायूं ने शेरशाह से बस्तर की लड़ाई में मात खाई थी। वह हिन्दुस्तान छोड़कर भाग खड़ा हुआ। यह मुल्क छोड़ते समय उसकी बेगम अकबर को जन्म देने वाली थी। हुमायूं भागकर ईरान चला गया। उसने ईरान के शहंशाह से मदद मांगी। बदले में उसे ईरान के शहंशाह ने शिया मजहब स्वीकार करने को कहा। हुमायूं ने शिया मजहब मंजूर कर लिया। जो कहानी फिल्म मुगलेआजम में दिखाई जाती है वह सच्चाई से कोसों दूर है। अनारकली का कोई वजूद नहीं था। दरअस्ल अधेड़ उम्र में अकबर एक रक्काशा (नर्तकी) के प्रेमजाल में फंस गया था। उसके बेटे जहांगीर ने भी उस नर्तकी को अपने प्रेमजाल में फांस लिया।

दरअस्ल जहांगीर का ही नाम पहले सलीम था। उसने अकबर को चिढ़ाने के लिए प्रेम जाल का यह नाटक खेला था। अकबर ने गुस्से में उस रक्काशा को दीवार में चुनवा दिया। रामजन्मभूमि का झगड़ा निपटाने के लिए अकबर ने टोडरमल और बीरबल को अयोध्या भेजा था। उन दोनों की सिफारिश से टाट पट्टी से ढका हुआ एक मंदिर बाबरी मस्जिद के पास बनवा दिया। मंदिर की लंबाई चौड़ाई इतनी तंग थी जितनी अकबर की उदार हिंदू नीति। जहांगीर ने एक सिख गुरू को चमड़े के मसक में भरवाकर झेलम नदी में फेंकवा दिया था। आगरा का ताजमहल मुमताज बेगम के प्रेम की निशानी कही जाती है। दरअस्ल मुमताज महल बार-बार गर्भ धारण करने के कारण बीमार पड़ी और उसकी मौत हो गई। अंग्रेज इतिहासकारों के मुताबिक शहंशाह बुढ़ापे के दौरान भी वलवर्धक दवाइयां लेता था। उसकी मौत उन्हीं दवाइयों की सबब हुई।

औरंगजेब ने अपने बड़े भाई दारा शिकोह की निर्मम हत्या करवाकर इतिहास को नया मोड़ दे दिया। दारा अगर मुगल तख्त पर बैठता तो भारत में हिन्दू मुस्लिम समन्वय का स्वर्णयुग प्रारंभ होता। औरंगजेब ने अपने दूसरे भाई मुराद की भी हत्या करवा दी। तीसरे भाई शुजा ने अराकान भागकर अपनी जान बचाई। औरंगजेब इतना कट्टर सुन्नी था कि उसे गीत संगीत फूटी आंख भी नहीं भाता था। उसने मुगल दरबार के संगीतकारों का वजीफा बंद करा दिया। संगीतकारों ने विरोध में संगीत का जनाजा निकाला। औरंगजेब ने कहा कि इसे इतने गहरे गाड़ना कि फिर ये जमीन से निकल न सके।

छत्रपति शिवाजी और औरंगजेब का किस्सा सुनिए। छत्रपति शिवाजी ने दक्कन की पांच शिया रियासतों को दबा रखा था। उन्होंने बीजापुर के सिपहसालार अफजल खां को मार गिराया। उन्होंने औरंगजेब के मामा शाइस्ता खां को पुणे के महल में घेर लिया। शाइस्ता खां अपनी जान बचाने के लिए खिड़की से कूद पड़ा। शिवाजी ने तलवार के वार से उसकी उंगलियां काट डालीं।
मिर्जा राजा जयसिंह औरंगजेब के सिपहसालार थे। उन्होंने बंगाल और उड़ीसा पर हमला करके इन सूबों की सारी दौलत लूट ली। आधी दौलत मुगल खजाने में गई आधी जयपुर के महल में पहुंच गई। औरंगजेब ने शिवाजी पर काबू पाने के लिए राजा जयसिंह को फिर रवाना किया। बड़ी मुगल फौज के आगे शिवाजी ने समझौते की बात चलाई। समझौते के मुताबिक शिवाजी को औरंगजेब के दरबार में भेज दिया गया।

औरंगजेब ने उनका अपमान किया और उन्हें कैद कर लिया। कैदी शिवाजी पर नजर रखने के लिए जयसिंह के बेटे रामसिंह और आगरा के मुस्लिम कोतवाल को तैनात किया गया। शिवाजी पहरेदारों की आंखों में धूल झोंककर कैद से भाग निकले। नाराज औरंगजेब ने आगरा के शहर कोतवाल को फटकार लगाकर बरी कर दिया लेकिन रामसिंह की दरबार में हाजिरी की मनाही कर दी। बाद में औरंगजेब ने रामसिंह को इस शर्त पर माफी दी कि वे आसाम पर जीत हासिल करें। पटना में रामसिंह सिखों के नवम गुरु तेगबहादुर से मिले। दोनों एक साथ आसाम गए। दोनों ने असम में शांति वार्ता करके मुगल बादशाह को संतुष्ट कर दिया। बाद में कश्मीर में कश्मीरी ब्राह्मणों की रक्षा के लिए गुरु तेगबहादुर ने औरंगजेब का कोप झेलते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। औरंगजेब को उसके पापों का फल भुगतना पड़ा। दक्कन की शिया रियासतों से जंग करते हुए उसने अपनी जान गंवाई।

अब अखिलेश यादव अगर राज्य के खजाने का करोड़ों खर्च करके मुगल म्यूजियम बनाते हैं तो उनका अल्पसंख्यक तुष्टीकरण अंधे को भी नजर आता है। बाद में योगी जी मुगल म्यूजियम का नाम बदलते हैं तो उनका नजरिया भी समझ में आता है। मुगल वंश ने इस मुल्क को ताजमहल और लालकिला तो दिया लेकिन गंगा जमुनी तहजीब के नाम पर मुगलों ने जो किया उस पर बेबाक समीक्षा तो होनी ही चाहिए।