प्रवासी श्रमिकों के मौत के आंकड़ों के मामले दिए बयान पर चौतरफा आलोचना के बाद सरकार ने दी अब यह ‘सफाई

  • श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने कल दिया था बयान, आंकड़ा मेंटेन नहीं है, मुआवजे का कोई सवाल ही नहीं उठता

प्रमुख संवाददाता

नयी दिल्ली। लॉकडाउन के दौरान प्रवासी श्रमिकों की मौत की जानकारी का कोई आंकड़ा उपलब्‍ध न होने की बात कहकर चौतरफा निशाने पर आई केंद्र सरकार ने आज इस मामले में सफाई दी। बुधवार को सरकार ने कहा कि जिलों में ऐसा डाटा एकत्रित करने का कोई ‘मैकनिज्‍म’ नहीं है। अधिकारियों ने कहा कि कई दशकों से स्‍थापित मानदंडों के अनुसार, जन्‍म और मृत्‍यु से संबंधित आंकड़े नगरीय निकाय के स्‍तर पर रखे जाते है। सूत्रों ने कहा कि नगरीय निकाय स्‍तर पर किसी जिले में प्रवासी मजदूरों की मौत से संबंधित डाटा एक‍त्र करने का तंत्र मौजूद नहीं है। ऐसे में इस मामले में श्रम मंत्रालय की ओर से अपनाए गए रुख पर सवाल उठाना सही नहीं है।

केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने सोमवार को लोकसभा में जानकारी दी थी कि प्रवासी मजदूरों की मौत पर सरकार के पास आंकड़ा नहीं है। ऐसे में मुआवजा देने का ‘सवाल नहीं उठता है। दरअसल, सरकार से पूछा गया था कि कोरोना वायरस लॉकडाउन में अपने परिवारों तक पहुंचने की कोशिश में जान गंवाने वाले प्रवासी मजदूरों के परिवारों को क्या मुआवजा दिया गया है? सरकार के इस जवाब पर विपक्ष की ओर से खूब आलोचना और हंगामा हुआ था। श्रम मंत्रालय ने माना है कि लॉकडाउन के दौरान 1 करोड़ से ज्यादा प्रवासी मजदूर देशभर के कोनों से अपने गृह राज्य पहुंचे हैं। वैसे सरकार इस मुद्दे पर आज डेमेज कंट्रोल के मूड में नजर आई। श्रम मंत्रालय की ओर से कोविड-19 संकट के दौरान प्रवासी श्रमिकों के कल्‍याण के लिए किए गए उपायों के बारे में जानकारी दी गई।

गौरतलब है कि कोरोनावायरस के बीच हो रहे पहले संसदीय सत्र में मंत्रालय से पूछा गया था कि क्या सरकार के पास अपने गृहराज्यों में लौटने वाले प्रवासी मजदूरों का कोई आंकड़ा है? विपक्ष ने सवाल में यह भी पूछा था कि क्या सरकार को इस बात की जानकारी है कि इस दौरान कई मजदूरों की जान चली गई थी। क्या उनके बारे में सरकार के पास कोई डिटेल है? साथ ही सवाल यह भी था कि क्या ऐसे परिवारों को आर्थिक सहायता या मुआवजा दिया गया है? इस पर केंद्रीय श्रम मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने अपने लिखित जवाब में बताया था कि ‘ऐसा कोई आंकड़ा मेंटेन नहीं किया गया है। ऐसे में इस पर कोई सवाल नहीं उठता है।