यूपीएसआईडीसी का घोटालेबाज चीफ इंजीनियर अरूण मिश्रा गिरफ्तार

  • करोड़ों के घोटोलों में चल रही थी जांच.कई बार पड़े सीबीआई छापे
  • हाईकोर्ट के आदेश पर भी रोकी गयी थी कार्यवाही, चल रही हैं तमाम जांचे

नया लुक ब्यूरो

लखनऊ। यूपीएसआईडीसी के घोटाले बाज चीफ इंजीनियर अरुण मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया है। पिछले कई सालों से उनके खिलाफ करोड़ो रुपए के मके मामले की जांच चल रही है। वो कई बार सीबीआई के शिकंजे में आए थे। पिछली सरकारों ने उन पर बड़ी कार्यवाही करने की कोशिश की पर कई बार वो कोर्ट के आदेश से बच गए। अब पुलिस अरुण मिश्रा को लखनऊ स्थित भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट में पेश करेगी।

बता दें कि क्षेत्र कि चकेरी थाना क्षेत्र में चकेरी पाली रोड के निर्माण में घोटाले का मामला सामने आया था। 2012 में चकेरी में दर्ज मामले में अरुण मिश्रा सहित पांच लोगों को आरोपी बनाया गया था। इस घोटाले में आरोपी बनाए जाने के बाद अरुण मिश्रा को निलंबित कर दिया गया था, लेकिन निलंबन के खिलाफ अरुण मिश्रा हाईकोर्ट चले गये थे। इस पर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने उनके खिलाफ पारित निलंबन आदेशों पर अंतरिम रोक दी थी। न्यायालय ने मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि प्रथम दृष्टया यह स्थापित हो रहा है कि राज्य सरकार अरुण कुमार मिश्रा के खिलाफ दुर्भावना से कार्य कर रही है।

यह आदेश न्यायमूर्ति इरशाद अली की एकल सदस्यीय पीठ ने अरुण कुमार मिश्रा की याचिका पर दिया था। याचिका में 16 अप्रैल 2018 और 8 अक्टूबर 2018 के दो निलंबन आदेशों को चुनौती दी गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के अधिवक्ता ने समय दिए जाने की मांग करते हुए कहा था कि प्रकरण में उन्हें सरकार से समुचित दिशा-निर्देश नहीं प्राप्त हुए हैं। इस पर न्यायालय ने कहा कि निलंबन आदेश 16 अप्रैल 2018 का है और अभी तक याची के खिलाफ विभागीय जांच पूरी करने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया है। इससे प्रथम दृष्टया यह स्थापित होता है कि सरकार याची के खिलाफ दुर्भावना से काम कर रही है।

बता दें कि अरुण कुमार मिश्रा की नियुक्ति के खिलाफ दायर एक अधिकार पृच्छा रिट याचिका हाईकोर्ट ने 28 अगस्त 2014 को मंजूर की थी। इस आदेश के खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की जिस पर शीर्ष अदालत ने 29 सितम्बर 2018 को हाईकोर्ट के आदेश पर स्टे दे दिया था।

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