कविता: मुंशी प्रेमचंद

रंजना मिश्रा कानपुर, उत्तर प्रदेश
रंजना मिश्रा कानपुर, उत्तर प्रदेश

 

 

 

 

 

 

 

 

साहित्य गगन के सूरज
तुम कलम के जादूगर थे
मानव पीड़ा परिचायक
साथी सबके घर-घर थे
जो जग में व्याप्त रही थी
मानव के उर में पीड़ा
कागज पर लिख डाली थी
जीवन की हर वो क्रीड़ा
सब दीन दुखी अबला की
गाथाएं हैं लिख डालीं
जीवन की जटिल समस्या
जो थी लोगों ने पालीं
वो सब कुछ है लिख डाला
साहित्य महासागर थे
तुम प्रेमचंद मुंशी जी
हिन्दी रस की गागर थे