मातृ-शिशु मृत्यु में कमी लाने में परिवार नियोजन अहम

  • लाभार्थियों की पसंद के मुताबिक ही दें सलाह
  •  अंतरा लगाने के बाद रगड़ने से कम होता है इंजेक्शन का प्रभाव
  •  फिल्म के जरिए एएनएम को दिया काउंसिल प्रशिक्षण

बांदा  । परिवार नियोजन साधनों पर लोगों को जागरूक करने के मकसद से स्वास्थ्य विभाग हर संभव प्रयास कर रहा है। जिला से सामुदायिक स्तर पर कई जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर, सब सेंटर व नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात एएनएम को प्रोजेक्टर और फिल्म के माध्यम से एक दिवसीय काउंसिल प्रशिक्षण दिया गया। जिसमें सभी ब्लाक की 40 एएनएम ने प्रतिभाग किया। मंगलवार को मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय सभागार में आयोजित प्रशिक्षण में प्रशिक्षक सुधीर कुमार गुप्ता (स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी, बबेरू) ने कहा कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए परिवार नियोजन की बहुत ही अहम भूमिका है।

इसको अपनाकर कम उम्र में गर्भावस्था व कम अंतराल पर गर्भवती होने से बच्चों में जोखिम व खतरा, व इससे बढ़े एनीमिया के कारण गर्भावस्था में होने वाली जलिटता से बचा जा सकता है। उन्होने कहा कि एएनएम ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस (वीएचएनडी) में टीकाकरण एवं प्रसव पूर्व जांच के साथ ही परिवार नियोजन पर महिलाओं को सलाह दें। दंपतियों की पंसद के मुताबिक ही परिवार नियोजन संसाधन के लिए प्रेरित करें।

प्रशिक्षक प्रीति (स्टाफ नर्स) ने बताया कि अंतरा बहुत ही प्रभावी गर्भनिरोधक है। इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। लेकिन इसको लगवाने के बाद महिला का मासिक चक्र बंद हो जाता है किन्तु महिला को घबराना नहीं चाहिए। अंतरा इंजेक्शन का असर तीन महीने तक रहता है। हर तीन महीने बाद एक इंजेक्शन लगाया जाता है। अंतरा इंजेक्शन को लगवाने के बाद, इंजेक्शन लगाने वाली जगह को रगड़ना नहीं चाहिए इससे इंजेक्शन का प्रभाव कम हो जाता है।

इस मौके पर मंडलीय परिवार नियोजन एवं लाजिस्टिक मैनेजर अमृता राज, डीएफपीएलएम चैतन्य कुमार, परिवार नियोजन विशेषज्ञ सुरेश पांडेय सहित एएनएम मीना साहू, हुस्ना बानो, रंजना खरे, रानी, दीपमाला, मीना कुमारी, दीपा त्रिपाठी, माला धुरिया, सुधा देवी, उमा सचान, प्रियंका गिरि, सुमन अग्निहोत्री, अमेरुननिशा, रानिगी व सीएचओ अर्चना त्रिवेदी सहित एएनएम उपस्थित रहीं।

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