आलेख : राफेल का कमाल

रंजना मिश्रा कानपुर, उत्तर प्रदेश
रंजना मिश्रा कानपुर, उत्तर प्रदेश

राफेल विमान में 1000 किलोग्राम वजन वाला एक कैमरा लगा होता है जो हजारों फीट की ऊंचाई से नीचे जमीन पर पड़ी क्रिकेट की किसी गेंद को भी देख सकता है और उसकी बिल्कुल साफ तस्वीर खींच सकता है। रफ़ाल 55000 फीट की ऊंचाई से दुश्मन पर हमला करने में सक्षम है। ये एक बार में 16 टन बम और मिसाइल ले जा सकता है।
यह दुनिया का इकलौता लड़ाकू विमान है जो अपने वजन से डेढ़ गुना ज्यादा पेलोड ले जा सकता है। इसमें लगा मल्टीडायरेक्शनल रडॉर 100 किलोमीटर की रेंज में 40 से ज्यादा टारगेट्स को एक साथ निशाने पर ले जा सकता है और इस विमान में 1 मिनट के अंदर ढाई हजार गोले दागने की क्षमता है।

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राफेल की रफ्तार लगभग 2130 किलोमीटर/घंटा है। यानी इस विमान की रफ्तार, आवाज य ध्वनि की रफ्तार से दुगनी है। इस विमान में परमाणु हमला करने की भी क्षमता है। रफ़ाल में तीन तरह की घातक मिसाइलों के साथ 6 लेज़र गाइडेड बम भी फिट होते हैं। इन लेजर गाइडेड बम्स में से प्रत्येक बम की कीमत लगभग 3 करोड़ रुपए के आसपास होती है। राफेल में इंटीग्रेटेड सेल्फ प्रोटेक्शन सिस्टम लगा है जो स्पेक्ट्रा कहलाता है। ये राफेल के रक्षा कवच के रूप में काम करता है। ये दुश्मन के रडार को जाम करने में सक्षम है और उसकी तरफ से आती हुई मिसाइलों के बारे में विमान को अलर्ट कर देता है। विमान उस मिसाइल को मिस गाइड करने की क्षमता रखता है।

राफेल एयर रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट हैं। एयर रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट वो विमान होते हैं जिनमें हवा में ईंधन भरा जा सकता है। एयर रिफ्यूलिंग की मदद से किसी भी विमान की उड़ान क्षमता बढ़ जाती है।रफ़ाल विमान एक बार में 3700 किलोमीटर तक दूरी तय कर सकता है जबकि एयर रिफ्यूलिंग द्वारा ये 5000 किलोमीटर की यात्रा बिना रुके तय कर सकता है। यह 10 घंटे तक लगातार उड़ने की क्षमता रखता है, इस दौरान इस विमान में 6 बार ईंधन भरने की जरूरत पड़ती है जो हवा में ही भरा जा सकता है।