नरेंद्र मोदी के जन्म दिन (17 सितम्बर) पर विशेष : नरेन्द्र मोदी-उभरते भारत के महानायक

आचार्य पं शरदचन्द मिश्र अध्यक्ष-रीलीजीयस स्कालर्स वेलफेयर सोसायटी गोरखपुर
आचार्य पं शरदचन्द्र मिश्र, रीलीजीयस स्कालर्स वेलफेयर सोसायटी, गोरखपुर

वर्तमान में नरेन्द्र मोदी जी भारतवर्ष के प्रधानमंत्री हैं ।इसके पूर्व भारतीय लोकतन्त्र मे और कई प्रधानमन्त्री हो चुके हैं ।उन्होंने भी देशहित में कार्य का सम्पादन किया है ।उनके कार्य काल में कुछ उपलब्धियां भी रहीं है ।शासन सत्ता की बागडोर सम्भालने के बाद उन सज्जनों ने भी देशहित मे कार्य किया ।इसको नकारा नही जा सकता है ।परन्तु तुष्टीकरण के नाम पर बहुत कुछ उन्होंने अनदेखी की ।इसका परिणाम यह हुआ कि भारत के भविष्य में विखंडन की रूपरेखा का निर्माण दिखाई देने लगा ।एक ही राष्ट्र मे जब पंथ और सम्प्रदाय के आधार पर अनेक अधिनियम आ जायें तो वह राष्ट्र कभी भी एकीकृत नही रह सकेगा।

ऐसा ही विगत कई वर्षों में हुआ कि अनेक हजहब पंथ वाले अपने-अपने धर्म और मजहब की विवेचना करते हुए पृथक-पृथक् अधिनियमों के तर्क प्रस्तुत करने लगे और सरकारें चुनावी ध्रुवीकरण के कारण उनकी मांगो को महत्व देने लगीं ।यह निरन्तर भयावह होता जा रहा था ।अल्पसंख्यको के तुष्टीकरण के नाम पर बहुसंख्यकों की उपेक्षा की जाने लगी ।भारत के बहुसंख्यक समाज में आक्रोश का समावेश होने लगा था ।परन्तु ऐसे ही समय में एक नया चेहरा देश के नक्शे पर अवतरित हुआ ,जिससे आशा की किरण दिखाई दी है ।वह है नरेन्द्र मोदी जी का अवतरण ।तथाकथित सेक्युलर और वामपंथियों के लिए वे भले ही विवादास्पद हों,परन्तु देश भक्तों के लिए वे एक मसीहा से कम नही हैं ।भारतीय संस्कृति को आत्मसात करने वाली व्यक्ति ही भारत का संवर्धन और भारतीयता की रक्षा मे समर्थ होगा।कम्युनिस्ट जनों के माडल तो रूस और चीन की साम्यवादी व्यवस्थाएं हैं और कट्टरपंथियों मुस्लिमों का माडल तो पाकिस्तान है।उन्हे यहाॅ की संस्कृति से बहुत कुछ लेना-देना नही है ।उनके लिए भारतीयता का औचित्य न के बराबर है ।

देश को अस्थिर करने में इन्होंने अनेक भूमिकाओं का निर्वहन किया है जैसे माओवादियों को समर्थन और कट्टरपंथियों को देश के विखंडन के लिए प्रेरणा इत्यादि ।सबसे बड़ी बात तो यह है कि इन्होंने कभी भी राष्ट्रभक्तों को अपना आर्दश नही माना है ।विवेकानंद,दयानन्द सरस्वती,महर्षि अरविन्द जी इनके आर्दश नही हैं ।ऐसे लोग देश को कमजोर करने में अपनी भूमिका का बखूबी निरवहन करते रहे और आज भी कर रहे हैं ।ऐसे समय में नरेंद्र मोदी का सत्ता में आगमन देश में एक आशा की किरण है कि भारतीयता की पुनर्स्थापना और सर्वजनों का विकास का विकास सुनिश्चित होगा ।

नरेन्द्र मोदी का 26मई सन् 2014से अब तक लगातार दूसरी बार भारत के प्रधानमंत्री हैं ।यह ही अभी तक होने वाले प्रधानमंत्रियों मे प्रथम है जिनका जन्म स्वतन्त्र भारत के शासन मे हुआ है ।ये 7अक्तूबर सन्2001से 22मई सन्2014तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे हैं ।राजनीति मे आने से पूर्व आर-एस-एस के कार्यकर्ता रहे और कालान्तर मे भारतीय जनता पार्टी से सम्बद्ध हुए ।गुजरात राज्य के बड़नगर मे पैदा हुए मोदी ने बचपन में चाय बेचने में अपने पिता की मदद की थी,बाद मे खुद अपना चाय का स्टाल लगाये थे। स्नातक होने के बाद अपना घर छोड़ दिये ।दो वर्ष तक भारत का भ्रमण किये और कई धार्मिक केन्द्रो का दौरा किये ।सन 1969में गुजरात वापस हुए और अहमदाबाद को अपना आवास बनाये ।सन 1971मे आर-एस-एस-के पूर्ण कार्यकर्ता बन गये थे ।1975मे जब देश में आपात काल रहा,उस समय वह छिप कर रहे ।सन 1985से सन् 2001तक भाजपा में कई पदों पर कार्य किये ।गुजरात भूकम्प सन 2001(भुज में भूकम्प)के बाद गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री कशुभाई पटेल के असफल स्वास्थ्य और खराब सार्वजनिक छवि के कारण इन्हे मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया।

गुजरात दंगों में उनके शासन को कठोर माना गया।इस दौर उनके संचालन की देश-विदेशों में आलोचना हुई ।मुख्यमन्त्री के तौर पर उनकी नीतियों को आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने का श्रेय दिया गया ।जुलाई 2006 में मोदी के एक सम्भाषण में आतंक विरोधी कानून को कठोरता से लागू न करने पर मनमोहन सरकार की आलोचना की गई थी। मुम्बई के उपनगरीय रेलों में हुए बम विस्फोटों के मद्देनजर उन्होने केन्द्र सरकार को सशक्त कानून बनाने की मांग की थी।उन्होंने कहा था–“आतंकवाद युद्ध से भी बदतर है एक आतंकवादी का कोई नियम नही होता है ।आतंकवादी केवल यही तय करता है कि कब किसको कहाँ मारना है ।भारत ने युद्धों की तुलना में आतंकवादी हमलों में ज्यादा लोगों को खोया है।बाबरी मस्जिद के लिए पिछ्ले 45वर्षों से कानूनी लड़ाई लड़ रहे 92 वर्षीय मोहम्मद हाशिम अंसारी के अनुसार भारत मे प्रधानमंत्री के उम्मीदवार के प्रान्त गुजरात में मुसलमान ज्यादा खुशहाल और समृद्ध हैं,जबकि कांग्रेस हमेशा मुसलमानों में मोदी का भय उत्पन्न करती है ।दिसम्बर 2014को भारत यात्रा के दौरान आस्ट्रेलिया के टोनी एबाट ने कहा था कि गुजरात के दंगों के लिए मोदी को दोषी नही ठहराना चाहिए, क्योंकि उस समय वह एक पीठासीन अधिकारी थे और अनगिनत जांचों मे यह सिद्ध भी हो चुका है ।इनके प्रारम्भिक गुरू राष्ट्रीय स्वयंसेवक के लक्ष्मणराव इमानदार थे जिन्होंने इनको राष्ट्रीय प्रेम और भारतीय मूल्यों की शिक्षा प्रदान की थी ।ये एक मेहनती कार्यकर्ता थे और आर-एस-एस के शिविरों में मैनेजमेंट का हुनर दिखाते थे ।प्रारम्भिक दौर मे इन्होंने हिन्दुत्व और राष्ट्रीय चिन्तन पर कई लेख भी लिखे हैं जो प्रकाशित है।

स्वामी विवेकानंद जी इनके प्रेरणास्रोत हैं। अमर्त्य सेन जी कहा है कि कट्टरपंथियों मुस्लिमों मे मोदी की स्वीकार्यता संदिग्ध हो सकती है परन्तु वही सुप्रसिद्ध विद्वान जगदीश भगवती और अरविन्द पानगढ़िया को मोदी जी का अर्थशास्त्र और सुशासन अच्छा लगा है और उन दोनो ने अपनी रचनाओं मे इसकी प्रशंसा की है ।देश भक्तों में और भारतीय संस्कृति के उत्प्रेरक योग गुरू बाबा रामदेव और कथावाचक मुरारी जी ने मोदी की नीतिगत कार्य शैली का समर्थन किया है ।मोदी के जीवन पर आधारित पुस्तकों में-“नरेन्द्र मोदी-अ पोलिटिकल बायोग्राफी-“जो एन्डी मरिनो द्वारा लिखित है,में मोदी के व्यक्तित्व और राजनीति जीवन का स्पष्ट तस्वीर प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।यह पुस्तक मोदी के शासन के तरीकों को बेहतर ढंग से समझाने में उत्तम कृति है ।इसमे गुजरात माडल के शासन पर विपरीत दृष्टिकोण रखने वालों को समझाने में एक विष्लेषण है।एन्डी मैरिनो की यह कृति मोदी के बचपन से युवा होने तक की-जीवन यात्रा से अवगत कराती है,जो भारत के प्रधानमंत्री बनने की राह पर अग्रसर हुए ।इसी तरह यदि मोदी के समग्र जीवन दर्शन को जानना चाहें तो उदय महाकर की कृति-“सेन्टर स्टेज–इन साइड द नरेन्द्र मोदी माडल आफ गवर्नेस “–में मोदी के सन्तुलित और नैतिक शासन के मन्त्र पर प्रकाश डाला गया है ।इस पुस्तक में महाकर ने मोदी की दूरदर्शी योजनाओं की चर्चा की गई है और मुद्दों की भी चर्चा है जिस पर मोदी जी ज्यादा ध्यान दे सकते हैं।

पुस्तक मे बताया गया है कि मोदी ने किस प्रकार गुजरात राज्य को बदल दिया और उनके कार्य शैली का विष्लेषण किया गया है ।विवियन फर्नांडीज ने अपनी पुस्तक में मोदी को एक उदार भारतीय शासक के रूप मे चिह्नित किया है। एम-वी कामथ और कालिंदी रेंदेरी द्वारा लिखित-“द मैन आफ द मोमेन्ट “-में मोदी को सफल और विकास पुरूष के रूप में चिह्नित किया गया है।उनका कथन है कि मोदी ने भारत में भारत में राजनीति की सीमाओं का विस्तार किया है,क्योंकि राजनीति का ध्रुवीकरण वंश और परिवारवाद की ओर अग्रसर हो रहा है ।वे आलोचना के सामने दृढ़ता के साथ खड़े रहने वाले हैं और उनको सहनशक्ति असीम है ।इसी तरह किन्ग्शुक नाग ने-“द नमो स्टोरी-” में एक चाय विक्रेता के पुत्र से गुजरात के मुख्यमंत्री तक के सफर तक का वर्णन है ।