कोरोना काल में अपनी शारीरिक कमजोरी को अश्वगंधा के जरिए रखें दुरुस्त, इन तरीकों से करें इस्तेमाल

नया लुक डेस्क। अश्वगंधा एक प्रचिलित जड़ी-बूटी है जिसका उल्लेख आयुर्वेद और अथर्वेद दोनों में ही उपचार के रूप में मिलता है। इसका हर रूप कई तरह के रोगों से लड़ने में सहायक है। अपने गुणों के चलते ही अश्वगंधा तेजी से आज की पीढ़ी के बीच प्रचिलित हुयी है। इसके अनेक गुणों में एक है शारीरिक कमजोरी को दुरुस्त करना और रखना। आज हम इसी के बारे में आपको बताने जा रहे हैं कि कैसे आप औषधियों की खान अश्वगंधा को प्रयोग कर कोरोना काल में खुद को दुरुस्त रख सकते हैं। जो कि समय की मांग के साथ बहुत जरीरू भी है।

दो तरह की होता है अश्वगंधा

अलग अलग देशों में अलग अलग तरह का अश्वगंधा पाया जाता है। लेकिन भारत में दो तरह(छोटी या नागौरी, बड़ी या देशी) की अश्वगंधा पाया जाता है। वन में पाए जाने वाले अश्वगंधा के पौधों की तुलना में खेती के माध्‍यम से उगाए जाने वाले अश्‍वगंधा की गुणवत्‍ता अच्‍छी होती है।

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छोटी अश्वगंधा

इसकी झाड़ी छोटी होने से यह छोटी असगंध कहलाती है, लेकिन इसकी जड़ बड़ी होती है। राजस्‍थान के नागौर में यह बहुत अधिक पाई जाती है और वहां के जलवायु के प्रभाव से यह विशेष प्रभावशाली होती है। इसीलिए इसको नागौरी असगंध भी कहते हैं।

बड़ी या देशी अश्वगंधा

इसकी झाड़ी बड़ी होती है, लेकिन जड़ें छोटी और पतली होती हैं। यह बाग-बगीचों, खेतों और पहाड़ी स्थानों में सामान्य रूप में पाई जाती है। असगंध में कब्‍ज गुणों की प्रधानता होने से और उसकी गंध कुछ घोड़े के पेशाब जैसी होने से संस्कृत में इसकी बाजी या घोड़े से संबंधित नाम रखे गए हैं।


इन तरीकों से शारीरिक कमजोरी को दूर करती है अश्वगंधा

  • 2-4 ग्राम अश्‍वगंधा चूर्ण को एक वर्ष तक बताई गई विधि से सेवन करने से शरीर रोग मुक्‍त तथा बलवान हो जाता है।
  • 10-10 ग्राम अश्‍वगंधा चूर्ण, तिल व घी लें। इसमें तीन ग्राम शहर मिलाकर जाड़े के दिनों में रोजाना 1-2 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से शरीर मजबूत बनता है।

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  • 6 ग्राम असगंधा चूर्ण में उतने ही भाग मिश्री और शहद मिला लें। इसमें 10 ग्राम गाय का घी मिलाएं। इस मिश्रण को 2-4 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम शीतकाल में 4 महीने तक सेवन करने से शरीर का पोषण होता है।
  • 3 ग्राम असगंधा मूल चूर्ण को पित्त प्रकृति वाला व्‍यक्ति ताजे दूध (कच्चा/धारोष्ण) के साथ सेवन करें। वात प्रकृति वाला शुद्ध तिल के साथ सेवन करें और कफ प्रकृति का व्‍यक्ति गुनगुने जल के साथ एक साल तक सेवन करें। इससे शारीरिक कमोजरी दूर  होती है और सभी रोगों से मुक्ति मिलती है।

  • 20 ग्राम असगंधा चूर्ण, तिल 40 ग्राम और उड़द 160 ग्राम लें। इन तीनों को महीन पीसकर इसके बड़े बनाकर ताजे-ताजे एक महीने तक सेवन करने से शरीर की दुर्बलता खत्‍म हो जाती है।
  • असगंधा की जड़ और चिरायता को बराबर भाग में लेकर अच्‍छी तरह से कूट कर मिला लें। इस चूर्ण को 2-4 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करने से शरीर की दुर्बलता खत्‍म हो जाती है।
  • एक ग्राम असगंधा चूर्ण में 125 मिग्रा मिश्री डालकर, गुनगुने दूध के साथ सेवन करने से वीर्य विकार दूर होकर वीर्य मजबूत होता है तथा बल बढ़ता है।

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सावधानी — अंश्वगंधा प्रयोग करने के समय ध्यान रखना होगा कि इसकी तासीर काफी गर्म होती है। जिस वजह से इसे कम मात्रा में ही प्रयोग करें।

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