क्या निजीकरण ही एक मात्र‌ विकल्प?

  • प्राईवेट मैनेजमेंट आखिर कैसे सुधार लेगी?
  • सरकारी प्रशासन तंत्र कौन सुधारेगा?
  • भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के बजाय पलायन क्यो??
बीकेमणि त्रिपाठी
बीकेमणि त्रिपाठी

यह सच है, भ्रष्टाचार नीचे से ऊपर तक फैल गया है। परंतु इसके लिए जनता को दंड नहीं दिया जा सकता। आम जनता सरकारी सेवाओ से कम खर्च मे संसाधनों का उपयोग चाहती है। इस भ्रष्टाचार पर लगाम लगा पाने मे असमर्थ क्यों हो रहे हैं। सरकार सारे सिस्टम का प्रयोग करेगी कि नहीं ? आईएस, पीसीएस अधिकारी ,आई पीएस ,पीपीएस आधिकारी की नियुक्ति के साथ सारे विभाग क्या बंद कर सबका निजीकरण किया जायेगा?? या मंत्री,सांसद,विधायक मात्र ईमानदार हैं। बाकी सभी भ्रष्ट हैं । जरा ठंढे दिमाग से विचार कीजिए। शिक्षक भ्रष्ठ,अधिकारी भ्रष्ट,कर्मचारी भ्रष्ट… चिकित्सक और इंजीनियर भ्रष्ट । यदि सारे विभागीय और चिकित्सा कर्मी भ्रष्ट तो कहां तक सबको निकाल बाहर करेंगे??

प्रधान बनते ही उनका बैंक बैलेंस बढ़ जाता है,वे भी तो इन्हीं केटगरी में आएंगे। जो आधिकारी भ्रष्टाचार की जा़ंच करने जारहा है वह क्या पाक साफ है? आडिट करने‌वाला और जांच करने वाले पैसे नहीं लेते ?? कृपया भ्रष‌्टाचार के खिलाफ कुछ कर सकें तो करें ।किंतु निजीकरण उसका कोई विकल्प नहीं ।

जहां सिस्टम बीमार है,उस बीमारी की दवा करिये न। जंगल में शेर है..वह जानवरों को खाजाता है. इसलिए जंगल जला दिया जाय ,यह क्या विकल्प है? चुनाव के पूर्व गरीब विधायक या सा़ंसद पांच सालों मे करोड़ों की संपदा का मालिक कैसे बन जाते हैं? जवाब है, आपके पास। फिर संसद और विधान सभा को निजीकरण की भेंट कर सकेंगे क्या? फिर सेना और पुलिस प्रशासन की नियुक्ति करने वा्ला कहां से लाएंगे? निजी करण ही विकल्प है तो शुरु कीजिए सबका आमूल चूल परिवर्तन । अन्यथा भ्रष्टों पर कैसे लगाम लगे उस पर दिमाग लगाईये।