सृजन -पालन- संहार की देवी मां, समय

बीकेमणि
हर इंसान जीवन एक कालखंड है,जिसमे वह जीता है । जन्म और मृत्यु काल खंड के आदि और अंत हैं । जिन दो सीमाओं के बीच जीवन की चार अवस्थायें गुजरती हैं । ब्रह्मचर्य, गृहस्थ ,वानप्रस्थ और संन्यास। हाथी की मूर्ति काल का प्रतीक है जो परम शक्ति शाली है । वास्तव मे यह वह शक्ति है,जिसे अदृश्य होते हूए भी हर प्राणी आनुभव करता है । किसी देश, जाति,समुदाय अथवा संप्रदाय का व्यक्ति हो, वह समय की बलवत्ता स्वीकार करता है । ‘समय होत बलवान’ यह बारंबार सभी‌ के मुख से निकलता है । सनातन काल से चली आरही समय को देवी के रुप मे पूजने की परंपरा रही ।

जिसके प्रतीक रुप मे हाथी की मूर्ति रखी जाती है । पहले शक्ति के आकलन का मानक हाथी की ताकत रही । भीम के हाथो मे दस- दस हजार #हाथियों की ताकत थी ,महाभारत मे वर्णित है । वैसे भी धरती को दसो दिशाओं से थामने वाले दस #दिग्गज ही कहलाते हैं ।पुराने समय से ही हर राज्य और हर गांव मे ग्राम देवी कै नाम से मां काली या समय माता की पूजा होती रही है । जिनके साथ शिव असंम्पृक्त होकर रहते है ।

कोई भी राजा विजय यात्रा की शुरुआत देवी का आशीर्वाद लेकर ही करता था ।   खलीलाबाद की मां समय खलीलुर्रहमान के किले के खंडहर के पास हैं । जो उन्हीं के समय से आदर पूर्वक स्थापित कराई गई थीं । अंग्रेजों के आने के बाद अश्वशक्ति( हार्सपावर) शक्ति मापन का मानक बना ।
लहुरादेवा की मा़ं समय

संतकबीरनगर के ऐतिहासिक स्थल को देखा। जहां टीले की खुदाई के बाद पुरातात्विक प्रमाण मिले ‌। यहां खुदाई से मिले धान की जली भूसी की कार्बन डेटिंग के अनुसार दस हजार साल पहले धान की खेती के प्रमाण मिले । यहां टीले की खुदाई उप्र के पुरातत्वविद राकेश तिवारी के नेतृत्व मे किया गया ‌‌ । खुदाई मे बहुत सारी महत्वपूर्ण सामग्रियां व अवशेष मिले । कालांतर में उस समय के महल,आवास सब ढह गए ,टीला बन गया । यह समय का फेर था ‌। टीले पर कालांतर में हाथी की मृण्मय मूर्ति रख कर उसे ‘समय महारानी’ कहा गया । कभी कहीं पर बड़ा महल बन जाना और कभी महल ढह कर मिट्टी मे मिल जाना यह वक्त का ही तकाजा है ।
कोपिया की सम्मय माता

ऐसे ही ऐतिहासिक स्थल कोपिया का टीला देखने का अवसर मिला ‌। खुदाई मे बुद्ध कालीन टेरा कोटा की मातृ मूर्तियां ,चक्र,कुषाण कालीन सिक्के ,बीज और बड़े राजमहल के अवशेष दबे मिले ‌। यहां की खुदाई दक्षिण भारत के पुरातत्व के प्रोफेसर ने कराई थी । यहां मिले हुई सामग्रियां व अवशेष दो हजार साल और १४०० साल पहले के आकलित हैं , कभी जहां राजाओं और जमीदारों की तूती बोलती थी,वहां कोई इंसान अब नहीं रहता । समय ही शक्ति शाली है ।
संसार मे जन्म लेने वाला प्राणी आपने कालखंड का महत्त्वपूर्ण प्राणी है । जब जिसका समय बलशाली होता है ,उसकी तूती बोलती है । समय कमजोर हुआ तो उसे कोई पहचानता भी नहीं । इसलिए न तो किसी की निंदा करो और न स्तुति ,अपने समय को संभाल कर उसका सदुपयोग करना सीखो ताकि सदियों तक तुम्हारा यश कायम रहे ।

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