“बटुकों का सम्मान, हमारा सौभाग्य”-संस्कृति, श्रद्धा और सामाजिक समरसता का आलोक

“बटुकों का सम्मान, हमारा सौभाग्य”, यह केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि भारतीय आत्मा का उद्घोष है। यह हमें स्मरण कराता है कि हमारी शक्ति केवल आर्थिक विकास या राजनीतिक प्रभुत्व में नहीं, बल्कि सांस्कृतिक निरंतरता में है। जब तक हमारे घरों में वेद-मंत्रों की गूंज रहेगी, जब तक बटुकों के चरणों से आंगन पवित्र होता … Continue reading “बटुकों का सम्मान, हमारा सौभाग्य”-संस्कृति, श्रद्धा और सामाजिक समरसता का आलोक