सबकी मुराद पूरी करती माता

  •  लेहड़ा देवी के दर्शन को उमड़ती है भक्तों की जन सैलाब

महराजगंज। आद्रवनवासिनी लेहड़ा देवी मन्दिर पूर्वांचल का प्रसिद्द शक्तिपीठ है जहा पड़ोसी राष्ट्र नेपाल सहित पूर्वी उत्तर प्रदेश के लाखों लोगों की आस्था एवं विश्ववास का केन्द्र है। माना जाता है कि सच्चे मन से मांगी गयी यहां हर मुराद पूरी होती है। लेहड़ा दुर्गामन्दिर का पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व है।माता आद्रवनवासिनी शक्तिपीठ लेहड़ा दुर्गा मन्दिर को महाभारत काल से जुड़ा हुआ माना जाता है। मान्यता है कि पाडण्वों ने अपने अज्ञातवास के दौरान काफी समय यहीं व्यतीत किया था। पाण्डु पुत्र भीम द्वारा मन्दिर में स्थित पिण्डी की स्थापना की गयी थी। पाण्डवों ने यहां जगत जननी मां जगदम्बे की उपासना और अराधना की थी।गुप्त काल में भारत भ्रमण पर आए चीनी यात्री ह्वेंनसांग ने भी अपने यात्रा वृतांत में भारत प्रवास के दौरान इस मन्दिर के बारे में लिखा है। अन्य पौराणिक कथाओं के आधार पर भी कहा जाता है कि किसी समय यहाँ से होकर पवह नदी बहा करती थी आज भी वह पवह नाले के रूप में मन्दिर के पीछे मौजूद है।

नाविक को दिए थे सुंदर कन्या के रूप में दर्शन|

किंवदंती है कि एक बार देवी सुन्दर कन्या के रूप में नाव से नदी को पार कर रही थीं। उनकी सुन्दरता देखकर नाविक के मन में दुर्भावना आ गई और उसने मां को छूने का प्रयास किया। उसी समय देवी अपने विलक्षणरूप में आ गई। यह देख नाविक घबराकर उनके पैरो में गिर गया और क्षमा याचना करने लगा।
मां को दया आ गई और उन्होंने नाविक को वरदान दिया कि जब भी श्रद्धालु उनके दर्शन के लिए आद्रवन शक्तिपीठ आएंगे तो नाविक को भी याद करेंगे। मन्दिर के पूरब दिशा में एक नाव पर देवी की प्रतिमा मौजूद है। मन्दिर का मुख्य प्रसाद नारियल व चुनरी है।

बृजमनगंज थाना क्षेत्र के लेहड़ा

दुर्गा मंदिर पर नवरात्र के पहले दिन मन्दिर पर श्रद्धालुओं की भीड़ के मद्देनजर प्रसाशन की ओर से कड़ी सुरक्षा के लिए बृजमनगंज थाना सहित 5 एसो , 15 एसआई ,15 महिला कांस्टेबल ,80 पुरुष कंटेबल तीन ट्रैफिक पुलिस , एक सेक्शन पी ए सी ,एक एपी गार्ड , एक फायर ब्रिगेड वाहन और मंदिर के अंदर बहार दस सीसी कैमरे व गेट पर वैरिकेटिंग का बंदोबस्त है।थानाध्यक्ष संजय दुबे ने बताया कि मेले की सुरक्षा में पूरी तरह मुस्तैदी के साथ पुलिस कर्मी को तैनात किया गया है । मंदिर परिसर के इर्द गिर्द व मेले में टहल कर रक्षासूत बांधने वाले कथित बाबाओं पर होगी कार्यवाही।

मन्दिर के महन्थ देवीदत्त पाण्डेय ने बताया कि दर्शन के लिए श्रद्धालुगण सोशल डिस्टेंसिंग के साथ मास्क लगाकर ही आएं अन्यथा मन्दिर में प्रवेश नही मिलेगा, मुख्य द्वार पर थर्मल स्क्रीनिंग होगी और द्वार पर ऑटोमेटिक सेनेटेजर स्प्रे लगा हुआ है। मन्दिर के अंदर दूर दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए ठहरने का पूरा प्रबन्ध किया गया है उनके लिए भंडार गृह में भोजन करने का भी व्यवस्था है।
मन्दिर और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए मन्दिर की ओर से 10 सीसी कैमरा लगाया गया है। इसके साथ 10 स्वयं सेवक और 15 समाज सेवी भी सुरक्षा व्यवस्था में साथ देंगे।

तपो भूमि में मिलती है अद्भुभुद शांति।

फरेन्दा/ बृजमनगज। हिटी0

आद्र्वन लेहड़ा देवी मन्दिर से सटे बहुत ही पवित्र स्थली तपो भूमि पौहारी बाबा का आश्रम है जहां अनेक साधु-संतो की समाधियां हैं, जो इस तपस्थली से संबंधित रहे और अपने जीवनकाल में यहां तपस्यारत रहे।वर्तमान में आश्रम कुल 1 एकड़ 15 डिसमिल के परिक्षेत्र में फलदार वृक्ष और विभिन्न आकर्षक पुष्प के पौधों से आच्छादित है । आश्रम में दर्जनों गाय भी है । जलाशय से सटे इस आश्रम में बहुत ही शांति का अनुभूति होती है।आश्रम में देश के कोने कोने से साधू सन्यासी आते है । आश्रम में परम्परागत प्रतिदिन सुबह शाम भंडारा चलता है

एक प्रसिद्ध कहानी के अनुसार इस आश्रम पर पवहारी बाबा रहते थे उनका नाम आज भी संतों द्वारा अत्यंत आदर के साथ लिया जाता है। वह एक सिद्ध योगी के रूप में विख्यात रहे है। योग बल पर उन्होंने कई चमत्कार और लोक कल्याण के कार्य किए थे। बाबा की शक्ति एवं भक्ति से प्रभावित कई वन्य जीव- जंतु भी उनकी आज्ञा के वशीभूत रहे। इनमें एक शेर एंव मगरमच्छ आज भी चर्चा के विषय बनते हैं, जिन्हें पवहारी बाबा ने शाकाहारी जीव बना दिया था।

बताते चले कि स्व0 श्री 1008 तपोनिष्ठ पयोहारी दास इनके ही नाम से इस पावन स्थली का नाम पौहारी बाबा पड़ा। आश्रम में पौहारी बाबा की धूनी व गद्दी आज भी मौजूद है। यहां से दूर दूर के लोगो में बड़ी आस्था है की धूनी से तैयार भभूत बीमारी के इलाज में रामबाण साबित होता है ,आश्रम से सटे जलाशय है लोगो बताते है पौहारी बाबा को ऐसी सिद्धि प्राप्त थी जिससे खड़ाऊं पहनकर जल के ऊपर चलते थे और जलाशय में एक मगरमच्छ था जिसे पौहारी बाबा भुवरी नाम से बुलाते थे वे उसकी पीठ पर बैठ कर लेहड़ा देवी की पिंडी तक दर्शन के लिए जाते थे । सिद्ध पुरुष पवहारी बाबा ने अपने तपोबल से मगरमच्छ शाकाहारी बना दिया था जब बाबा मगरमच्छ को भुवरी नाम से बुलाते तो बाबा के पुकारने से भुवरी जलाशय से निकलकर उनके पास आ जाता और तब अपने हाथ से नियमित लिट्टी खिलाते थे ।

आश्रम में बनी हुई है सात समाधियां

पौहारी बाबा के समाधी के पश्चात् आश्रम की गद्दी स्व0 पूरनदास जी महराज उसके बाद क्रम से राम कुमार दास नागा बाबा ,राम प्रसाद जी महराज, सीताराम दास बाबा,शारदा दास जी महराज ने गद्दी संभाली।

वर्तमान में बिगत 7 वर्षो से अरविन्द गिरी नागा बाबा जी आश्रम की गद्दी संभाले हुए है।