मां के दरबार में दर्शन कर भक्तों ने लगाये जयकारे

देवी मंदिरों में उमडी भक्तों की भीड़

बांदा। शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन भक्तों ने देवी भगवती के ब्रह्मचारिणी स्वरूप का विधि विधान से पूजन अर्चन किया। मुख्यालय के सभी देवी मंदिरों के साथ दूर दराज के गांवों में भी मां के भक्तों द्वारा पूजन अर्चन किया गया। साथ ही गिरवां स्थित सिद्वपीठ खत्री पहाड में विराजमान मां विंध्यवासिनी के दर्शनों को हजारों की संख्या में भक्त उमडे। शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन मां के द्वितीय स्वरूप ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना तथा आराधना की जाती है। मां ब्रह्मचारिणी के नाम का अर्थ है ब्रह्म मतलब तपस्या और चारिणी का अर्थ है आचरण करने वाली देवी। मां ब्रह्मचारिणी के हाथों में अक्ष माला और कमंडल सुसज्जित है।

मान्यता है कि यदि सच्चे मन से मां का पूजन किया जाये तो व्यक्ति् को ज्ञान, सदाचार, लगन, एकाग्रता और संयम रखने की शक्ति प्राप्त होती है। मां के भक्तों ने सुबह से मंदिरों में पहुंचकर उनके दर्शन कर विधिवत पूजन अर्चन किया। मुख्यालय के सभी देवी मंदिरों में सुबह से देरशाम तक भक्तों की लाइन मां के दर्शनों के लिए लगी रही।

ग्रामीण इलाकों में भी मां के दर्शनों को देवी मंदिरों में भक्त उमड पडे। जनपद के प्रमुख शक्तिपीठ गिरवां स्थित मां विंध्यवासिनी मंदिर में सुबह से कई जनपदों के भक्त दर्शनों के जुटे। भक्तों ने मां के दर्शन पश्चात मां के द्वितीय स्वरूप की आराधना की। मां के दर्शनों के लिए उमड रही भीड को संभालने के लिए मंदिर संचालकों द्वारा पूरी तैयारियां की गयी है।

भक्तों को सामाजिक दूरी के साथ ही मंदिरों में प्रवेश करने दिया जा रहा है। साथ ही मंदिर परिसर को लगातार सेनेटाइज कराया जा रहा है। भक्तों को भी सेनेटाइज के बाद ही मंदिरों के अंदर प्रवेश कराया जा रहा है।