प्रशिक्षण शिविर में किसानों को दी सरसों की खेती की जानकारी

  • आधुनिक एवं उन्नतिशील तकनीकियों को कृषक प्रक्षेत्र तक पहुंचाना है

बांदा  । कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय ने भारतीय सरसों अनुसंधान निदेशालय द्वारा वित्त पोषित योजना के अंतर्गत प्रथम पंक्ति प्रदर्शन हेतु बीज वितरित किये। प्रथम पंक्ति प्रदर्शन चयनित कृषकों के प्रक्षेत्रों पर प्रदर्शन हेतु लगाये जायेंगे। इस परियोजना में बांदा जिले के कई ग्रामों के पचास कृषकों को सरसों की प्रजाति एनआसीएचबी 101 का बीज वितरित किया गया। बीज के साथ कान्तिक आदान के रूप में सल्फर उर्वरक तथा फसल सुरक्षा हेतु दो रोगनाशी भी वितरित किये।

प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य कृषकों को सरसों फसल की आधुनिक एवं उन्नतिशील तकनीकियों को कृषक प्रक्षेत्र तक पहुंचाना है। जिससे सरसों की अधिक से अधिक पैदावार हो सके। इस अवसर पर किसानों को तकनीकी जानकारी देने के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति डा यूएस गौतम ने की। कुलपति ने कहा कि कृषकों को तकनीकी जानकारी एवं प्रबंधन के बारे में ससमय जानकारी देना कृषि वैज्ञानिक एवं प्रसार कार्यकर्ता का मुख्य कार्य है। साधारण तया सरसों की फसल में तेल की मात्रा बढाने हेतु सल्फर की आवश्यकता होती है।

परंतु ज्यादातर किसान सल्फर का प्रयोग बुआई के समय अथवा बाद में नहीं करते है। जिससे उत्पादन पर असर पडने के साथ तेल के परतों में भी कमी आती है। उन्होंने किसानों से अपील की कि सरसों की फसल में बुआई के समय और आवश्यकता पडने पर खडी फसल में भी सल्फर का प्रयोग अवश्य करें। किसानों को सलाह देते हुए कहा कि सरसों की वैज्ञानिक खेती के साथ साथ विश्वविद्यालय के साथ जुड कर वैज्ञानिकों से तकनीकी ज्ञान का लाभ लें। कहा कि किसान विश्वविद्यालय परिसर में स्थित कृषि प्रणाली मंडल, फल, वृक्षों की बागवानी तथा अन्य प्रयोगों को देखने का सुझाव देते हुए उन्नत तकनीक से कृषि करने का सुझाव दिया।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए डा धर्मेंद्र कुमार ने सरसों की प्रमुख बीमारियों के रोग निवारण के बारे में बताया। प्रशिक्षण के दौरान विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों द्वारा सरसों फसल के अधिक उत्पादन हेतु विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। डा अमित कुमार सिंह, डा हितेश कुमार डा मुकेश कुमार ने सरसों की वैज्ञानिक खेती पर महत्वपूर्ण जानकारियां दी। डा विवेक सिंह ने प्रथम पंक्ति प्रदर्शन पर अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि सरसों की फसल में तीन मुख्य बातें बुआई का समय, बीज दर तथा खेत में नमी का विशेष तौर से ध्यान रखने का आवाहन किसानों से किया। कार्यक्रम में कृषि अधिष्ठाता डा जीएस पवार, निदेशक बीज एवं प्रक्षेत्र डा मुकुल कुमार, डा अखिलेश कुमार, डा नरेंद्र सिंह आदि ने भी संबोधित किया।

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