आइए जाने आज का हिन्दू पंचांग

Dr. Umashankar Mishra

दिनांक 16 सितम्बर 2020
दिन – बुधवार
विक्रम संवत – 2077
शक संवत – 1942
अयन – दक्षिणायन
ऋतु – शरद
मास – अश्विन
पक्ष – कृष्ण
तिथि – चतुर्दशी Sayam 18: 57 तक तत्पश्चात अमावस्या
नक्षत्र – मधा दोपहर 11: 59 तक तत्पश्चात पूर्वाफाल्गुनी
योग – सिद्ध सुबह 07:42 तक तत्पश्चात साध्य
राहुकाल – दोपहर 12: 0 0 से दोपहर 0 1: 30 तक
सूर्योदय – 0 5 : 54
सूर्यास्त – 18: 0 6
दिशाशूल – उत्तर दिशा में

विशेष – चतुर्दशी, अमावस्या, श्राद्ध और व्रत के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करे तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है।

सर्व पितृ अमावस्या

श्राद्ध पक्ष की अमावस्या को सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या कहते हैं। मान्यता है कि इस दिन सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों का श्राद्ध करने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस बार 17 सितम्बर, गुरुवार को यह अमावस्या है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, श्राद्ध पक्ष की अमावस्या पर कुछ विशेष उपाय करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और पितृ दोष भी कम होता है। इसलिए इस दिन भी ये उपाय किए जा सकते हैं।

पीपल में पितरों का वास माना गया है ।सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या पर पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं और गाय के शुद्ध घी का दीपक लगाएं।

सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या पर किसी ब्राह्मण को भोजन के लिए घर बुलाएं या भोजन सामग्री जिसमें आटा, फल, गुड़ आदि का दान करें।

इस अमावस्या पर किसी पवित्र नदी में काले तिल डालकर तर्पण करें ।इससे भी पितृगण प्रसन्न होते हैं।

सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या पर अपने पितरों को याद कर गाय को हरा चारा खिला दें ।इससे भी पितृ प्रसन्न व तृप्त हो जाते हैं।

इस अमावस्या पर चावल के आटे से 5 पिडं बनाएं व इसे लाल कपड़े में लपेटकर नदी में प्रवाहित कर दें।

अमावस्या पर गाय के गोबर से बने कंड़े को जलाकर उस पर घी-गुड़ की धूप दें और पितृ देवताभ्यो अर्पणमस्तु बोलें।

इस अमावस्या पर कच्चा दूध, जौ, तिल व चावल मिलाकर नदी में प्रवाहित करें ।ये उपाय सूर्योदय के समय करें तो अच्छा रहेगा।

सर्व पितृ अमावस्या

पितृ पक्ष का आखिरी दिन पितृ अमावस्या होती है। इस दिन कुल के सभी पितरों का श्राद्ध किया जा सकता है। फिर चाहे उनकी मृत्यु तिथि पता न हो। तब भी आप पितृ अमावस्या पर उनका तर्पण कर सकते हैं।

पितृ पक्ष की अमावस्या को सूर्यास्त से पहले ये उपाय करना है। इस उपाय में एक स्टील के लोटे में, दूध, पानी, काले व सफेद तिल और जौ मिला लें। इसके साथ कोई भी सफेद मिठाई, एक नारियल, कुछ सिक्के और एक जनेऊ पीपल के पेड़ के नीचे जाकर सबसे पहले ये सारा सामान पेड़ की जड़ में चढ़ा दें। इस दौरान सर्व पितृ देवभ्यो नम: का जप करते रहें।

ये मंत्र बोलते हुए पीपल को जनेऊ भी चढ़ाएं। इस पूरी विधि के बाद मन में सात बार ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जप करें और भगवान विष्णु से कहें मेरे जो भी अतृप्त पितृ हों वो तृप्त हो जाए। इस उपाय को करने से पितृ तृप्त होते हैं पितृ दोष का प्रभाव खत्म होता है और उनका अशीर्वाद मिलने लगता है। हर तरह की आर्थिक और मानसिक समस्याएं दूर होती हैं।

सर्व पितृ अमावस्या

जिन्होंने हमें पाला-पोसा, बड़ा किया, पढ़ाया-लिखाया, हममें भक्ति, ज्ञान एवं धर्म के संस्कारों का सिंचन किया उनका श्रद्धापूर्वक स्मरण करके उन्हें तर्पण-श्राद्ध से प्रसन्न करने के दिन ही हैं श्राद्धपक्ष।चीटियों को खिलाएं यह भोजन सर्व पितृ अमावस्या पर काली चीटियों को शक्कर मिला हुआ आटा खिलाएं। ऐसा करने से आपको सभी पापों से मुक्ति मिलेगी।

जिस प्रकार चारागाह में सैंकड़ों गौओं में छिपी हुई अपनी माँ को बछड़ा ढूँढ लेता है उसी प्रकार श्राद्धकर्म में दिए गये पदार्थ को मंत्र वहाँ पर पहुँचा देता है जहाँ लक्षित जीव अवस्थित रहता है।

पितरों के नाम, गोत्र और मंत्र श्राद्ध में दिये गये अन्न को उसके पास ले जाते हैं, चाहे वे सैंकड़ों योनियों में क्यों न गये हों। श्राद्ध के अन्नादि से उनकी तृप्ति होती है। परमेष्ठी ब्रह्मा ने इसी प्रकार के श्राद्ध की मर्यादा स्थिर की है।”

सर्व पितृ अमावस्या को पितर भूमि पर आते हैं । उस दिन अवश्य श्राद्ध करना चहिये।

उस दिन श्राद्ध नही करते हैं तो पितर नाराज होकर चले जाते हैं ।

आप यदि उस दिन श्राद्ध करने में सक्षम् नही हैं तो उस दिन तांबे के लोटे में जल भरकर के भगवदगीता के सातवें अध्याय का पाठ करें और मंत्र “ॐ नमो भगवते वासुदेव”एवं ” ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं स्वधा देव्यै स्वाहा” की 1-1 माला करके सूर्यनारायण भगवान को जल का अर्घ्य दें । और सूर्य भगवान को बगल ऊँची करके बोले की मैं अपने पितरों को प्रणाम करता हूँ।

वे मेरी भक्ति से ही तृप्तिलाभ करें। मैंने अपनी दोनों बाहें आकाश में उठा रखी हैं।और जिनका श्राद्ध किया जाये उन माता, पिता, पति, पत्नी, संबंधी आदि का स्मरण करके उन्हें याद दिलायें किः “आप देह नहीं हो। आपकी देह तो समाप्त हो चुकी है, किंतु आप विद्यमान हो।

आप अगर आत्मा हो.. शाश्वत हो… चैतन्य हो। अपने शाश्वत स्वरूप को निहार कर हे पितृ आत्माओं ! आप भी परमात्ममय हो जाओ। हे पितरात्माओं ! हे पुण्यात्माओं !अपने परमात्म-स्वभाव का स्मऱण करके जन्म मृत्यु के चक्र से सदा-सदा के लिए मुक्त हो जाओ। हे पितृ आत्माओ !

आपको हमारा प्रणाम है। हम भी नश्वर देह के मोह से सावधान होकर अपने शाश्वत् परमात्म-स्वभाव में जल्दी जागें…. परमात्मा एवं परमात्म-प्राप्त महापुरुषों के आशीर्वाद आप पर हम पर बरसते रहें…. ॐ….ॐ…..ॐ….” पितृपक्ष के विषय में शास्त्रों में बताया गया है कि इन दिनों मनुष्य को अपना आचरण शुद्ध और सात्विक रखना चाहिए। इसलिए भोजन में मांस-मछली, मदिरा और तामसिक पदार्थों से परहेज रखना चाहिए।

क्योंकि आप जो भोजन करते हैं उनमें से एक अंश पितरों को भी प्राप्त होता है। इन दिनों मन और भावनाओं पर नियंत्रण रखने का प्रयास करें और काम-वासना से बचें। ज्योतिषशास्त्र में बताया गया है कि जिनके पितर नाराज हो जाते हैं उनकी ग्रह दशा अच्छी भी हो तब भी उनके जीवन में हर पल परेशानी बनी रहती है।

श्राद्ध पक्ष में सयंम-नियम पालन करें, नहीं तो पितर देंगे शाप…

श्राद्ध पक्ष में गाय को गुड़ के साथ रोटी खिलाएं और कुत्ते, बिल्ली और कौओं को भी आहार दें। इससे पितरों का आशीर्वाद आप पर बना रहेगा।

यदि पितृ दोष के कारण आपका संघर्षमयी जीवन हो तो गौ माता को प्रतिदिन रोटी, गुड़, हरा चारा आदि खिलाएं। अगर प्रतिदिन ना खिला सके तो सिर्फ हर अमावस्या के दिन खिलाने से भी पितृ दोष समाप्त होता है।

अश्विन अमावस्या मुहूर्त

  • अमावस्या तिथि शुरू: 18: 57 बजे से (सितंबर 16, 2020)
  • अमावस्या तिथि समाप्त: 16: 56 बजे (सितंबर 17, 2020)

पंचक

  • 28 सितंबर 09:41 सुबह से 3 अक्तूबर 08:51 सुबह तक

एकादशी

  • पद्मिनी एकादशी – 27 सितंबर 2020
  • परम एकादशी – 13 अक्टूबर 2020
  • पापांकुशा एकादशी – 27 अक्टूबर 2020

प्रदोष

  • 29 सितंबर ( मंगलवार ) भौम प्रदोष व्रत ( शुक्ल )
  • 14 अक्‍टूबर ( बुधवार ) प्रदोष व्रत ( कृष्ण )
  • 28 अक्‍टूबर ( बुधवार ) प्रदोष व्रत ( शुक्ल)

अमावस्या

  • गुरुवार, 17 सितंबर अश्विन अमावस्या
  • शुक्रवार, 16 अक्टूबर आश्विन अमावस्या (अधिक)

पूर्णिमा

  • गुरुवार, 01 अक्टूबर आश्विन पूर्णिमा व्रत (अधिक)
  • शनिवार, 31 अक्टूबर अश्विन पूर्णिमा व्रत