Special Story- स्वास्थ्य सेवाएं वेंटीलेटर पर! केन्द्र से राज्यों को नहीं मिले पूरे वेंटीलेटर

  • यूपी को मिले सिर्फ 181 वेंटीलेटर, मिलने थे 992
  • गुजरात, दिल्ली और छत्तीसगढ़ की स्थिति ठीक
  • कोरोना को लेकर चर्चित बिहार को मिले 114 वेंटीलेटर
  • 50 फीसदी वेंटीलेटर ही मिल सके महाराष्ट्र,कर्नाटक,तेलांगना को

प्रमुख संवाददाता

नयी दिल्ली। कोरोना जैसी महामारी के दौरान केन्द्र सरकार बड़े-बड़े दावे कर रही है पर स्वास्थ्य सेवाओं की लचर स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि तमाम मरीज तो महज इसलिए मरे क्योंकि उन्हें अस्पतालों में वेंटीलेटर ही नहीं मिला। केन्द्री की मोदी सरकार जोर-शोर से दावे करती है कि हमने देश के सभी राज्यों को स्वदेशी वेंटीलेटर उपलब्ध करा दिये हैं पर हकीकत ये है कि तमाम राज्यों को आवंटित वेंटीलेटरों के आधे ही मिल पा गये हैं। यह स्थिति तब है जब देश में कोरोना चरम पर है। महाराष्ट्र जैसे कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य को आधे वेंटीलेटर दिये गये हैं तो कर्नाटक और राजस्थान को 50 फीसदी वेंटीलेटर मिल पाए हैं। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य को 992 वेंटिलेटर देने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन इसमें से सिर्फ 181 वेंटिलेटर ही अभी तक दिए गए हैं। ऐसे में मरीजों का अस्पतालो में बगैर वेंटीलेटर दम तोड़ना जारी है।

घटनाक्रम- 1
नवी मुंबई के कोपरखैरणे में रहने वाले 78 साल के भगवान वेता बीती 16 जुलाई को स्वास्थ्य सम्बन्धी कुछ दिक्कतों के कारण एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। अस्पताल में हुयी जांच में पता चला कि उनका ब्लड प्रेशर और ऑक्सीजन लेवल कम है। उनकी कोविड-19 जांच हुयी और 20 जुलाई को उनकी टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आयी। इस अस्पताल में वेंटीलेटर नहीं था इसलिए अस्पताल प्रशासन ने मरीज को किसी ऐसे अस्पताल में शिफ्ट कराने को कहा जहां वेंटीलेटर हो।
मुंबई मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक भर्ती मरीज के दामाद अशोक टंडेल और परिवार के अन्य लोग 12 घंटे तक कॉल पर कॉल लगाते रहे, लेकिन कहीं भी हमें वेंटिलेटर के साथ बेड नहीं मिला। भर्ती मरीज के दामाद अशोक टंडेल महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और भाजपा नेता गणेश नायक के संबंधी भी हैं। ऐसे में गणेश नायक ने भी कई भी तमाम अस्पतालों में फोन किया पर दुर्भाग्य से नवी मुंबई के किसी अस्पताल में उन्हें वेंटिलेटर वाला बेड आसानी से नहीं मिल पाया। इसी तरह वेंटिलेटर या ऑक्सीजन बेड उपलब्ध नहीं होने के कारण 60 वर्षीय चंद्रकांत भगत की पिछले महीने 25 जून को मौत हो गई।

घटनाक्रम- 2
इसी महीने महाराष्ट्र के पुणे शहर में बॉटेनिकल सर्वे ऑफ इंडिया के 61वर्षीय रिटायर्ड वैज्ञानिक डॉ. लक्ष्मी नरसिम्हन की वेंटिलेटर न मिलने की वजह मौत गयी। कोरोना संक्रमित वैज्ञानिक की तबीयत और बिगड़ने के कारण डाक्टरों ने उन्हें वेंटिलर की सुविधा वाले अस्पताल में ले जाने को कहा गया था, लेकिन परिजनों की तमाम कोशिशों के बाद भी उन्हें वेंटिलेटर नहीं मिल पाया और डॉ. लक्ष्मी नरसिम्हन ने दम तोड़ दिया।
वायर की एक रिपोर्ट के मुताबिक वेंटीलेटर न मिललने से हुयी मौत की दर्दनाक कहानी सिर्फ वेता, भगत और नरसिम्हन की नहीं है। आए दिन कोरोना वायरस के गंभीर संक्रमण वाले मरीजों की वेंटिलेटर न मिलने या आईसीयू बेड खाली न होने के कारण मौत की खबरें सामने आ रही हैं।

हर राज्य को वेंटीलेटर देने का वादा भी अधूरा
ऐसे में उचित स्वास्थ्य लाभ न देने को लेकर जनता और विशेषज्ञों ने केंद्र व राज्य सरकारों को आड़े हाथों लिया था । इसके बाद केन्द्र सरकार ने दावा किया कि उन्होंने लॉकडाउन के समय को स्वदेशी वेंटिलेटर बनाने में इस्तेमाल किया है और अब अस्पतालों में इसकी कमी नहीं होगी। सरकार ने इसका जोरदार प्रचार-प्रसार भी हुआ और देश को भरोसा हो गया कि अब वेंटीलेटर न होने के कारण किसी की जान नहीं जाएगी। केन्द्र के दावों के उलट हकीकत ये है कि केंद्र सरकार अपने दावों के मुताबिक राज्य सरकारों व केंद्रीय स्वास्थ्य संस्थानों को अभी तक करीब 50 फीसदी वेंटीलेटर ही दे पायी है। देश व राज्यों में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच यह वेंटीलेटर मरीजों सी संख्या के हिसाब से नाकाफी हो रहे हैं।
द वायर द्वारा सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत प्राप्त किए गए दस्तावेज से पता चलता है कि केंद्र के स्वास्थ्य मंत्रालय ने 36 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों तथा केंद्रीय स्वास्थ्य संस्थानों के लिए 17 हजार 938 वेंटिलेटर का आवंटन ही किया था। लेकिन इसमें से 10 जुलाई 2020 तक सिर्फ 9 हजार150 वेंटीलेटर ही दिये गये हैं जो कुल आवंटन का करीब 50 फीसदी ही है।

यूपी को सिर्फ 181 वेंटीलेटर
उत्तर प्रदेश जैसे बड़ी आबादी वाले राज्य में 992 वेंटिलेटर देने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन इसमें से सिर्फ 181 वेंटिलेटर ही अभी तक दिए गए हैं जो आवंटन के मुकाबले मात्र 18 फीसदी ही है। यूपी में भी दिन ब दिन कोरोन संक्रमण की स्थिति विकराल होती जा रही है और कोरोना से हुयी मौतों का सिलसिला भी बढ़ा है। यूपी में राज्य में इस समय करीब 81 हजार मामले आ चुके हैं और यहां इस वायरस से लगभग 1 हजार 500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। राज्य की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर योगी सरकार की आलोचना होती रही है। चिंता की बात ये है कि पिछले कुछ हफ्तों में राजधानी लखनऊ समेत उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में कोरोना संक्रमण के मामले तेजी से बढ़े हैं।

कहीं लक्ष्य के आधे तो कहीं उससे भी कम वेंटीलेटर
वहीं कोरोना से अधिक प्रभावित राज्य महाराष्ट्र को 1 हजार 805 वेंटीलेटर दिए हैं। केन्द्र सरकार ने इस राज्य के लिए 3 हजार 575 वेंटीलेटर आवंटित किये थे। मालूम हो कि देश में अब तक कोरोना संक्रमण के सबसे ज्यादा 4 लाख मामले महाराष्ट्र में ही पाए गए हैं। यहां संक्रमण के चलते अब तक 15 15 हज़ार के करीब मौतें हो चुकी हैं।

ज्यादा वेंटीलेटर आवंटन वाले राज्यों में दूसरे नंबर पर कर्नाटक राज्य आता है। यहां केंद्र की ओर से 1 हजार 650 वेंटिलेटर आवंटित किए गए. हालांकि इसमें से अब तक 630 वेंटिलेटर ही दिए गए है। वेंटलीलेटरों की यह संख्या आवंटन के मुकाबले करीब 38 फीसदी ही है। कर्नाटक में अब तक कोरोना संक्रमण के एक लाख से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं और यहां इस वायरस से दो हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

वहीं कांग्रेस शासित राज्य राजस्थान को स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से 1 हजार 225 वेंटिलेटर आवंटित किए गए थे। अभी तक इसमें से अभी तक सिर्फ 519 वेंटिलेटर ही राज्य सरकार तक पहुंचे हैं जो आवंटन का करीब 42 फीसदी ही है। राजस्थान में कोरोना संक्रमण के 40 हजार से ज्यादा मामले आ चुके हैं और शुक्रवार शाम तक यहां 663 लोगों की मौत हुई है।
इसी तरह तेलंगाना को 1 हजार 220 वेंटिलेटर आवंटित किए गए हैं, लेकिन इसमें से 888 वेंटिलेटर ही दिए गए हैं। राज्य की केसीआर राव सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सार्वजनिक रूप से केन्द्र की मोदी सरकार की आलोचना भी कर चुके हैं कि उन्हें आवंटन की तुलना में पर्याप्त वेंटिलेटर नहीं दिए जा रहे हैं।

वेंटीलेटर मिलने के मामले में मध्य प्रदेश की भी स्थिति काफी खराब है। केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश को 679 वेंटिलेटर आवंटित किए हैं, लेकिन इसमें से अभी तक सिर्फ 79 वेंटिलेटर ही राज्य में पहुंचाए गए हैं। यह कुल आवंटन के मुकाबले मात्र 11 फीसदी है। कोरोना वायरस के कारण मध्य प्रदेश में 800 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और यहां 31 हजार के करीब मामले आ चुके हैं।

कोरोना वायरस के मद्देनजर अव्यवस्थाओं को लेकर चौतरफा आलोचनाओं से घिरे बिहार को केंद्र सरकार की ओर से 464 वेंटिलेटर आवंटित किए गए हैं इसमें से भी अभी 114 वेंटिलेटर ही राज्य को भेजे गए हैं। बिहार में कोरोना संक्रमण के करीब 46,600 मामले सामने आ चुके हैं और यहां 250 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इसी तरह झारखंड को 385 वेंटिलेटर आवंटित किए गए हैं और इसमें से 185 वेंटिलेटर ही राज्य को सौंपे गए हैं।
देश में दूसरे सबसे ज्यादा कोरोना संक्रमण संक्रमण वाले राज्य तमिलनाडु को 640 वेंटिलेटर आवंटित किए गए हैं। हालांकि इसमें से अभी तक सिर्फ 111 वेंटिलेटर ही राज्य में पहुंचाए गए हैं। केरल को केंद्र की ओर से 480 वेंटिलेटर दिए जाने थे जिसमें से 107 वेंटिलेटर ही दिए गए हैं।

गुजरात, दिल्ली और छत्तीसगढ़ की स्थिति ठीक
हालांकि इन राज्यों की तुलना में गुजरात, दिल्ली और छत्तीसगढ़ खुशकिस्मत राज्य निकले हैं। गुजरात में केंद्र ने आवंटन के संख्या के करीब वेंटिलेटर पहुंचा दिए गए हैं। भाजपा शासित इस राज्य को कुल 1 हजार 504 वेंटिलेटर आवंटित किए गए थे और इसमें से 1 हजार 494 वेंटिलेटर पहुंच चुके हैं। मालूम हो कि राज्य की दयनीय स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर गुजरात हाईकोर्ट ने कई बार फटकार भी लगाई थी। इसी तरह राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को 525 वेंटिलेटर आवंटित किए गए थे जिसमें से 471 वेंटिलेटर दे दिए गए हैं। इसी तरह छत्तीसगढ़ को 190 वेंटिलेटर दिए जाने थे, जिसमें से सभी वेंटिलेटर पहुंचा दिए गए हैं।
नए केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख को 130 वेंटिलेटर आवंटित किए गए हैं, जिसमें से एक भी वेंटिलेटर प्रदेश में नहीं भेजा गया है। केंद्रशासित प्रदेश जम्मू कश्मीर के लिए 354 वेंटिलेटर आवंटित किए गए थे, जिसमें से 154 वेंटिलेटर ही अभी तक प्रदेश में भेजे गए हैं। इसी तरह एक अन्य केंद्रशासित प्रदेश लक्षद्वीप को पांच और सिक्किम को 10 वेंटिलर दिए जाने थे। इसमें से एक भी वेंटिलेटर यहां नहीं भेजा गया है। एम्स, सफदरजंग जैसे केंद्रीय अस्पतालों के लिए कुल 390 वेंटिलेटर आवंटित किए गए थे, जिसमें से 330 वेंटिलेटर यहां पहुंचा दिए गए हैं।

वहीं वायर की रिपोर्ट के मुताबिक स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि कोरोना संक्रमण के एक्टिव मामलों के आधार पर ये आवंटन किए गए हैं। चूंकि एक्टिव मामलों की संख्या प्रतिदिन तेजी से बढ़ रही है और मंत्रालय ने पुराने आंकड़ों के आधार पर जो आवंटन किया है उसे भी अभी पूरा राज्यों को नहीं पहुंचाया गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि केंद्र सरकार किस तरह तेजी से बढ़ते इन मामलों को संभाल पाएगी। भारत सरकार का कहना है कि कोरोना संक्रमण के मामलों में से 0.35 केस में वेंटिलेटर की जरूरत पड़ रही है।