नेताजी के साथ ने बनाया यूपी की सियासत का ‘मैनेजर’

नया लुक ब्यूरो

लखनऊ। जब-जब सियासत में दोस्ती का जिक्र होगा तो वह किस्सा बगैर अमर सिंह के अधूरी ही होगी। अमर सिंह आज नहीं है और तमाम समाजवादी भी यह कहते हैं कि एक समय अमर सिंह ही समाजवादी पार्टी बन चुके थे। उन्हें समाजवादी पार्टी का किंग मेकर यूं ही नहीं कहा जाता है। हालांकि खांटी समाजवादियों को सख्त ऐतराज था पर नेताजी यानि मुलायम सिंह यादव और उनकी दोस्ती सियासत में इस कदर परवान चढ़ी कि नेताजी ने कईयों की परवाह नहीं की और बहुतों से जड़ गए। नेताजी का साथ मिलते अमर सिंह यूपी की सियासत के ‘ मैनेजर ’ माने जाने लगे।

समाजवादी पार्टी के समर्थन से राज्यसभा जाने वाले अमर सिंह मुलायम सिंह यादव के संपर्क में 90 के दशक में आए थे। उन्हें उस वक्त तक देश के नामचीन उद्योगपतियों में गिना जाता था। मुलायम सिंह से दोस्ती होती है और उनके कदम यूपी की सियासत में आगे बढ़ते गये। देखते-देखते समजवादी पार्टी में उनकी हैसियत नंबर 2 की हो जाती है। अमर की सियासत का रसूख यह था कि एक जमाने में उन्होंने अमिताभ बच्चन की पत्नी जया बच्चन से लेकर तमाम बड़े चेहरों को समाजवादी पार्टी के झंडे के नीचे खड़ा करा लिया था।

अमर सिंह से मुलायम की मुलाकात तब हुई जब मुलायम सिंह यादव देश के रक्षामंत्री थे। साल 1996 में अमर सिंह और मुलायम सिंह एक जहाज में मिले थे। हालांकि अनौपचारिक तौर पर मुलायम और अमर की मुलाकात पहले भी हुई थी, लेकिन राजनीतिक जानकार कहते हैं कि फ्लाइट की उस मीटिंग के बाद से ही अमर और मुलायम की नजदीकियां बढ़ी थीं। अमर सिंह की सुब्रत राय सहारा और अनिल अंबानी से भी गहरी दोस्ती रही।

बड़े उद्योगपति और पूर्वांचल के रसूखदार ठाकुर नेता के रूप में पहचाने जाने वाले अमर सिंह कुछ सालों में मुलायम सिंह के इतने खास बन गए कि उन्हें समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव पद पर बैठा दिया गया। राजनीतिक जानकार कहतें है कि साल 2000 के आसपास अमर सिंह का समाजवादी पार्टी में दखल बढ़ा और टिकटों के बंटवारे से लेकर पार्टी के कई बड़े फैसलों में उन्होंने मुलायम के साथ प्रमुख भूमिका निभाई।

आजमगढ़ के तरवा इलाके में 27 जनवरी 1956 को जन्मे अमर सिंह पूर्वांचल के ‘बाबू साहब’ कहे जाते थे। ठाकुर वोटरों के बीच एक बड़े नेता के रूप में प्रशस्त हुए अमर ने भले ही अपना लंबा जीवन महाराष्ट्र के मुंबई शहर में बिताया हो, लेकिन पूर्वांचल की सियासत में अमर का दखल इस बात से ही सिद्ध था कि वह 90 के दशक में यहां के रसूखदार वीर बहादुर सिंह और चंद्रशेखर जैसे नेताओं के सबसे करीबी लोगों में एक कहे जाते थे। वीर बहादुर सिंह के कारण ही अमर सिंह की भेंट मुलायम सिंह यादव से हुई थी।

दो दशक तक पूर्वांचल की सियासत में बड़ी भूमिका निभाने वाले अमर को जब साल 2010 में समाजवादी पार्टी से निष्कासित किया गया तो उन्होंने पू्र्वांचल को अलग राज्य घोषित करने की मांग के साथ अपनी पार्टी राष्ट्रीय लोकमंच का गठन किया। लोकमंच ने आजमगढ़ समेत पूर्वांचल के कई जिलों में बड़ी सभाएं भी की, लेकिन कोई खास असर नहीं दिखा सकी।