गोरखपुर : चमगादड़ों की मौत ब्रेन हैमरेज से हो रही, कोरोना से कोई संबंध नहीं

  • जांच में चमगादड़ों में कोरोना या वर्ड फ्लू जैसा वायरस नहीं मिला

राघवेन्द्र दास

गोरखपुर। गोरखपुर में दो दिन पहले 26 मई को दर्जनों की संख्या में चमगादड़ों की हुई मौत से सनसनी फैल गई थी। ये मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि पूर्वांचल के कुछ और जिलों से चमगादड़ों की मौत की खबरें आ गईं। इसे कोरोना वायरस से जोड़कर देखा जाने लगा। बर्ड फ्लू एक दूसरा कारण चर्चा में आ गया लेकिन, ये सभी चर्चाएं निर्मूल हैं। IVRI बरेली के निदेशक डॉ. आरके सिंह ने बताया कि चमगादड़ों की मौत के पीछे कोरोना वायरस कारण नहीं है। चमगादड़ों के पोस्टमॉर्टम से इसका खुलासा हो गया है। चमगादड़ों में कोरोना वायरस नहीं पाया गया है। रेबीज की भी जांच की गई है लेकिन, पोस्टमॉर्टम में मौते के पीछे न तो कोरोना वायरस और ना ही रेबीज कारण पाया गया है।

संस्थान के निदेशक डॉ. आरके सिंह ने बताया कि पोस्टमॉर्टम से साफ हो गया है कि चमगादड़ों की मौत ब्रेन हैमरेज के कारण हुई है। तेज गर्मी के कारण ऐसा हुआ होगा। पिछले दिनों पूर्वांचल में एकाएक तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के पास पहुंच गया था। ऐसे में गर्मी के कारण ब्रेन हैमरेज होने से चमगादड़ों की मौत हुई होगी। फिलहाल और जांचें जारी हैं। इनकी मौत के पीछे बर्ड फ्लू की भी कोई संभावना नहीं है। डॉ. आरके सिंह ने ये भी बताया कि चमगादड़ों की इम्यूनिटी (शरीर की प्रतिरोधक क्षमता) इतनी ज्यादा होती है कि उन्हें कोई पैथोजन (वायरस या बैक्टीरिया) मार नहीं सकता है। ये वायरस या बैक्टीरिया के कैरियर भले ही हो सकते हैं लेकिन, इनका खुद चमगादड़ों पर कोई असर नहीं होता है।

उन्होंने ये भी बताया कि गोरखपुर के अलावा पांच और सैम्पल (चमगादड़ों के शव) संस्थान जांच के लिए आए हैं। ये सैम्पल बलिया और इसके आसपास के जिलों से लाये गये हैं। जांच अभी जारी है। ऐसे में यदि तेज गर्मी से ही चमगादड़ों की मौत हुई होगी तो ये सिलसिला अब थम जायेगा क्योंकि तापमान काफी नीचे आ गया है। बता दें कि दो दिन पहले गोरखपुर के एक बगीचे में दर्जनों चमगादड़ों के शव मिले थे इसके बाद बलिया और जौनपुर से भी चमगादड़ों की मौत की खबरें आ गयीं। कुछ दिनों पहले कुछ कौओं की मौत की भी घटनायें सामने आयी थीं। अप्रैल में सहारनपुर में भी चमगादड़ों की मौत हुई थी लेकिन, ये बिजली का करंट लगने से हुआ था।