‘न मौत के आंकड़े, न बेरोजगारी और घाटे के, तो जवाब क्या देगी सरकार!’

  • तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा का सरकार पर तंज

प्रमुख संवाददाता

दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने संसद के मानसून सत्र में प्रश्न काल नहीं होने पर सरकार पर तंज कसा है। टीएमसी सांसद ने कहा कि जब कल (सोमवार, 14 सितंबर) सरकार सदन में लिखित जवाब दे रही थी तब उसमें न तो प्रवासियों की मौत का आंकड़ा था, न उनके मुआवजे का कोई आंकड़ा। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कोरोना संक्रमण की वजह से की गई तालाबंदी के बाद कितने लोगों की नौकरियां गईं, इसका भी आंकड़ा सरकार के पास नहीं है। उन्होंने चुटकी ली कि केंद्र सरकार के पास तो 20 लाख करोड़ के पैकेज का भी आंकड़ा नहीं है। ऐसे में समझा जा सकता है कि केंद्र की सत्ताधारी पार्टी के लिए प्रश्नकाल की कोई आवश्यकता क्यों नहीं है?

तृणमूल सांसद ने सोशल मीडिया ट्विटर पर अपनी प्रतिक्रिया लिखते हुए कहा कि कल लोकसभा में दिए गए लिखित जवाब में न तो प्रवासियों की मौत का आंकड़ा है, न उन्हें दिए गए मुआवजे का आंकड़ा है। असंगठित क्षेत्र पर कोरोना की कितनी मार पड़ी है, इसका भी आंकड़ा नहीं है। यहां तक कि कोरोना की वजह से राज्यवार और सेक्टरवार कितनी नौकरियां गईं, इसका भी आंकड़ा सरकार के पास नहीं है। उन्होंने लिखा, “कोरोना और लॉकडाउन में मोदी सरकार द्वारा दिए गए 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज के खर्च का भी आंकड़ा सरकार के पास नहीं है। ऐसे में अंदाजा लगाना सहज है कि क्यों सरकार ने संसद में प्रश्नकाल नहीं होने दिया?

टीएमसी सांसद के ट्वीट पर लोग कड़ी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। बता दें कि मानसून सत्र के पहले दिन सरकार ने लोकसभा में एक प्रश्न के जवाब में लिखित उत्तर दिया कि लॉकडाउन की वजह से देशभर में मची भगदड़ से प्रवासी मजूरों की मौत का कोई आंकड़ा उसके पास नहीं है। सरकार ने कहा था कि जब मौत के आंकड़े ही नहीं हैं तो मुआवजा देने का सवाल ही नहीं उठता है। हालांकि, श्रम मंत्रालय ने यह माना कि लॉकडाउन की वजह से देशभर में करीब एक करोड़ प्रवासी मजदूर अपने-अपने गृह राज्य पहुंचे हैं। सरकार के इस जवाब का विपक्ष खूब आलोचना कर रहा है।