हिंदी को समझने की जरुरत

बीके मणि त्रिपाठी
बीके मणि त्रिपाठी

हिंदी के बारे में क्या कहूं? बोल चाल की भाषा या शक्ति का अन्तर्मन । जिसका आकार‌ ऋषियों ने प्रकाश मान वर्ण के रूप में सप्त चक्रों मे देखा। जो व्यष्टि ही नहीं समष्टि को अभिव्यक्त करने वाले अक्षरों के पु़ंज से बनी है। जो वाणी के माध्यम सें भीतर और बाहर प्रकाशित करती है.. वह वर्णमाला जो शिव के डमरु का निनाद है।जिस अक्षर बीज से शिव ने शक्ति की रचना की वह वैज्ञानिक वर्णमाला हिंदी की है‌।

सारी विद्यायें भाषा मे लिखी गईं,#भा का अर्थ ही प्रकाश है। प्रकाश – ज्ञान को महत्व देने वाला #भारत है। भाषा विज्ञान सिंधु नदी के इस पार बोले जाने वाली भाषा सैंधवी.. बिगड़ कर हिंदवी … और फिर हिंदी मानता है।
वेदो‌ ने कहा सृष्टि की उत्पत्ति ही पवित्र स्वर प्रणव- ‘ॐ’ कार से हुई। आकाश का गुण शब्द। आकाश से वायु,वायु से अग्नि,अग्नि से पानी और पानी ही पृथ्वी की कारण भूता है। इन पांचों से प्राणी बने,जड़ चेतन संसार बना। वनस्पतियां ,ग्रह,नक्षत्र चांद सितारे सबका कारण ‘प्रणव’ है। भीतर से बाहर की तरफ सभी वर्णों के आगमन में भी वैज्ञानिकता है। कंठ से सभी स्वर और कंठ से ओठ तक आते आते सारे व्यंजनो का उच्चारण होता है। इसलिए इसका उच्चारण सहज है।

अच्छा तो यह होता कि संस्कृत से हिंदी तक की यात्रा में सभी प्रांतीय भाषाओं का परिचय होजाता। सभी बोलियो का समादर करते हुए भाषा विज्ञान पर हम गंभीरता से शोध करके इन बीजाक्षरो के माध्यम से संसार के लोगों को शुद्ध तैजस तत्व का दर्शन कराते। वेदों के स्वरों की गूंज से विश्व चेतना को जगाते । पर हम भाषाओं के भंवर जाल मे उलझ कर रह गए। हमने अपने भीतर झांका ही नहीं।