भीम आर्मी का सियासी आगाज, राजनीतिक दलों की उड़ी नींद

  • बसपा का विकल्प बनने की तैयारी
  • भीमआर्मी चीफ चन्द्रशेखर का यूपी की सियासत मेंआगाज
  • ओमप्रकाश राजभरऔर बाबूसिंह कुशवाहा का साथ
  • बुन्देलखंड और पूर्वांचल के दलित, मुस्लिम और ओबीसी वोटों निगाह
  • पंचायत चुनावों के जरिये गांवों और चौपाल तक पहुंचने की तैयारी

 

अनिल उपाध्याय

लखनऊ। देशकी राजनीति में राबिन हुड बनकर उभरे भीमआर्मी चीफ चन्द्रशेखर बखूबी जानते हैं कि देश की राजनीति मेंस्थापित होने के लिए यूपी पर पैर जमाना बेहद जरुरी है। चंद्रशेखर के साथओम प्रकाशराजभरऔर बाबू सिंह कुशवाहा के आने से राजनीतिक गलियारे में चचार्ओं का बाजार गर्म है। काफी लोग मान रहे हैं कि चंद्रशेखर बसपा के विकल्प के तौर परखुदकोस्थापित करना चाहते हैं।जिस तरह बसपा सुप्रीमों मायावती चंद्रशेखर पर आक्रामक हैं और इसकेउलट कांग्रेस उन पर नरम है, उससे तो यही लग रहा है किआने वाले समय में समीकरण बदलेगा।

भीम आर्मीके मुखिया चंद्रशेखर नयी पार्टी बनाने का ऐलान कर चुकेहै। इस पार्टी के नाम और नीतियों काऔपचारिक ऐलान 15 मार्चकोहोना है।जब से प्रदेश में मायावती ने दलित राजनीति पर अपना प्रभुत्व जमाया है, तबसे लेकरअब तक यह पहला ऐसा राजनीतिक दल होगा जो प्रदेश में दलित राजनीति के नाम पर सामने आएगा।

चंद्र शेकर फिलहाल बड़े सधे हुए कदमों सेआगे बढ़ रहे हैं। माना जा रहा है कि वे ओम प्रकाशराजभर और बाबू सिंह कुशवाहा की जन अधिकार पार्टी को साथ में लाकर भविष्य पर निगाह रखे हुए हैं। राजनैतिक विश्लेषक मानते हैं कि उनकी रणनीति ये है कि यूपी बहुजन समाज पार्टीका विकल्प कैसे बना जाय।हाल ही में दो दिन के दौरे पर लखनऊ आए चंद्रशेखरआजाद ने ओम प्रकाशराजभरसे मुलाकात की थी।इसी दौरान यह रणनीति तय हुयी कि यूपी में पैर जमाने के लिए गांव-चौपाल तक पहुंचना जरुरी है और इसके लिए पंचायत चुनावों से बेहतर दूसरा रास्ता कोई नहीं है।

अब कोशिश ये है कि पूर्वांचल और बुंदेलखंड में दलित, ओबीसी और  मुस्लिम गठजोड़ को अपने साथ किस तरह साधा जाय। इसके बाद ऐलान के बाद चन्द्रशेखर और सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाशराजभरऔर पूर्व मंत्री बाबूसे मुलाकात के बाद सियासी पाराएकदम चढ़ गया। वही सियासी गलियारे मेंहलचल मचनी शुरु हो गयी है। वैसे कहा जा रहा है कि उनकी पार्टीसेबहुजन समाज पार्टीका बड़ावोट बैंकडैमेजहोगा।आशंका तो बसपा में टूटन की भी जतायी जा रही है पर बसपा का प्रदेश नेतृत्व इससे इंकार कर रहा है।

बाबूसिंह कुशवाहा औरओम प्रकाशराजभर दोनों हीकभी बसपा सुप्रीमों मायावती की कोर टीम में शामिल थे। दोनों नेताओं इस बसपा के संगठन के विस्तार मेंअह्म भूमिका निभायी ऐसे में इनका चन्द्रशेखर के साथ आना तो यही बताता है कि तीनों की निगाह बसपा के कोर वोटरों पर है और किसी मजबूत विकल्प के अभाव में बसपा के साथखड़ा है। चन्द्रशेखर अब तक अलग-अलग आंदोलनों काचेहरा बन चुके हैं। सोशल मीडिया पर भी वह दलितों के नेता के रूप में प्रोजेक्टहुएऔर उनके बीच काफी लोकप्रिय भी हैं। स्थिति ये है कि चंद्रशेखर दलित युवाओं के एक हिस्से के बीच पोस्टर बॉय बनकर उभरे हैं।

इस राह की मुश्किलें

तमाम राजनैतिक विश्लेषक मानते हैं कि बतौर भीमआर्मी चीफ चंद्रशेखर की लोकप्रियता अलग मसला है पर उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराना आसान नहीं होगा। पहले ही यहां समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के रूप मेंदो मजबूत क्षेत्रीय दल हैं। वहीं बीजेपी-कांग्रेस जैसे राष्ट्रीय दल भी यहां मौजूद हैं। इनके बीच सियासी जगह बनाना बहुत मुश्किल काम हैं। वैसे यूपी में अपना खोया आधार पाने के लिए संघर्ष कर रही कांग्रेस भी चंद्रशेखर के राजनीतिक सफर पर नजर रखे हुएहै।

राज्य में चंद्रशेखरअगर मायावती के वोट में सेंध लगाने में कामयाब होते हैं तोकांग्रेस उन्हें संभावित सहयोगी के रूप में देख सकती है। मालूम हो कि आम चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने मेरठजाकर चंद्रशेखर से अस्पताल में मुलाकात तककी थी। वैसे भीमआर्मी प्रमुख चंद्रशे खर के सामने सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या वे यूपी में बीएसपी प्रमुख मायावती के नेतृत्व को चुनौती दे पाएंगे? क्या चंद्रशेखरदलित राजनीति में बने समीकरण को बदलने का माद्दा रखते हैं?

बसपा को अपने कोर वोटरों पर भरोसा

वहीं बसपा के प्रदेश अध्यक्ष मुनकाद अली इस संभावना को सिरे से खारिज करते हैं कि चन्द्रशेखर की पार्टी से बसपा का कोई नुकसान नहीं होना वाला है। वो कहते हैं कि बसपा लंबे समय से एक ठोस विचार धारा में चल रही और जनता को बहन मायावती पर पूरा भरोसा है। बसपाको वोट बसपा के साथ मजबूती से खड़ा है। वो कहते हैं किअक्सर स्वार्थी लोगों ने समय-समय परइस तरह की पार्टियां बनायी पर सियासी रुपसे ये दल गुमनामी मेंही हैं। एक सवाल के जवाब में वह कहते हैं कि जो लोग चंद्रशेखर से मिलने गये थे वो लोग काफी पहले ही बसपा से निष्कासित कर दिये गये हैं। कानपुर के कल्याणपुर से समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक सतीश निगम की मानें तो चन्द्रशेखर की नयी पार्टी बहुजन समाज पार्टी को ही नुकसान पहुंचायेगी। उनका कहना है नीतियां बसपा से बिल्कुल अलग हैं और नयी पाटी से समाजवादी पार्टी को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है।

हमेशा सुर्खियों बनते रहे चन्द्रशेखर

पिछले कुछ महीनों में भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर ने अपने भाषणों और गिरफ्तारियों के लिए मीडिया में काफी सुर्खियां बटोरीं।तिहाड़ जेल से जमानत पर रिहा होने के लगभग एक हफ्ते बाद चंद्रशेखर को 26 जनवरी को है दराबाद में हिरासत में लिया गया था। वह वहां सीएए के मुद्दे पर छात्रों को संबोधित करने वाले थे।इसके बाद 29 जनवरी को उन्हें बेंगलुरु के एक कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम मेंहिस्सा लेना था लेकिन इसको भीरद्द करना पड़ा।

भीमआर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर का कहना है कि राजनीति उनकी महत्वाकांक्षा नहीं, बल्कि मजबूरी है। उनका कहना है कि पार्टी अपने मौजूदा स्वरूप में संगठन के समानांतर काम करती रहेगी। भीमआर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर ने कहा कि सीएए के खिलाफ लड़ना चुनाव लड़ने से ज्यादा महत्वपूर्णहो गया था । इसलिए नयी पार्टी बनाने में थोड़ा वक्त लग गया।