क्यों पहना जाता है तुलसी का माला, आइए जाने

तुलसी की माला….साधारण काष्ठ नहीं है तुलसी की माला वैष्णव चिह्न से भी आगे की चीज़ है। हमारा यह शरीर भगवान का मंदिर है। जिसमें युगल सरकार राधाकृष्ण का वास है, और हमारी आत्मा ही प्रभु का शरीर है।जब हम तुलसी की माला गले में पहनते हैं तो हम कहते हैं-”भगवान हम जैसे भी हैं तुम्हारे ही हैं।”

हम सभी जीव कृष्ण जी के भोग्य हैं , उनके दास हैं। और कृष्ण जी तुलसी के बिना कुछ भी ग्रहण नहीं करते तो श्री गुरुदेव कृपा करके तुलसी गले में धारण करा के हमें कृष्ण जी के चरणों मे समर्पित कर देते हैं। और जब कृष्ण जी के अपने प्रिय भक्तों के द्वारा तुलसी माला धारण किया हुआ जीव उनकी शरण में जाता है तो वो कभी अस्वीकार नहीं करते उस पर कृपा जरूर करते हैं। इसलिए जरूर कंठ में तुलसी माला धारण करनी चाहिए।

स्कन्दपुराण में कहा गया है कि जिनके गले में तुलसीमाला है वो निश्चय ही हरि भक्त हैं। हिंदू धर्म में तुलसी की माला का विशेष महत्व है। राम और कृष्ण भक्ति शाखा के लोग इस विशेष रूप से धारण करते हैं। ऐसी मान्यता है कि तुलसी की माला पहनने से ही आत्मा और मन की शुद्धि होती है।

सनातन काल से ही इसे स्वास्थ्य वृद्धि के लिए खास माना गया है। कुछ शोधों से पता चला है कि तुलसी की माला का सिर्फ धार्मिक बल्कि वैज्ञानिक महत्व भी है। जानिए तुलसी की माला से जुड़े कुछ वैज्ञानिक तथ्य…

ज्योतिष के अनुसार कहा जाता है कि तुलसी की माला पहनने से बुध और गुरू ग्रह बलवान होते हैं। ज्योतिष के अनुसार कहा जाता है कि तुलसी की माला पहनने से सभी प्रकार की सुख मिलते हैं और कोई बुरी नजर नहीं लगती ।
ज्योतिष के अनुसार कहा जाता है कि तुलसी की माला पहनने से पहले इसे गंगा जल और धूप दिखाना चाहिए।

तुलसी की माला पहनने से पहले मंदिर में जाकर श्रीहरि की पूजा करनी चाहिए।
जो लोग तुलसी की माला पहनते हैं उन्हें प्याज और लहसुन नहीं खाना चाहिए।
जो लोग तुलसी की माला को धारण करते हैं उन्हें नॉनवेज खाना भी नहीं खाना चाहिए।

तुलसी की माला धारण करने से जरूरी एक्यूप्रेशर पॉइंट्स पर दबाव पड़ता है, जिससे मानसिक तनाव से बाहर निकलने में मदद मिलती है और सेहत में सुधार होता है।

तुलसी की लकड़ी से बनी माला में एक खास तरह का द्रव्य होता है, जिससे मानसिक तनाव दूर होता है। मन में उत्साह बढ़ता है।

तुलसी की लकड़ियों से बनी माला शरीर से लगी रहती है तो ये कफ और वात दोष को दूर करने में मददगार होती है। इससे शारीरिक और मानसिक संतुलित बना रहता है।

तुलसी के पौधे वायु प्रदूषण को भी कम करते हैं। इस पौधे की लकड़ी से ही माला बनाई जाती है। जो शारीरिक और मानिसक तौर से महत्वपूर्ण है।

हृदय पर झूलने वाली तुलसी माला फेफड़े और हृदय के रोगों से बचाती है। इसे धारण करने वाले के स्वभाव में सात्त्विकता का संचार होता है.हमारे प्रभु विष्णु के चरण कमलों की शोभा हैं, प्रिया हैं तुलसी जी।तुलसी की माला पहनकर घर पर साधारण स्नान करने वालों को तमाम तीर्थों में स्नान करने का पुण्य प्राप्त होता है। यदि मृत्यु के समय किसी के गले में तुलसी की माला का एक मनका भी मौजूद रहता है तो सुनिश्चित जानो वह नरक (निम्नतर योनियों ) में नहीं जाएगा,

ऐसा हमारे शास्त्र कहते हैं।

हमारे पुराणो में तुलसी का बहुत अधिक महत्व है। जो व्यक्ति तुलसी माला गले में नहीं पहनते उनको पद्मपुराण में ब्रह्मराक्षस कहा गया है। तुलसी माला धारण करने वाले को कभी भी कोई पाप स्पर्श नहीं कर सकता। यमदूत कभी उसके पास नहीं आ सकते। ये सब गरुणपुराण में लिखा

हे तुलसी! आप सम्पूर्ण सौभाग्यों को बढ़ाने वाली हैं, सदा आधि-व्याधि को मिटाती हैं, आपको नमस्कार है। तुलसी को लगाने से, पालने से, सींचने से, दर्शन करने से, स्पर्श करने से, मनुष्यों के मन, वचन और काया से संचित पाप जल जाते हैं।

ऐसा कहा जाता है, जिनके मृत शरीर का दहन तुलसी की लकड़ी की अग्नि से क्रिया जाता है, वे मोक्ष को प्राप्त होते हैं, उनका पुनर्जन्म नहीं होता। प्राणी के अंत समय में मृत शैया पर पड़े रोगी को तुलसी दलयुक्त जल सेवन कराये जाने के विधान में तुलसी की शुध्दता ही मानी जाती है और उस व्यक्ति को मोक्ष प्राप्त हो, ऐसा माना जाता है। तुलसी की महिमा इतनी अनंत है जिसको कहा नही जा सकता।

कविवर रसखान अपने गले में असंख्य तुलसी मालाओं को धारण किए रहते थे। एक बार किसी ने रसखान जी से पूछा- ‘महाराज आप इतनी अधिक काष्ठ मालाएं क्यों पहने रहते हैं? ‘रसखान जी बोले – ‘मैं नीच कुल में पैदा हुआ हूँ, मैं नहीं जानता पाप क्या है, लेकिन इतना मैंने संतों से सुना है की तुलसी की यह माला साधारण काष्ठ की माला नहीं है।

यह मेरा भी बेड़ा पार कर देगी और मेरे कुल का भी बेड़ा पार होगा ऐसा मैं सोचता हूँ। मुझे यह जानने में अब बहुत देर हो गई है कि पाप का उपाय क्या है, लेकिन यह साधारण सा उपाय तो मैं कर ही सकता हूँ। इसीलिए मैं इतना ब्रह्म काष्ठ धारण किये रहता हूँ।

कई सभ्रांत महिलाएं ऐसा सोचतीं हैं की रज का तिलक और तुलसी की माला सुहागिन स्त्रियों को नहीं पहननी चाहिए। मगर हमारे शास्त्रों में ऐसा कहीं भी नहीं लिखा है कि सुहागिन स्त्रियों को तुलसी माला नहीँ पहनी चाहिए। इसलिए सभी स्त्रियों ,पुरुषों एवं बच्चों को बगैर किसी शंका और संकोच के तुलसी माला को धारण करना चाहिए।

कोई वैरागी संत अगर तुलसी जी की माला को धारण करे तो उसका वैराग्य धीरे -धीरे कई गुना बढ़ जायेगा और संसार के प्रति उसका आकर्षण कम हो जायेगा।